क्या कैनेडी की प्रेमिका को डेडिकेट है शिमला का अन्नाडेल, पढि़ए पहाड़ के इस खूबसूरत मैदान का इंगलैंड से क्या है डबल कनेक्शन

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क्या कैनेडी की प्रेमिका को डेडिकेट है शिमला का अन्नाडेल, पढि़ए पहाड़ के इस खूबसूरत मैदान का इंगलैंड से क्या है डबल कनेक्शन
शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
ब्रिटिश सरकार के राजनीतिक एजेंट चाल्र्स प्रैट कैनेडी को समर कैपिटल का चयन करने के लिए भारत में एक उपयुक्त स्थान खोजने के लिए नियुक्त किया गया था। वह साल1822 में शिमला की पहाडिय़ों में आए थे। वह इस स्थान की सुंदरता से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने इसका नाम इंगलैड में उनकी प्रेमिका ‘अन्ना’ के नाम पर अन्नाडेल रख इस स्थान को अपनी प्रेमिका को डेडीकेट कर दिया। एक अन्य कहानी के अनुसार साल 1834 में ईस्ट इंडियन यूनाइटेड सर्विस जर्नल में पहली बार अन्नडेल का उल्लेख हुआ थ, जब ब्रिटिश अधिकारियों ने पहली बार इस क्षेत्र को देखा तो उन्होंने इसे स्कॉटलैंड के डमफ्रीसशायर अथवा अनाडेल घाटी के समान पाया। चूंकि अधिकांश ब्रिटिश अधिकारी मूल रूप से स्कॉटलैंड की अनाडेल घाटी के थे, यही वजह थी उन अधिकारियों ने इसका नाम स्कॉटिश स्थान के नाम पर अन्नडेल रखने का फैसला किया। शिमला से संबंधित पुराने दस्तावेजों में ‘अन्नडेल’ और ‘अन्नाडेल’ दोनों के रूप में लिखा गया है।
आनंद और मनोरंजन का स्थान ‘कंपनी का बाग’
अन्नाडेल का उपयोग पहले ईस्ट इंडिया कंपनी और फिर ब्रिटिश राज ने किया। यही वजह है कि मूल निवासी इसे ‘कंपनी का बाग’ कहते थे। यह ब्रिटिशों के लिए आनंद और मनोरंजन का स्थान था। यहां अक्सर फैंसी ड्रेस शो, पिकनिक और जन्मदिन समारोह आयोजित होते थे। हर साल पोलो की एक राष्ट्रीय चैम्पियनशिप वहां आयोजित की जाती थी। क्रिकेट सहित सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सवों का आयोजन किया गया था। ब्रिटिश सेना इसका उपयोग प्रशिक्षण और परेड के लिए भी करती रही है। भारतीय लड़कियों के लिए सबाथू में एक स्कूल खोलने के लिए धन जुटाने की खातिर सितंबर 1833 में एक फनफेयर का आयोजन व 1839 में, पहला फैंसी मेला आयोजित किया गया था। डुरंड फुटबॉल टूर्नामेंट की शुरुआत साल1888 में मोर्टिमर डुरंड ने अन्नाडेल में की थी।
कभी अन्नाडेल में होता था दशहरा
आजादी के बाद भी अन्नाडेल में पोलो, फुटबॉल, हॉकी, क्रिकेट, सांस्कृतिक और सामाजिक त्योहारों का आयोजन किया जाता रहा। यहां दशहरा मुख्य आयोजन था जो शहर के लोगों को आकर्षित करता था, लेकिन 1972 में सेना और पुलिस के बीच टकराव की घटना के बाद इस कार्यक्रम को जाखू मंदिर में स्थानांतरित कर दिया गया। साल 1971 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने यहां पूर्ण सत्र का आयोजन किया था। यहां राष्ट्रीय महिला फील्ड हॉकी चैम्पियनशिप भी आयोजित की गई थी। साल 1994 में गायत्री परिवार द्वारा एक यज्ञ का आयोजन किया गया था।
क्रिकेट स्टेडियम बनाने को लेकर हुआ विवाद
साल 2005 से लेकर साल 2012 के दौरान इस मैदान को लेकर खूब विवाद हुआ। हिमाचल प्रदेश सरकार यहां एक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनाना चाहती थी, लेकिन भारतीय सेना ने यह कहकर इसे अस्वीकार कर दिया कि इससे घाटी के प्राकृतिक आकर्षण और प्रकृति को नुकसान होगा। साल 2011 में सरकार ने शिमला के लोगों से इस निर्णय के बारे में पूछने के लिए रिज पर बोर्ड लगा कर हस्ताक्षर अभियान चलाया। अधिकांश लोगों ने बोर्ड पर हस्ताक्षर करके इसका समर्थन किया, लेकिन फिर भी सरकार ने इस योजना को रद्द करके सेना की मांग को स्वीकार किया। वर्तमान में अन्नाडेल एक आर्मी हेरिटेज म्यूजियम वाला एक सेना क्षेत्र है और इसमें एक हेलीपैड है।

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