‘चंगर के शेर’ के नाम से मशहूर थे सरोतरी के सरदार तुलसा सिंह, देश की आजादी लिए लाहौर में काटी कैद, संयुक्त पंजाब के पहले मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों से रही गहरी दोस्ती, 103 की उम्र में स्वर्ग सिधारे

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‘चंगर के शेर’ के नाम से मशहूर थे सरोतरी के सरदार तुलसा सिंह, देश की आजादी लिए लाहौर में काटी कैद, संयुक्त पंजाब के पहले मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों से रही गहरी दोस्ती, 103 की उम्र में स्वर्ग सिधारे
नगरोटा बगवां से संजीव कौशल की रिपोर्ट
उन्हें चंगर के शेर के नाम से जाना जाता था। उस दौर में जब नगरोटा बगवां का चंगर क्षेत्र अति पिछड़ा क्षेत्र था, यहां का एक युवा सरदार तुलसा सिंह देश को आजाद करवाने के लिए क्रांतिकारियों की टोली में शामिल होकर अंगेजों के दांत खट्टे कर रहा था। लाहौर तक उनकें कई क्रंातिकारियों से उनके करीबी संबंध थे। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रियता से भाग लिया। वे अंग्रेजी हुकूमत की आंखों की किरकिरी बन चुके थे। इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लाहौर जेल में कैद कर दिया गया। तुलसा सिंह 16 दिनों तक लाहौर जेल में कैद रहे। अंग्रेजों की यातनाएं भी उनको तोड़ नहीं पाईं और जेल से छूटने के बाद भी वह क्रांतिकारी गतिविधियों में जुटे रहे।
साधारण घर की आधारण प्रतिभा
12 जुलाई 1897 को बड़ोह क्षेत्र के एक साधारण कृषक दलेलु राम के घर पैदा हुए तुलसा सिंह का बचपन आभावों में गुजरा। उस समय यह क्षेत्र अति दुगर्म क्षेत्रों में शुमार था। रोजी- रोटी के लिए कड़ा संधर्ष था। ऐसे में शिक्षा हासिल करना टेढ़ी खीर थी। यह वह दौर था जब ब्रिटिश सरकार को उखाडऩे के लिए देशव्यापी आंदोलन चल रहे थे। युवा व्यवस्था में पहुंचते ही तुलसा सिंह क्रांतिकारियों के संपर्क में आए और भारत को आजाद करवाने के लिए बंसती चोला पहन लिया।
पंचायत के पहले प्रधान बनने का गौरव
देश आजाद हुआ तो तुलसा सिंह को सर्वसम्मति से पंचायत का सरपंच चुना गया। उन्हें सरोतरी पंचायत के पहले प्रधान होने का गौरव प्राप्त है। वे वर्ष 1965 तक सरोतरी पंचायत में बतौर प्रधान सेवाएंं देते रहे। तुलसा सिंह ने हमेशा साधारण जीवन जीया। उनका घर मुंज नामक घास से छाया हुआ था। बतौर प्रधानगरीब लोगों की सहायता के लिए तुलसा सिंह का नाम सबसे आगे होता था, लेकिन उन्होंने खुद के लिए सरकार से कभी कोई लाभ नहीं लिया।
मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों से दोस्ती
संयुक्तपंजाब के मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों से तुलसा सिंह की गहरी दोस्ती थी। कांगड़ा भी उस समय पंजाब का हिस्सा था और जब भी मुख्यमंत्री कांगडा प्रवास पर आते आते थे तो उनका भोजन सरदार तुलसा सिंह के उस झौंपड़ीनुमां घर में होता था। प्रताप सिंह कैरों ने उनके परिवार के लिए कई बार सरकारी मदद देनी चाही, लेकिन तुलसा सिंह ने न तो कभी कोई आर्थिक मदद ली और न ही परिवार के लिए कोई अन्य तरह का लाभ अर्जित किया।
सरदार तुलसा सिंह के नाम पर  पार्क
समाजसेवी सरदार तुलसा सिंह सरोतरी पंचायत के पहले प्रधान रहे हैं और वर्ष 1965 तक पंचायत का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। उनकी मृत्यु जून 2000 में हुई। पंचायत ने सम्मान स्वरूप उनका नाम पंचायत घर के सूचनापट्ट पर ‘पंचायत से निकले मोती’ में शामिल किया है। सरोतरी पंचायत के पूर्व प्रधान उमाकांत डोगरा ने  सरदार तुलसा सिंह के नाम पर पार्क का निर्माण करवाया है।

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