जमा दो तक पढ़े देहरा के विपिन ने लीज की जमीन पर की उम्मीदों की खेती, 90 कनाल में जड़ी- बूटियों की खेती कर बने सफल उघमी

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जमा दो तक पढ़े देहरा के विपिन ने लीज की जमीन पर की उम्मीदों की खेती, 90 कनाल में जड़ी- बूटियों की खेती कर बने सफल उघमी
देहरा से संजीव कौशल की रिपोर्ट
ऐसे में जबकि देश भर से किसानों के कर्जदार होने की खबरें आ रही हैं, हिमाचल प्रदेश के एक कमोवेश कम पढ़े लिखे युवक के खेत सोना उगल रहे हैं। जमा दो तक पढ़े कांगड़ा जिला की देहरा तहसील के मगरू सुरयाला गांव के विपिन कुमार लीज की जमीन पर उम्मीदों की खेती कर रहे हैं। 90 कनाल में जड़ी- बूटियों की खेती कर रहे विपिन आज सफल उघमी बन चुके हैं। जड़ी बूटियों की खेती में छुपी आर्थिकी को समझने की ललक उन्हें जयपुर तक ले गई। जड़ी बूटियों की खेती और प्रोसेसिंग कर वैल्यू एडिसन कर करने की तरकीब समझ आई तो एलोवेरा की ख्ेाती से शुरू हुआ सफर नींबू, पपीता व स्टीविया की खेती व सेब की बागवानी तक पहुंच गया है। अब उन्होंने अब एक्सट्रेक्ट और जूस तैयार करने की यूनिट लगाई है और होशियारपुर की कंपनी से खरीद कररार किया है। उनका खुद का सारा परिवार जहां उनके स्टार्टअप का सहयोगी है, वहीं घर के पास ही चार लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करवा रहे हैं।
छोटी शुयआत, अब बड़ा कारेाबार
जड़ी– बूटियों की खेती से ग्रामीण क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की पहल करने वाले मगरू सुरयाला के विपन उन अग्रणी किसानों में हैं जिन्होंने परम्परागत खेती की जगह औषधीय कृषिकरण कर सफल उद्यम स्थापित कर साबित किया है कि जिद और जुनून से किसी भी क्षेत्र में कामयाबी हासिल की जा सकती है। कभी 5 कनाल में एलोवेरा की ख्ेाती से शुरूआत हुई थी, लेकिन जैसे जैसे उन्हें औषधीय पौधों की खेती और प्रोसेसिंग की समझ बढ़ती गई, उनके कारोबार का दायरा भी बढ़ता गया। अब वे 90 कनाल में जड़ी बूटियों की खेती कर रहे हैं और खुद का प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित कर दिया है।
सरकार की मदद से चमत्कार
विपन बताते हैं कि साल 2009 में हिमाचल सरकार के बागवानी विभाग की तकनीकी एवं आर्थिक मदद से 5 कनाल पर एलोवेरा की खेती की शुरूआत की । विभाग ने उन्हें जड़ी बूटियों की खेती के लिए वानिकी विश्वविद्यालय नौणी और कृषि विद्यालय पालमपुर से हर्बल खेती करने के लिए ट्रेनिंग दिलवाई। विभाग की मदद से ही विपन ने जयपुर हर्बल अनुसंधान केेंंद्र से 15 दिन की ट्रेनिंग ली और जड़ी– बूटियों की खेती, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के गुर सीखे।
बेचने के लिए कंपनी से करार
विपन कुमार ने बताया कि उपने उत्पादों को बेचने के लिए उन्होंने होशियारपुर की एक कंपनी के साथ 15 वर्षों का अनुबंध किया है। उन्होंने बताया कि जड़ी- बूटियों की प्रोसेसिंग कर अच्छे लाभ को देखते हुए प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर अपने फार्म में ही एलोवेरा का एक्सट्रेक्ट और जूस का भी बना रहे हैं। उन्होंने पिछले वर्ष 264 क्विंटल एलोवेरा, 7 हजार लीटर एक्ट्रेक्ट, 3500 लीटर जूस का उत्पादन किया। वह पपीते का एक्सट्रेक्ट भी बना रहे हैं।

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