जिंदगी की ढलान पर उम्मीदें परवान- मिलिए संगीत और साहित्य के सृजन में जुटे हिमाचल प्रदेश के सबसे बुजुर्ग दंपति से

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जिंदगी की ढलान पर उम्मीदें परवान- मिलिए संगीत और साहित्य के सृजन में जुटे हिमाचल प्रदेश के सबसे बुजुर्ग दंपति से

मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट
उम्र के जिस दौर में इनसान दूसरों का मोहताज हो जाता है, उम्र के उस दौर को मात देकर मंडी का एक दंपति साहित्य और संगीत के सृजन में जुटा है। मंडी के वयोवृद्व साहित्यकार योगेश्वर शर्मा (85) व संगीत कोकिला के नाम से मशहूर उनकी पत्नी शुक्ला शर्मा (75) अपने- अपने सृजन में साधनारत हैं। यागेश्वर शर्मा की चौथी पुस्तक ‘फोन पर महानगर’ पिछले साल ही प्रकाशित हुई है। शुक्ला शर्मा अब भी नियमित अपने घर में संगीत की कक्षाएं चला रही हैं, जहां ंबच्चों को संगीत की निशुल्क शिक्षा प्रदान की रही है। बेशक योगेश्वर शर्मा पर उम्र का असर दिखने लगा है, अब थोड़ा ऊंचा सुनने लगे हैं और साहित्यिक कार्यक्रमों से परहेज करने लगे हैं, लेकिन शुक्ला शर्मा न केवल साहित्य व संगीत के कार्यक्रमों में नियमित भाग लेती हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी एक्टिव हैं। दोनों ने लंबे समय तक विभिन्न कॉलेजों में अध्यापन किया है और दोनों प्रिंसीपल के पदों से सेवानिवृत हुए हैं। दोनों वर्ष 1966 में परिणय सूत्र में बंधे। दो बेटियों मनीष व इंशिता को उच्च शिक्षित किया। दोनों की शादियां हो चुकी हैं और दोनों अमेरिका में कम्प्यूटर इंनीनियर हैं।

पांच साल की उम्र से शुरू हुआ संगीत का सफर जारी


वर्ष 1945 को पंडित पदमनावन के घर पैदा हुई शुक्ला शर्मा ने पांच साल की उम्र में संगीत की शिक्षा लेनी शुरू की। उन्होंने कन्या विद्यालय मंडी से स्कूली पढ़ाई करने के बाद वल्लभ कॉलेज मंडी से स्नातक किया। पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से म्यूजिक (वोकल में एमए), प्रवीण प्रयाग समिति इलाहबाद से संगीत प्रवीण की। सबसे पहले उन्होंने अकाशवाणी शिमला पर मंडयाली कार्यक्रम प्रस्तुत किया। वर्ष 1978 में पहाड़ी गीतों की अलबम रिलीज हुई, फिर ‘देवदार’ व ‘यादों का मौसम’ अलबम ने खूब धूम मचाई। गजल से लेकर लोक संगीत में दखल रखने वाली शुक्ला शर्मा को अमेरिका में भी संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत करने का अवसर मिला है। राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों उन्होंने अपने गायन से श्रौताओं को मंत्रमुग्ध किया है। विभिन्न मंचों से सम्मानित शुक्ला शर्मा को 1982 में हिमाचल आर्ट एडं कल्चर सोसायटी ने सम्मानित किया है। सेवानिवृति के बाद से वे बच्चों को अपने घर पर निशुल्क संगीत की शिक्षा दे रहीं हैं।

‘आ गया भराड़ीघाट’ के कहानीकार
13 जुलाई 1936 को मंडी में जन्मे योगेश्वर शर्मा को लिखने- पढऩे का माहौल घर से ही मिला। स्कूल, कॉलेज के दिनों से ही साहित्य में गहरी रूचि रही। उन्होंने कई विधाओं में लेखन किया, लेकिन रचनाओं के प्रकाशन को लेकर कभी गंभीर नहीं रहे। हालांकि विभिन्न पत्र पत्रिकाओंं में उनकी रचनाएं गाहे- बगाहे प्रकाशित होती रहीं। उन्होंने हिंदी व अंग्रेजी में एमए किया और सालों विभिन्न महाविद्यालयों में अध्यापन का कार्य किया। उनके चार कहानी संग्रह‘नंगा आदमी’, ‘आ गया भराड़ीघाट’, ‘बसांव ’ व ‘फोन पर महानगर’ प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने बेशक कम लिखा है, लेकिन कमाल लिखा है। उनकी रचनाओं में अपनी तरह का एक व्यंग्य नजर आता है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उन्हें आज के आदमी के दोहरे चरित्र, उसकी मानसिकता पर गुस्सा आता है। इसी क्षोभ को व्यक्तकरने के लिए उन्होंने व्यंग्य को एक औजार के तौर पर चुना है।


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