चंबा नहीं अचभा है- सबसे लंबी वंशावली का रिकॉर्ड, सातवीं से 19वीं सदी तक  एक ही वंश के एक सौ आठ शासकों ने किया शासन

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चंबा नहीं अचभा है- सबसे लंबी वंशावली का रिकॉर्ड, सातवीं से 19वीं सदी तक  एक ही वंश के एक सौ आठ शासकों ने किया शासन 
चंबा से विनोद भावुक की रिपोर्ट 

हिमालय की पीरपंजाल और धौलाधार पर्वत श्रंखला के बीच रावी किनारे बसी चंबा घाटी विश्व सभ्यताओं के इतिहास में एक ही राज परिवार की अटूट शासन श्रंखला का विश्व रिकॉर्ड है। सूर्यवंशी राज परिवार की कई पीढ़ियां बारह सौ सालों तक घाटी पर राज करती रहीं। यह श्रंखला तब टूटी जब देश की आजादी के बाद चंबा रियासत का हिमाचल प्रदेश में विलय हुआ। सबसे लंबी वंशावली सातवीं से 19वीं सदी तक यहां एक ही वंश के एक सौ आठ शासकों ने शासन किया। शासकों की संख्या को लेकर हालांकि इतिहासकारों में मतभेद है, लेकिन दुनिया की सबसे लंबी वंशावली का विश्व रिकॉर्ड इसी रियासत के नाम है। इसके बाद जर्मनी का एक राज परिवार आता है, जिसके शासनकाल की शुरुआत दसवीं सदी हुई थी।

चंबा का इतिहास वोगल का काम

ब्रिटिशकाल में उत्तरी भारत के पुरातत्व विभाग के प्रमुख बने श्रंखला डच निवासी जान फिलिप वोगल ने चंबा के सांस्कृतिक इतिहास को पहली बार श्रंखलाबद्ध किया। वोगल ने चंबा-भरमौर की यात्रा कर यूरोपियन इतिहासकार ए कलिंघम ने वोगल को बताया कि चंबा में इतिहास का समृद्ध खजाना छिपा है। लाहौर कॉलेज के प्रो. टी डब्ल्यू ऑर्नाल्ड ने भी वोगल का चंबा के इतिहास पर काम करने की सलाह थी।

एंटीक्विटीज ऑफ चंबा स्टेट

पुरातन चंबा के इतिहास पर काम और शोध को वोगल ने 1902 में प्रकाशित अपनी पुस्तक (एंटीक्विटीज ऑफ चंबा स्टेट) में प्रकाशित किया। गहन अध्ययन और शोध के बाद वोगल इस नतीजे पर पहुंचे की चंबा में शासन करने की एक राज परिवार की लंबी अटूट श्रंखला दुनिया में अपनी तरह की अनोखी है। ताम्रपत्रों, शिलालेखों, भीत्ति चित्रों, दुर्लभ पांडुलिपियों, वास्तुशिल्प व जनश्रुतियों के आधार वोगल ने चंबा के बाहर सौ सालों के इतिहास को रच दिया।


टोकन ऑफ फ्रेंडशिप
किताब को तत्कालीन शासक हिज हाइनेस सर भूरी सिंह (केसीएसआई, सीआईई) टोकन ऑफ फेंड्रशिप के रूप में भेंटकर चंबा की जनता को तोहफा दिया था। वोगल के काम से प्रभावित होकर राजा ने राजमहल की पुरातन और बहुमूल्य वस्तुओं के संग्रह को भेंट कर भूरि सिंह संग्रहालय की नींव रखी थी। 1908 में स्थापित हुए संग्रहालय में आज भी चंबा के बाहर सौ सालों का इतिहास जीवित है। यह इस पुरातन नगर की बदनसीबी ही है कि यहां के बारह सौ सालों के पुरातन इतिहास को सहेजा तो जरूर गया, लेकिन इतिहास के इस रहस्मयी खजाने से दुनिया बेखबर है. 


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