गद्दीयाली कविता के जरिए गद्दी संस्कृति के संरक्षण में जुटा यह इंजीनियर, दिनेश पालदा की कविताओं ने भरमौर के लोकजीवन के रंग

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गद्दीयाली कविता के जरिए गद्दी संस्कृति के संरक्षण में जुटा यह इंजीनियर, दिनेश पालदा की कविताओं ने भरमौर के लोकजीवन के रंग
पालमपुर से ललिता कपूर की रिपोर्ट
एमईएस के इंजीनियर दिनेश पालदा गद्दी पहाड़ी कवि के रूप में अपनी चमक बिखेर रहे हैं. वे भरमौर की प्रंघाला पंचायत के पालदा के रहने वाले हैं। गद्दीयाली बोली और संस्कृति के संरक्षण जुटे दिनेश कविताओं के माध्यम से भरमौर के लोक जीवन में रंग भर रहे हैं.
कृषक के बेटे दिनेश
दिनेश के पिता एक कृषि व बागबानी पेशावर थे ।उस वज़ह से पिता जी को 2012 में बेस्ट फार्मर के पुरस्कार सहित दस हजार रुपए के इनाम राशि के साथ सम्मानित किया गया था। दिनेश पालदा जी की धर्मपत्नी का पवना ठाकुर है, जो कि एक कुशल गृहणी है. उनकी एक बेटी और एक बेटा है.
इंजिनीयर बना कवि
दिनेश की प्राथमिक शिक्षा प्राईमरी स्कूल रजौर से हुई, दिनेश ने आठवीं कक्षा मिडल स्कूल सठली से जबकि दसवीं हाई स्कूल भरमौर से प्रथम श्रेणी में की. जमा एक के लिए सिन्हुता स्कूल में प्रवेश लिया मगर इसी दौरान भरमौर में +2 स्कूल बन गया फिर भरमौर से +2 की और बाद में धर्मशाला कालेज से प्रथम बर्ष उत्तीर्ण करने के बाद, हमीरपुर पालीटेक्निक कालेज से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया।
नौकरी के साथ पढ़ाई
दिनेश एक वर्ष तक होली हाइडल प्रयोजन में जेई काम किया, फिर 1997 से एमईएस में जे ई के पद के लिए चयनित हुए , नौकरी के दौरान पढ़ाई जारी रखते हुए Institute of surveyors Delhi से डिग्री ली और अब सहायक अभियंता के पद पर मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज विभाग में ,योल कैंट में कार्यरत हैं।
मुन्शी प्रेम चंद से प्रेरित
दिनेश की रूचि कविताएं लिखने में रही है ,उन्होंने नवीं कक्षा में महान् लेखक मुन्शी प्रेम चंद से प्रभावित होकर नाटक लिखना शुरू किया मगर उसका संग्रह नही कर पाये थे। 1988 मे इनके गांव से एक व्यक्ति प्रधान के पद के लिए खड़े हुए उनके लिए एक कविता लिखी जो उन दिनों बहुत चर्चा में रही उसके पंपलेट बहुत बांटे गए।चार लाइन इन्होंने अपनी शादी सुनिश्चित होने पर लिखी।जो इस तरह हैं :- 1995मे शादी, सपनों की बरबादी। डिग्री डोल मडोल, पढ़ाई का डब्बा गोल।
कविताओं के फैन लोग
दिनेश की तीस से ज्यादा गद्दी रचनाएं हैं, जिन्हें लोगों ने हाथों हाथ लिया है। उनमें से कुछ इस तरह से हैं :- चेता जे इंदा भूणा, न पीणा ता लगदी कमणी, सहेली हुजा, खूनी सड़क। यह कविताएं मनोरंजन तो करती ही हैं, शिक्षा से ओतप्रोत और समाज से सरोकार रखने वाली कविता हैं। इनकी कवितायों की खास बात यह होती है कि, हास्य के साथ साथ , लोगों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने में अहम योगदान रहता है, ओर जो सपनी संस्कृति को बेहतरीन तरीके से सयोज कर रखता है। इनकी बहुत सारी कविताएं गद्दी बोली में यू ट्यूब पर उपलव्ध हैं। हाल ही में गरनोटा-सिहुंता में हुए नुआला आयोजन में दिनेश पालदा ने सबका मन मोह लिया था।

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