चीन – रूस के सरकारी टूअर और करोड़ों फूंक कर भी कबायलियों की किस्मत नहीं बदल पाया छरमा, हिमाचल के युवा उद्यमी ने तैयार किये छरमा के उत्पाद,

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चीन – रूस के सरकारी टूअर और करोड़ों फूंक कर भी कबायलियों की किस्मत नहीं बदल पाया छरमा, हिमाचल के युवा उद्यमी ने तैयार किये छरमा के उत्पाद,
विनोद भावुक की रिपोर्ट
कैंसर जैसे आसाध्य रोग को दूर करने के औषधीय गुणों से भरपूर छरमा (सीबकथोर्न )में वह ताकत है कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य के जनजातीय क्षेत्र में रोजगार सृजन और सतत आजीविका उपलब्ध करवा कर कृषि आर्थिकी का चेहरा बदलने की कुव्वत रखता है. छरमा कुदरती तौर पर लाहुल और स्पीति में पैदा होता है। जनजातीय क्षेत्रों में छरमा की प्लांटिंग करने के लिए क्वालिटी प्लांटिंग मैटीरियल तैयार करने के नाम पर कर्जे में डूबे हिमाचल प्रदेश के करोड़ों फूंके जा चुके हैं और चीन और रूस के हवाई दौरे भी नेताओं और अफसरों के खाते में दर्ज हैं. लेकिन क्वालिटी प्लांटिंग मैटीररियल के नाम पर महज चंद मरे हुए पौधे कुकुमसेरी की नर्सरी का मुंह चिढ़ा रहे हैं.
छरमा की वैल्यू चेन 
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला के आनी विधानसभा क्षेत्र के दूर दराज गाँव के युवा उद्यमी (स्टार्टअप इंडिया में इकलौता हिमाचली चेहरा ) डॉ. देव भारद्वाज के प्रयासों से लाहुल फूड्स के बैनर टेल छरमा की वेल्यू चेन को मजबूत कर इससे खाद्य उत्पाद और एनर्जी ड्रिंक्स तैयार कर बाजार में उतार दिए हैं. मुंबई आधारित ऊर्जा वर्ल्ड ट्रस्ट छरमा की वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए लाहुल फूड्स के प्रमोटर के तौर पर आगे आया है. बीते दिनों जयपुर में आयोजित भव्य समारोह में कृषि मंत्री राम लाल मारकंडा की उपस्थिति में जैन संत अरिहंत ऋषि ने इन उत्पादों को लांच किया और राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिस्र ने यकीन दिलवाया कि गुणवत्ता वाले मेड इन हिमाचल के इन उत्पादों के राजस्थान में विपणन के लिए वे हर संभव मदद करेंगे।
क्वालिटी प्लांटिंग मैटीरियल 
डॉ. देव भरद्वाज ने छरमा के क्वालिटी प्लांटिंग मैटीरियल को तैयार करने से लेकर छरमा में वैल्यू एडिसन करने का प्रस्ताव कृषि मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा को सौंपा है. इस प्रपोजल के तहत स्वयं सहायता समूहों के जरिये छरमा की प्लांटिंग से लेकर वैल्यू एडिशन तक सतत आजीविका और रोजगार सृजन के अवसर घर के पास उपलब्ध करवाए जाएंगे। बेशक अभी तक छरमा के उत्पाद गाजियाबाद में तैयार किये जा रहे हैं लेकिन जल्द ही हिमाचल से इसका उत्पादन शुरू होगा।
करोड़ों खर्च कर नहीं उगा छरमा
क्या हिमाचल की जनता को यह जानने का हक नहीं है कि अब तक छरमा से कबायली लोगों को विकास का सपना दिखाने पर नेताओं और अफसरों ने गरीब प्रदेश के कितने करोड़ फूंक डाले और उससे हासिल क्या हुआ? जरूरी है कि सरकार एक कमेटी जिसमें नेशनल मेडिसनल प्लांट बोर्ड के विशेषज्ञ भी शामिल हों, का गठन कर अब तक छरमा के नाम पर हुए खर्च और काम की रिपोर्ट मांगे जिसमें अगले पचास साल के लिए छरमा आधारित सत्तत आजीविका और रोजगार सृजन का रोडमैप भी शामिल हो.
स्टार्टअप की खोज 
लाहुल फूड्स स्टार्टअप धर्मशाला में आयोजित इन्वेस्टर मीट का पहला एमओयू जो हकीकत की जमीन पर उतरा है. स्टार्टअप के प्रमोटर छरमा के उत्पादों की करोड़ों डॉलर की ग्लोबल मार्किट को देखते हुए छरमा के क्षेत्र में करोड़ों का निवेश करने को तैयार हैं। प्रदेश सरकार शीतकालीन सत्र के लिए धर्मशाला पहुँच रही है। धर्मशाला में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में इन्वेस्टर मीट का आयोजन हुआ है. इन्वेस्टर मीट के बाद शुरू होने वाले पहले स्टॉर्टअप के उत्पादों को क्या प्रदेश सरकार को धर्मशाला से प्रचारित – प्रसारित नहीं करना चाहिए? क्या ऐसे स्वस्थ्यवर्धक उत्पाद हिमाचल प्रदेश पर्यटन निगम की इकाइयों, हिमाचल भवन व हिमाचल सदन नई दिल्ली और हिमाचल भवन चंडीगढ़ में मेहमानों के लिए नहीं उपलब्ध होने चाहिए ?

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