गद्दी जाति की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में जुटे साहित्यकार प्रताप जरयाल

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गद्दी जाति की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में जुटे साहित्यकार प्रताप जरयाल


धर्मशाला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
कांगड़ा जिला के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की बोह घाटी में कुदरत के असंख्य अद्भुत नजारे चारों ओर बिखरे पड़े हैं। बराहल खड्ड की अठखेलियों का मनोहारी दृश्य नजऱों के साथ-साथ तन-मन को भी शीतलता प्रदान करता है। बोह घाटी दो पंचायतों, रुलहेड और हार बोह को मिलाकर बनती है। समुद्र तल से पांच हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित इस घाटी के मुख्य आकर्षणों में ‘खबरू जल प्रपात’ का नाम विशेष रूप से लिया जा सकता है, जिसे हिमाचल का सबसे ऊंचा जलप्रपात होने का गौरव प्राप्त है। इसी बोह घाटी में बराहल खड्ड के किनारे स्थित मोरछ गांव में पैदा हुए प्रताप जरयाल गद्दी वर्तमान में जाति की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में जुटे संभवत: इकलौते साहित्यकार है। गद्दी संस्कृति के उद्गम, इसके महत्व व वर्तमान स्थिति पर गहन शोध करने वाले प्रताप जरयाल कई मंचों से इस विषय पर अपने शोध-पत्र पढ़ चुके हैं।

मुंबई में मिली लेखन को दिशा

प्रताप जरयाल बताते हैं कि विद्यार्थी जीवन के दौरान ही छोटी-मोटी तुकबंदी करना बहुत अच्छा लगता था। साहित्य लेखन का दूर -दूर तक कोई नामोनिशान नहीं था । वे बिना लाग लपेट कहते हैं, ‘मेरे लिए ऐसा कर पाना परमेश्वर के वरदान के अतिरिक्त और कुछ नहीं हो सकता।’ उन्हें शुरू से ही महान लोगों की जीवनियों को पढऩे का शौक रहा है। वहीं से साहित्य लेखन के प्रति रुझान पैदा हुआ। हायर सेकंडरी के बाद रोजगार की तलाश और मन में साहित्य के उपयुक्त माहौल की चाहत के चलते महानगरी मुंबई का रुख किया। वहां जाकर एक उपयुक्त माहौल पाकर साहित्य लेखन को सही दिशा मिल पाई।

कई पुस्तकों का प्रकाशन

28 अप्रैल 1979 को पिता खरूदी राम व माता धोबी देवी के घर पैदा हुए प्रताप जरयाल ने स्नातक करने के बाद प्रभाकर की पढ़ाई की। पेशे से कृषक एवं एक निजी जल विद्युत परियोजना में कार्यरत प्रताप जरयाल की अब तक प्रकाशित पुस्तकों में वर्ष 2001 में हिमाचल केसरी प्रैस धर्मशाला से प्रकाशित ‘कसक’ हिन्दी काव्य संग्रह, वर्ष 2016 में साहित्य भारती कृष्णानगर दिल्ली से प्रकाशित ‘शिखरों का स्पर्श’ सांझा काव्य संग्रह, वर्ष 2018 में क्लब पब्लिकेशन पटियाला से प्रकाशित ‘कसक बाकी है’ सांझा काव्य संग्रह, वर्ष 2019 में वर्तमान अंकुर नोएडा से प्रकाशित ‘नूर -ए- गज़़ल’ सांझा गज़़ल संग्रह तथा वर्ष 2020 में जिज्ञासा प्रकाशन गाजियाबाद से प्रकाशित ‘मधुमास’ गज़़ल संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।

लेखन के लिए कई मंचों से सम्मान

प्रताप जरयाल के अप्रकाशित साहित्य में दोहा संग्रह हिन्दी, काव्य संग्रह हिन्दी, कविताएं-गीत-गज़़ले पहाड़ी शामिल हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन नियमित हो रहा है। आकाशवाणी धर्मशाला से अनेकों बार उनकी कविताओं का प्रसारण हो चुका है। उन्हें प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के कई मंचों से काव्यपाठ का अवसर प्राप्त हुआ है। प्रताप जरयाल को उनके साहित्यिक कर्म के लिए कई सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। उन्हें कांगड़ा लोक साहित्य परिषद द्वारा साहित्य सम्मान, हिमाचल केसरी की ओर से दो बार श्रेष्ठ लेखन सम्मान, लॉयंस क्लब धर्मशाला द्वारा साहित्य सम्मान , वर्तमान अंकुर नोएडा द्वारा शायर -ए-अमन सम्मान प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा भी अनेक साहित्यिक एवं गैर साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्यान प्राप्त ।


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