कोरोनाकाल में चर्चा में आये हाईकोर्ट शिमला में प्रेक्टिस करने वाले जोगिंद्रनगर के वकील से मिलिए, कभी दिहाड़ी लगाकर पॉकेटमनी का जुगाड़ करते थे अनिल कुमार, अदालत और सड़क पर न्याय के लिए लड़ते होनहार युवा की प्रेरककथा

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कोरोनाकाल में चर्चा में आये हाईकोर्ट शिमला में प्रेक्टिस करने वाले जोगिंद्रनगर के वकील से मिलिए, कभी दिहाड़ी लगाकर पॉकेटमनी का जुगाड़ करते थे अनिल कुमार, अदालत और सड़क पर न्याय के लिए लड़ते होनहार युवा की प्रेरककथा
शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में कोरोना से जब पहली मृत्यु हुई तो प्रशासन ने केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशा- निर्देशों सरेआम ठेंगा दिखाते हुए, धार्मिक मान्यताओं को नजरअंदाज करते हुए आनन-फानन में आधी रात को सरकाघाट के युवा मृतक का अंतिम संस्कार मध्यरात्रि को कर दिया। इस मुद्दे को जिला मंडी के जोगिंद्रनगर उपमंडल से सम्बन्ध रखने वाले अधिवक्ता अनिल कुमार ने प्रदेश उच्च न्यायालय शिमला के समक्ष याचिका दायर कर प्रमुखता से उठाया तो न्यायालय ने सरकार से जवाबतलब किया और बाद में सरकार ने इस पूरे मामले की तहकीकात के लिए एक स्पेशल कमेटी गठित की, जिसने इस मामले से जुड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को न्यायालय के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट द्वारा आमंत्रित किया गया। अधिवक्ता अनिल कुमार नशा माफिया के खिलाफ ‘ पिंक कैंपेन’, जोगेंद्रनगर सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने के लिएा आठ किलोमीटर तक की जन चेतना तिरंगा यात्रा, केंद्रीय विश्वविद्यालय के खिलाफ एनजीटी में जैविक संपदा को बचाने के लिए जनहित याचिका दायर करने के साथ जोगिंद्रनगर अस्पताल में रिक्त पदों को भरने के लिए जनहित याचिका दायर कर डॉक्टरों की बहाली करवा चुके हैं।
चपरासी के बेटे के हुनर का कमाल
हम आपके साथ सांझा कर रहे हैं युवा अधिवक्ता की कहानी जो कुछ ही समय में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हुए हैं। बात समाजसेवा की हो या राजनीति की, इस युवा ने समन्वय बनाकर लगातार आयाम स्थापित किये हैं। अधिवक्ता अनिल कुमार का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। पिता हिमाचल सरकार में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं तथा माता एक गृहणी हैं, लेकिन अनिल ने अपनी मेहनत के बूते पर कम ही समय पर वकालत में एक अलग पहचान बनाई है। शायद ही आप यकीन करें कि अनिल बचपन से ही आत्मनिर्भर बनने के सपने देखते थे। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण मजबूर थे तो पढ़ाई के दौरन जब भी समय मिलता, मिस्त्री के साथ दिहाड़ी लगाकर यह अपना पॉकेट मनी निकालते थे।
स्टूडेंट्स पॉलिटिक्स में ठसक
कॉलेज में छात्र राजनीति में सक्रिय रहे अनिल कक्षा प्रतिनिधि के बाद एससीए में महासचिव के पद के लिए रिकॉर्ड मतों से जीत कर कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। इसके बाद जिला महासचिव नॉमिनेटेड हुए। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में विधि की पढ़ाई के दौरान एनएसयूआई से विश्वविद्यालय एससीए का चुनाव लड़ा और प्रथम वर्ष की पढ़ाई के दौरान विश्वविद्यालय परिसर महासचिव रहे। दो वर्षों तक विश्वविद्यालय में अध्यक्ष पद की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष की कमान संभालते हुए एनएसयूआई को मजबूती प्रदान की।
स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल बार एसोशिएशन के निर्विरोध महासचिव
वीरभद्र के नेतृत्व वाली पिछ्ली सरकार में अनिल कुमार युवा सेवायें एवं खेल कल्याल बोर्ड का निदेशक नामित किया गया था और प्रदेश सरकार के इक्को टूरिज्म डवलपमेंट सेल के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में मेंबर बनाया गया था. अनिल प्रदेश कांग्रेस लीगल सेल में राज्य कार्यकारी सदस्य के साथ अनिल कुमार ब्लॉक कांग्रेस कमेटी जोगिंद्रनगर के विशेष आमंत्रित सदस्य हैं. वे स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल बार एसोशिएशन के निर्विरोध महासचिव चुने गए हैं.
छोटी उम्र में बड़ी पहचान
साल 2013 में वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 2014 में वकालत में कदम रखा। अनिल कम समय में एक अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब हुए हैं। वे आपराधिक, कंपनी, सर्विस से संबंधित मामलों के साथ सिविल के मामलों में भी अच्छी पकड़ रखते हैं तथा जनहित से जुड़े मामलों को सबसे पहले उठाते हैं। शिमला उच्च न्यायलय में प्रेक्टिस करने के बावजूद अनिल अपने गृह क्षेत्र से गहरे जुड़े हैं और जब भी समय मिलता है, जोगिंद्रनगर के हकों की पैरवी के लिए मुखर होते हैं।

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