चंबा और लाहौल से जुड़ा है अंग्रेजी हुकूमत के समय बने 105 साल पुराने मंडी के एमर्सन हाऊस का कनेक्शन

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चंबा और लाहौल से जुड़ा है अंग्रेजी हुकूमत के समय बने 105 साल पुराने मंडी के एमर्सन हाऊस का कनेक्शन
मंडी से समीर कश्यप की रिपोर्ट
आइये आज आपको छोटी काशी के नाम से मशहूर मंडी नगर की 105 साल पुरानी धरोहर इमारत एमर्सन हाऊस से परिचित करवाते हैं। मंडी का दिल कहे जाने वाले चौहटा बाज़ार में स्थित इस एतिहासिक इमारत का संबंध इस चंबा और लाहौल से जुड़ा है। मंडी के राजा जोगेंद्रसेन के ब्रिटिश सपरीटेंडेट एच डब्ल्यू एमर्सन के नाम पर इस इमारत का नाम एमर्सन हाऊस पड़ा। साल 1916 में निर्मित इस इमारत का कुछ हिस्सा साल 1933 में भी बना है। एमरसन हाऊस भवन ब्रिटिश और स्थानिय स्थापित्य कला के मिश्रण का बेजोड नमूना है। दशकों तक यह इमारत मंडी के राजा के कब्जे में रही। साल 1966 तक इस इमारत में मंडी और चंबा का सत्र न्यायलय संचालित किया जाते रहा। साल 1966 में पंजाब पुनर्गठन के बाद यहां से मंडी, कुल्लू और लाहौल स्पीति के सत्र न्यायलय संचालित किया जाता रहा। वर्तमान में भी इस इमारत के एक भाग में मंडी जिला न्यायलय चल रहा है।
एक दशक पहले हुआ संरक्षण
एक दशक पहले तक राजतंत्र के वक्त की इस खूबसूरत बिल्डिंग की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि अगर इसका तत्काल संरक्षण नहीं किया जाता तो यह इमारत इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह जाती। इमारत के चारों और लगाई गई नक्काशीदार लकड़ी कई जगह से सड़ चुकी थी, नक्काशीदार लकड़ी की रेलिंग सड़ चुकी थी और इस खूबसूरत इमारत की कई खिड़कियां टूट चुकी थीं। साल 2011 में धरोहर संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार की ओर से अनठी पहल हुई। पुरातत्व विभाग की एक टीम ने भवन की इंस्पेक्शन के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसी रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश सरकार ने इस भवन के संरक्षण की पहल की और धरोहर इमारत की छबि के साथ किसी प्रकार का फेरबदल न करते हुए भवन के ऐतिहासिक महत्व को यथावत रखा गया।

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