चार साल की उम्र में सिर से उठ गया पिता का साया, ताऊ ने प्रतिभा को पहचान सैनिक स्कूल में पढ़ाया, कुगती के पहले सैन्य अफसर बनने वाले अनूप कुमार की प्रेरककथा

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चार साल की उम्र में सिर से उठ गया पिता का साया, ताऊ ने प्रतिभा को पहचान सैनिक स्कूल में पढ़ाया, कुगती के पहले सैन्य अफसर बनने वाले अनूप कुमार की प्रेरककथा
कुगती से पंकज शर्मा की रिपोर्ट
चंबा जिला के कुगती गांव के अनूप कुमार महज चार साल का था कि खेती -बाड़ी कर परिवार का पालन पोषण करने वाले उनके पिता अमी चंद का साया उसके सिर से उठ गया. ऐसे में अनूप औऱ उनके दो छोटे भाईयों की परवरिश उनकी मां के लिए कतई आसान नहीं था. मां के संघर्ष को अनूप ने बचपन में करीब से देखा औऱ उसके बालमन पर गहरा असर हुआ. यही वजह रही कि छोटी उम्र में वह समझदार हो गया. पांच साल के होने पर कुगती के सरकारी स्कूल में अनूप का दाखिला कर दिया. घर के काम- काज में मां का हाथ बंटाने के साथ अनूप पढ़ने- लिखने में व्यस्त रहता. तीसरी पास करने के बाद अनूप के ताया विक्रम जो दिल्ली में नौकरी करते थे, उसे अपने साथ ले गए. उनके दिशा निर्देश में अनूप ने सैनिक स्कूल सुजानपुर में प्रवेश के लिए परीक्षा पास कर जमा दो तक की पढ़ाई पूरी की.
कुगती के पहले सैन्य अफसर
सैनिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनकी गिनती प्रतिभावान स्टूडेंट्स में होती थी. साल 2018 में अनूप कुमार ने भारतीय सेना में अफसर बनने की राष्ट्रीय परीक्षा पास की औऱ तीन साल की ट्रेनिंग के बाद इसी साल लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया. कुगती से आर्मी अफसर बनने वाले पहले युवा हैं, जो यहां की नई पीढ़ी के लिए रोल मॉडल हैं. अनूप का कहना है़ कि उसकी इस कामयाबी में उनकी माता, उनके ताया औऱ उनके शिक्षकों का हाथ औऱ साथ है़.
युवाओं के लिए प्रेरक अनूप
अनूप का एक भाई जमा दो का स्टूडेंट है़, जबकि एक भाई खेती का काम करता है़. अनूप की माता को करीब पांच साल पहले सरकारी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी के पद पर नौकरी मिल गई है़. 21 साल के अनूप ने अपने परिवार की जिम्मेदारी को संभाल लिया है़. उमीद की जानी चाहिए कि अनूप की यह कामयाबी स्थानीय युवाओं को भारतीय सेना में अफसर बनने के लिए प्रेरक बनेगी.

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