क्लर्क से लेकर एसिस्टेंट डायेक्टर तक, पढऩे के शौक ने अलका कैंथला के करियर को दी ऊंची उड़ान

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क्लर्क से लेकर एसिस्टेंट डायेक्टर तक, पढऩे के शौक ने अलका कैंथला के करियर को दी ऊंची उड़ान

शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग में आज से 31 साल पहले क्लर्क के रूप में अपने करियर की शुरूआत करने वाली अलका कैंथला हाल ही पदोन्नत होकर विभाग की एसिस्टेंट निदेशक बनी हैं। साल 1989 में अलका ने एक लिपिक के तौर पर हिमाचल प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग में अपनी सेवाएं देनी शुरू कीं। उन्होंने सरकारी नौकरी करते हुए न केवल एम की पढ़ाई पूरी की, बल्कि जिला भाषा अधिकारी के पद पर पदोन्नत हुईं। हाल ही में उन्होंने जिला भाषा अधिकारी शिमला के पद से पदोन्नत होकर भाषा विभाग में संयुक्तनिदेशक की जिम्मदारी संभाली है। जिला भाषा अधिकारी के तौर पर उनका कार्य शानदार और उपलब्धियों भरा रहा है। बतौर एसिस्टेंट निदेशक प्रदेश के साहित्य एवं संस्कृति कर्मियों को उनसे ढेरों उम्मीदें हैं।

पढऩे के शौक से मिली मंजिल


अलका ने फोकस हिमाचल को बताया कि बचपन से ही उन्हें पढऩे का शौक रहा है। स्कूल के दिनों से विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में छपने वाले लेखों व कहानियों को रूचि के साथ पढ़ती रहीं हैं। बाल पत्रिकाएं नंदन व चंपक के साथ बड़ा लगाव रहा तो उम्र बढऩे के साथ सरिता व गृहशोभा की नियमित पाठक रहीं। पठन पाठन से ज्ञान अर्जित हुआ। लिखने का शौक लगा। क्लर्क की नौकरी के दौरान भी पढऩे का ऐसा चस्का रहा कि कब एमए हो गया, पता ही नहीं चला।

शिक्षक दंपति की बेटी अलका
2 जुलाई 1967 को शिमला के शिक्षक दंपति कृष्ण कुमार व सविता कथूरिया के घर पैदा हुईं अलका की स्कूली शिक्षा शिमला के प्रतिष्ठित स्कूल तारा हॉल से हुई। स्कूल के दिनों से ही अलका स्कूली विषयों के अलावा साहित्य व इतिहास संबंधी पुस्तकों में खोई रहती थी। एसडी कॉलेज अंबाला से स्नातक करने के दौरान साहित्य को प्रति गहरी दोस्ती हो गई। कई पत्रिकाओं की नियमित पाठक हो गई। उन्होंने प्रदेश हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से हिंदी व इतिहास में एमए की है। पढऩे और लिखने का यह सिलसिला निरंतर जारी है।


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