चम्बयाली थियेटर की शान, मखमली आवाज से पहचान

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चम्बयाली थियेटर की शान, मखमली आवाज से पहचान

चंबा से पौमिला ठाकुर की रिपोर्ट

पानी के लिए खुद का बलिदान कर देने वाली रानी चम्पा की नगरी चंबा मे लोक संस्कृति के खुद को समर्पित कर देने वाली एक लड़की के संघर्ष और समर्पण की इस सच्ची कहानी की नायिका हैं मन्जू चिश्ती। वे न केवल मखमली आवाज की मल्लिका, मंझी हुई रंगकर्मी, बल्कि उच्च श्रेणी की चित्रकार हैं। करीब साढ़े तीन दशक से मन्जू चंबा जनपद की अलमोल विरासत को सहेजने में जुटी हुई हैं। चम्बा में अनंत राम शर्मा के घर जन्मी मन्जू का बचपन से ही अपनी लोक संस्कृति से जुड़ाव होने के कारण उन्होंने इसके मौलिक स्वरूप के प्रसार- प्रचारके लिए लोकगायकी, रंगमंच और विश्वविख्यात पहाड़ी मिनिएचर पेंटिंग की चम्बा शैली को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया।

चंबा में दशकों से थियेटर की पहचान हैं चिश्ती दंपति
वर्ष 1987 में चम्बा के एक बेहद उम्दा रंगकर्मी अमीन चिश्ती से वैवाहिक बन्धन में बंधीं। विवाहोपरांत मन्जू व अमीन चिश्ती ने मिलकर चम्बा की लोक संस्कृति के उत्थान लिए खुद को समर्पित कर दिया।

हिंदी और चम्बयाली रंगमंच में बनाई खास पहचान

मन्जू ने तीस से भी अधिक नाटकों में लेखन व निर्देशन के अतिरिक्त बीसियों नाटकों में प्रभावशाली भूमिकाओं में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुकी हैं। हिंदी में ‘इडिपस, ‘आज का अभिमन्यु, ‘अंधा युग जैसे नाटकों के अलावा चम्बयाली बोली में ‘छिम्बी- दलपत, ‘छैल गद्दी, ‘फुलमू- रांझु, ‘राणी दा बलिदान और ‘चम्बा इतिहासे रे झरोखे आदि नाटकों में निर्देशन और अभिनय में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं।

पारम्परिक चम्बयाली लोक संगीत के गायन में माहिर
हिमाचल प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख राज्य स्तरीय व अंतर्राष्ट्रीय उत्सवों व त्योहारों की स्टार नाईट का मन्जू जी विशेष आकर्षण होती हैं। हरियाणा, दिल्ली, उड़ीसा, कर्नाटक आदि राज्यों में पारम्परिक चम्बयाली लोक संगीत की स्वर लहरियां बिखेरने वाली मन्जू 40 से भी अधिक ऑडियो अलबम में गा चुकी हैं। उन्होंने ‘फोकस हिमाचल से विशेष संवाद में बताया कि संगीत उनके लिए अंतहीन साधना है, भक्ति का स्वरूप है। चुनौतियां हैं तो आनंद भी हैं।

ठेठ चम्बयाली पहनावे में पारम्परिक यंत्रों पर गायन
मन्जू के पास चम्बयाली लोक गीतों फाटेडू, घुरेहियां, कुंजड़ी मल्हार, बसन्त, होली, लोहड़ी, ऋतु व विवाह गीतों का अनमोल खजाना है। हिमाचल श्री से सम्मानित मन्जू के गायन की विशेषता यह है कि वे परम्परागत वाद्य यंत्रों के साथ गाना गाने को वरीयता देती हैं। सुंदर सजे मंच पर ठेठ चम्बयाली पहनावे में जब साजिंदे व नर्तकों के साथ मन्जू संगीत कार्यक्रम आरम्भ करती हैं तो एक समां सा बांध देती हैं।

पहाड़ी चित्रकला को दी नई उड़ान
बहुमुखी प्रतिभा की धनी मन्जू को पहाड़ी चित्रकला में महारत हासिल है। वे ‘सदा आर्ट गैलरी के माध्यम से अनेकों युवा प्रशिक्षुओं को पहाड़ी चित्रकला का निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान कर चित्रकला की इस शैली के संरक्षण में अहम भूमिका अदा कर रही है।

हॉलीवुड की’जीसस में मन्जू की मखमली आवाज
‘गिन्नीस बुक ऑफ़ वल्र्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हॉलीवुड फिल्म ‘जीससÓ के चम्बयाली बोली में रूपांतरण की डबिंग में मन्जू ने विभिन्न पात्रों को अपनी मोहक आवाज़ देकर सजीव बनाया है। इसी फि़ल्म के रेडियो कार्यक्रम के लिए उदघोषिका की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन भी प्रभावी ढंग से किया है।


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