गुरुओं ने काबिल बनाया, उसको भी गुरु बनाया, दिल्ली विश्वविद्यालय की स्टूडेंट रही जवालामुखी की शालिनी गुलेरिया के हुनर की उड़ान

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गुरुओं ने काबिल बनाया, उसको भी गुरु बनाया, दिल्ली विश्वविद्यालय की स्टूडेंट रही जवालामुखी की शालिनी गुलेरिया के हुनर की उड़ान
कांगड़ा से विनोद भावुक की रिपोर्ट
बेशक उसे शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाने की प्रेरणा उसके रोल मॉडल पापा से ही मिली और सारी फैमिली ने स्पोर्ट किया, लेकिन उसे तराशने का काम उसके शिक्षकों ने किया। सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत अध्यापक ही रहे। स्कूल के दिनों से ही अध्यापकों का पूरा सहयोग मिला, लेकिन धर्मशाला से बीएड करने के दौरान प्रोफेसर वीना ठाकुर और प्रोफ़ेसर अंजली ने उसकी प्रतिभा की पहचान कर एक आदर्श शिक्षक के रूप में ढालने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की। जिस बेटी का भविष्य शिक्षकों ने संवारा, आज वह खुद शिक्षक बन नई नस्लों को शिक्षित करने में जुटी हैं। कांगड़ा ज़िले की ज्वालामुखी तहसील के एक छोटे से गांव में एक अप्पर मिडिल क्लास फैमिली की सबसे बड़ी बेटी शालिनी गुलेरिया का कहना है कि उसके शिक्षकों ने उन्हें जीवन की दिशा दी है। शालिनी का कहना है कि दिल्ली में रहते हुए भी अपनी जड़ों के साथ पापा ने हमारा रिश्ता कभी टूटने नही दिया। उन्ही का सपना था कि मैं पढ़ लिख कर अपनी जन्मभूमि के लिए कुछ अच्छा करूं । यही कारण है कि आज वह इस जगह पहुंची है, जहां देश के भविष्य , जो हमारी अगली पीढ़ी है उनका मार्गदर्शन कर रही हैं।
शिक्षक बनने के सफर की कहानी
शालिनी के पिता दिल्ली पुलिस में एएसआई के पद पर कार्यरत हैं और वह तीन भाई – बहनों में सबसे बड़ी है। जब वह महज दो साल की थी तो परिवार दिल्ली चला गया, लेकिन हिमाचल के साथ रिश्ता कभी खत्म नही हुआ। शालिनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय केशवपुरम,दिल्ली से हुई, उसके बाद उसने दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक की। साल 2015 में जीसीटीई धर्मशाला से बीएड की जो साल 2017 में पूरी हुई। उसके बाद उसके इग्नू से अंग्रेजी में परास्नातक की। साल 2019 में परास्नातक पूरी होने के साथ ही उसने अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड हमीरपुर द्वारा आयोजित कमीशन क्लियर किया और नवंबर 2019 से बतौर टीजीटी आर्टस के पद पर शिक्षा विभाग में कार्यरत है। शालिनी वर्तमान में शिमला ज़िला के शिक्षा खंड सुन्नी के राजकीय माध्यमिक विद्यालय करयाली में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी
शालिनी का कहना है कि अभी उसके लिए सिर्फ एक स्तर पूरा हुआ है, इसके आगे में प्रशासनिक सेवा के क्षेत्र की तैयारी कर रही है, जिससे की मैं अपने प्रदेश के लिए और भी कुछ कर सकूं। वे कहती हैं कि उसके लिए शिक्षिका बनना आसान नही था। टैट क्लीयर करने के बाद साल 2018 में पहली बार कमिशन दिया जिसमें सफल नही हो पाई, लेकिन अपना और पापा का सपना पूरा करने की ज़िद के चलते साल 2019 में फिर कोशिश की और इस बार वःसफल हुई।
किताबें पढ़ने का शौक
शालिनी को किताबें पढ़ने का शौक है, क्राफ्टिंग, नई -नई चीजें सीखना और सिखाना पसंद है। ड्राइंग या रंगोली बनाना और यही सब चीजें सीखने के लिए बच्चों को भी प्रोत्साहित करने में जुटी रहती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार व रचनात्मक प्रयोग करने वाली शिक्षिका हैं। शालिनी कहती हैं कि मझे हमेशा इस बात की खुशी है कि हिमाचल से बाहर रहते हुए अपने दिल मे इस देवभूमि को ज़िंदा रखा। अपनी जन्मभूमि के लिए कुछ करने की ललक ही थी जिस कारण मैंने इतना समय बाहर गुज़रने के बाद भी यहां वापस आने का निशचय किया।

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