जुबां पर नहीं चढ़ता जिस खेल का नाम, उसके मैडल पर लिख दिया अपना नाम

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यूथ आइकन- जुबां पर नहीं चढ़ता जिस खेल का नाम, उसके मैडल पर लिख दिया अपना नाम, मनाली की आंचल ठाकुर स्कीइंग में इंटरनेशनल मैडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी

मनाली से नरेंद्र अंगारिया की रिपोर्ट


हिमाचल प्रदेश में अधिकतर लोगों के जिस खेल का सही से नाम लेना नहीं आता, उसी खेल में अंतरराष्ट्रीय मैडल को अपने नाम लिखवा कर देश की पहली खिलाड़ी बनने वाली मनाली की आंचल ठाकुर देश के युवाओं की यूथ आइकन बन गई है। बेशक आंचल ठाकुर की चमकदार कामयाबी पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सारे देश ने बधाई दी हो, लेकिन बहुत कम लोगों को इस बात का इल्म है कि यहां तक पहुंचने के लिए आंचल ने सालों दिन-रात एक किए हैं। विदेश में जाकर प्रशिक्षण हासिल किया है, तब जाकर यह उपलब्धि उसके नाम हुई है। भारत में स्कीइंग जैसे खेलों के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी को देखते हुए आंचल के पिता ने अपनी लाडली की खेल प्रतिभा को निखारने के लिए उसे विदेश भेजा। आंचल ठाकुर जब सातवीं कक्षा की स्टूडेंट थी तो स्कींइग के खेल में शिखर पर पहुंचने के लिए यूरोप, अमेरिका, न्यूजीलैंड व कोरिया में ट्रेनिंग के लिए जाती थी।

बेटी के कैरियर को पिता की साधना

स्कीइंग में राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे और विंटर गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव रोशन ठाकुर खुद ने अपनी बेटी के हुनर को बचपन में ही पहचान लिया था। एक पिता ने बेटी के खेल कैरियर को बनाने के लिए अपनी जीवन भर की पूंजी को उसकी महंगी ट्रेनिंग पर निवेश कर दिया। खेल कितना महंगा है कि इसका अदंाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आंचल कहती हैं कि स्कीइंग के पेयर ही 80 से 90 हजार के आते हैं, जबकि गियर समेत पूरा सामान सात से आठ लाख रुपए तक आता है।

पिता की उम्मीदों पर खरा उतरी होनहार बेटी


पिता की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए साल 2018 में 21 साल की उम्र में लाड़ली ने बिरला रिकॉर्ड लिख डाला है। आंचल इंटरनेशनल स्कीइंग प्रतियोगिता में पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई है। आंचल ने तुर्की में अंतरराष्ट्रीय स्की फेडरेशन की ओर से आयोजित अल्पाइन एडर-3200 कप टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीत कर सुनहरा पन्ना लिख दिया है। अपनी बेटी की शानदार कामयाबी पर गदगद पिता कहते हैं। कि उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में आंचल नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।

वीडियो कांफ्रेंसिंग से पिता से बात

जीत के बाद आंचल ने वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए पिता को खुशखबरी दी तो उन्हें पहले भरोसा ही नहीं हुआ। आंचल कहती हैं कि उन्होंने पिता का सपना पूरा कर दिया है। किसी ने नहीं सोचा था कि मैं स्कीइंग में मैडल हासिल करूंगी, मैंने भी नहीं सोचा था, क्योंकि भारत में कोई इस खेल के बारे में सोचता ही नहीं है। पदक के लिए जब मेरे नाम की घोषणा हुई तो तुर्की में लोग हैरान थे। कई लोगों ने मुझसे पूछा कि क्या भारत में सच में बर्फ पड़ती है? मैंने उन्हें जवाब दिया कि बिलकुल बर्फ पड़ती है, हमारे पास हिमालय है।
प्रधानमंत्री ने किया बधाई वाला ट्वीट
आंचल ठाकुर की कामयाबी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उसे बधाई दी । पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘बहुत खूब आंचल ठाकुर स्कीइंग में अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने के लिए! तुर्की में आयोजित एफआईएस अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता में आपकी ऐतिहासिक उपलब्धि से संपूर्ण राष्ट्र उल्लासित है। आपके भविष्य के प्रयासों के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।’

मोदी के ट्रेनर रहे आंचल के पिता

22 साल पहले जब नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रभारी थे तो आंचल ठाकुर के पिता ने उन्हें पैराग्लाइडिंग की ट्रेनिंग दी थी। मीडिया रिपोट्र्स में ऐसे फोटो भी सामने आए थे, जिसमें आंचल के पिता रोशन ठाकुर नरेंद्र मोदी को पैराग्लाइडिंग की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

नकद पुरस्कार की घोषणा


हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आंचल ठाकुर इंटरनेशनल स्कीइंग में इंटरनेशनल मैडल जीतने के लिए उन्हें बधाई देते हुए नकद पुरस्कार की घोषणा की।

कुल्लू में जोरदार स्वागत

जीत के बाद तुर्की से कुल्लू पहुंचने पर परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर सहित जिला के लोगों ने आंचल ठाकुर का जोरदार स्वागत किया। इस उपलब्धि के लिए सोशल मीडिया पर आंचल ठाकुर की जमकर तारीफ हुई।

तुम स्काई करती हो

आंचल ठाकुर ने ‘फोकस हिमाचल’ को बताया कि जब उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्वीट देखा तो वह भावुक हो गई। ‘मेरी रूममेट उस वक्त कमरे में नहीं थी, मैं ट्वीट पढक़र खुशी से चिल्लाने लगी।’ आंचल को उम्मीद है कि उसकी सफलता से देश में शीतकालीन खेलों के अच्छे दिन आएंगे। आंचल ठाकुर कहती हैं कि जब लोग उससे पूछते हैं कि तुम स्काई करती हो? तो पहले दो मिनट तो खेल का सही नाम बताने में ही लग जाते हैं। आंचल का कहना है कि देश में अभी भी लोगों को स्कीइंग भी कहना नहीं आता।


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