चाय बागान के बीच ठहरने का आंनंद लेना चाहते हो तो आपकी मेजबानी को तैयार 70 एकड़ में फैली 150 साल पुरानी दरंग टी इस्टेट

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चाय बागान के बीच ठहरने का आंनंद लेना चाहते हो तो आपकी मेजबानी को तैयार 70 एकड़ में फैली 150 साल पुरानी दरंग टी इस्टेट
पालमपुर से संजीव कौशल की रिपोर्ट
अगर आप कांगड़ा जिला की सैर करने की सोच रहे हैं तो देश के सबसे पुराने चाया बागानों में रूकने का अवसर पर छोडि़ए। यहां आपको पशमीने जैसी धुंध में लिपटी खूबसूरत धौलाधार घाटी में करलव करते हुए परिंदे किसी दूसरी ही दुनिया में ले जाएंगे।
चीड़ के पेड़ों में बेपनाह शांति आपके रोम- रेाम को चिरस्थाई मुस्कान से भर देगी। यह टी इस्टेट पहाड़ के अद्वितीय प्राकृतिक वैभव से परिचित करवाती है और बर्फ से ढक़ी धौलाधार की चोटियां यहां से अपने दिव्य रूप में दिखाई देती हैं।
तो आज हम आपको लेकर चलते हैं दरंग टी इस्टेट में, जहां आप परिवार सहित ठहरने का आनंद ले सकते हैं। मैकलोडगंज से पालमपुर की ओर एक घंटे में यहां पहुंचा जा सकता है, जबकि पालमपुर से महज बीस मिनट की दूरी पर यह टी इस्टेट स्थित है।
70 एकड़ में फैली 150 साल पुरानी दरंग टी इस्टेट आपकी मेजबानी करने को तैयार है। यहां ठहरने के लिए चार आरामदायक कॉटेज उपलब्ध हैं।
दरंग टी इस्टेट का गौरव
दरंग टी इस्टेट एक पारिवारिक संपत्ति है। दरंग टी इस्टेट के बारे में कहा जाता है कि अंग्रेजों के किसी पहले भारतीय द्वारा लगाए गए चाय बगानों में एक है। इस के वर्तमान मालिक नवीन भंडारी और नीरू भंडारी दंपति हैं।
नवीन भंडारी की माता क्षेत्र की प्रभावशाली महिला थीं और वह यहां की पहली महिला चाय बागवान थीं। वह दरंग पचांयत की पहली महिला पंच भी रहीं हैं। नवीन भंडारी और नीरू भंडारी दंपति जबरदस्त मेजबान हैं। नवीन जहां शौकिया फोटोग्राफर हैं, वहीं बागवानी की शौकीन नीरू को खाना बनाने का शोक है। यहां होम स्टे में ठहर कर आप घर जैसा आनंद ले सकते हैं।

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