जीने की राह – जेब से पैसा लगाया, सिर पर कर्जा चढ़ाया, जान सहयोग से गांव के युवाओं के लिए खेल मैदान बनाया, अवाम संस्था के संस्थापक जग्गू नोहरिया के जज्बे को जयहिंद

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जीने की राह – जेब से पैसा लगाया, सिर पर कर्जा चढ़ाया, जान सहयोग से गांव के युवाओं के लिए खेल मैदान बनाया, अवाम संस्था के संस्थापक जग्गू नोहरिया के जज्बे को जयहिंद
नगरोटा बगवां से विनोद भावुक की रिपोर्ट
कुछ लोग सिर्फ खुद के लिए जीते हैं और कुछ ज़माने के लिए। वे कुछ ऐसा कर गुजरते हैं कि समाज के लिए प्रेरक बन जाते हैं। आज की इस कहानी के नायक ने जब देखा कि गांव के युवाओं के खेलने के लिए कोई मैदान नहीं है, तो अपनी जेब से पैसा लगा कर और खुद पर कर्जा चढ़ा कर जान सहयोग से गांव में खेल के मैदान का निर्माण करने का बीड़ा उठाया और इरादों के पक्के इस युवा ने इस सपने को सच कर दिखाया। हम परिचय करवा रहे हैं नगरोटा बगवां के क्षेत्र में सामाजिक कार्यों के जुटी सामजसेवी संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जग्गू नोहरिया से। जग्गू को बाल्यकाल से ही समाजसेवा की सीख अपने बडो़ं से मिलती रही। पिता को जरूरतमंद लोगों की मदद करते देखते तो कभी रास्ते बनाना या किसी बुजुर्ग का सामान उठा कर ले चलना उनके मन को सकून देता था। कालांतर में जग्गू इसी रास्ते पर बढ़ते हुए जीवन को सार्थक कर रहे हैं।
‘अवाम’ के लिए छोड़ दी जॉब
जग्गू नोहरिया सोलन में एक नामी कंपनी में आकर्षक पॅकेज वाले मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। अपने गांव के लिए कुछ खास करने के मकसद से साल 2015 में उन्होंने नौकरी छोड़ समाजसेवा के लिए राज्य स्तरीय संस्था ‘अवाम’ का गठन किया। पत्नि कुसुम व बेटियों हीना और चेतना ने उनका साथ दिया। गांव के बच्चे नशे व अन्य कुसंगतियों से दूर रहें, इसके लिए खेल मैदान होना जरूरी था। खेल मैदान के निर्माण कि ऐसी धुन सवार हुई कि पीएफ तक का पैसा इसमें लगा दिया। पैसे कम हो जाने पर सोसायटी और एलआईसी से कर्ज लेकर निर्माण करवाया। समाजसेवी होने के साथ जग्गू नोहरिया ने साहित्य लेखन में भी अपनी छाप छोड़ी है।
सेना से लिए जवान तैयार कर रहा मैदान
जग्गू नोहरिया ने ‘फोकस हिमाचल’ को बताया कि मैदान के निर्माण के लिए कई दोस्त प्रत्यक्ष व अप्रत्क्ष रूप से सहयोगी रहे हैं। वे कहते हैं कि यह देख कर खुशी होती है कि इस मैदान में आज युवा खेलते हैं, दौड़ते हैं और आर्मी और पैरा मिलिट्री फ़ोर्स में भर्ती होने की फिजिकल ट्रेनिंग करते हैं। वे बताते हैं कि आसपास से कई युवा इस मैदान में अभ्यास कर सेना और पैरा मिलिट्री फ़ोर्स में शामिल हो चुके हैं। इस खेल मैदान पर हर साल 15अगस्त , दशहरा और 26जनवरी के रोज खेल स्पर्धाओं और सामाजिक समारोहो़ का आयोजन किया जाता है।
मैनेजर बन गया एक इंजीनियर
नगरोटा बगवां की रजियाणा पंचायत के नोरा गांव में 30 अप्रैल 1966 को किसान पृष्ठभूमि वाले परिवार में माता बामरू व पिता डूमणू राम के घर पैदा हुए जग्गू की स्कूली शिक्षा जसौर के सरकारी स्कूल से शुरू हुई और सीनियर सेकेंडरी स्कूल नगरोटा बगवां से दसवीं करने के बाद डीएवी कॉलेज कांगड़ा में बीएससी नोन मैडिकल में प्रवेश लिया। जग्गू सेना में भर्ती हुए लेकिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई में प्रवेश मिलने पर सेना में शामिल होने की जगह पढा़ई में जुट गये। इंजीनियरिंग की पढा़ई पूरी होते ही एक बड़ी कम्पनी का जॉब ऑफर मिला। जग्गू ने लगन और मेहनत से अपना लोहा मनवाया और 23 बर्ष की जॉब में उस कम्पनी में मनेजर के पद पर आसीन हुए।

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