कांग्रेस का मजबूत किला डलहौजी सीट : 2017 में कड़ी टक्कर से जीत हासिल करने वाली कांग्रेस की आशा कुमारी को इस बार भाजपा, आप, बागी और आजाद नेताओं की निराशा करने की रणनीति

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कांग्रेस का मजबूत किला डलहौजी सीट : 2017 में कड़ी टक्कर से जीत हासिल करने वाली कांग्रेस की आशा कुमारी को इस बार भाजपा, आप, बागी और आजाद नेताओं की निराशा करने की रणनीति
फोकस हिमाचल ब्यूरो की डलहौजी से रिपोर्ट
चंबा जिले का डलहौजी विधानसभा सीट साल 2008 में डीलिमिटेशन के बाद अस्तित्व में आई। 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद अब तक यहां कांग्रेस की टिकट पर आशा कुमारी जीतती रही हैं। वर्ष 2012 से डलहौजी की सीट पर लगातार कांग्रेस का कब्जा कायम है। 2012 में भी कांग्रेस उम्मीदवार आशा कुमारी ने भाजपा की रेणु चड्ढा को करीब 7000 मतों के अंतर से हराया था। वे 10 साल से इस सीट पर कांग्रेस विधायक हैं। इस बार भी कांग्रेस की आशा से ही जीत की आशा है, लेकिन इस बार इस सीट पर कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। क्योंकि 2017 में भाजपा उम्मीदवार डीएस ठाकुर से वह कम वोटों में जीत दर्ज कर पाई थीं। इस बार भी भाजपा ने इस सीट पर डीएस ठाकुर को ही टिकट दी है। इस बार भाजपा-कांग्रेस का यहां कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। वहीं आप की एंट्री ने मुकाबले को रोचक बनाया है। आम आदमी पार्टी ने मनीष सरीन पर दांव खेला है। वहीं बागी नेताओं ने भी इस सीट पर टक्कर देने की तैयारी कर ली है। भाजपा को छोड़कर राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी में शामिल होने वाले अशोक बकारिया और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में रिंकू चुनावी मैदान में हैं।चंबा सदर विधानसभा सीट : कांग्रेस टिकट से हारने वाले और बीजेपी टिकट पर एक बार विधायक बने पवन नैय्यर की पत्नी नीलम भाजपा टिकट पर हैं मैदान में, चाचा-भतीजे की चुनावी जंग अब चाची-भतीजे के बीच, क्या कांग्रेस की टिकट पर हैट्रिक लगाने वाले हर्ष महाजन की भाजपा में इंट्री से खुलेगा भाजपा के जीत का अगला दरवाजा
2008 से पहले बनीखेत सीट पर हैट्रिक लगाने वाली आशा डलहौजी सीट पर रहीं कायम
2008 से पहले डलहौजी बनीखेत विधानसभा सीट के नाम से जाना जाता था। तबके विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो कांग्रेस ने ही यहां अधिक बार बहुमत हासिल किया है। 1967 व 1972 में कांग्रेस की सीट पर देश राज ने चुनाव जीता था। 1977 में जनता पार्टी टिकट पर चुनाव जीतकर ज्ञान चंद ने कांग्रेस की जीत का क्रम तोड़ा लेकिन 1982 में देश राज फिर कांग्रेस से जीते। उसके बाद जनता पार्टी से 1990 में गंधर्व सिंह जीते। उसके बाद बनीखेत सीट पर 1993 में पहली बार आशा कुमारी कांग्रेस टिकट पर चुनाव जीतकर काबिज हुईं। उसके बाद उन्होंने 1998 व 2003 का चुनाव कांग्रेस सीट से जीतकर जीत की हैट्रिक लगाई। इस बीच 2007 में भाजपा से रेणू चड्डा बनीखेत में जीतीं। इस चुनाव के बाद बनीखेत सीट डीलिमिटेशन के बाद डलहौजी विधानसभा सीट में बदल गई। तबसे लगातार कांग्रेस की टिकट पर आशा कुमारी जीतती आ रही हैं।
दो बार शिक्षा मंत्री रहीं आशा, सीएम के लिए भी रहीं दावेदार
डलहौजी की विधायक डलहौजी की विधायक आशा कुमारी का स्थानीय राजनिति में खासा दबदबा रहा है जो आज भी बरकरार है। मध्य प्रदेश के पूर्व चीफ सेक्रेटरी मादनेशवर सिंह की बेटी 67 वर्षीय आशा कुमारी 19 अप्रैल 1979 को चंबा के राजा बिजेन्द्र सिंह के साथ परिणय सूत्र में बंधी। उनकी एक बेटी है। कांग्रेस पार्टी के विभिन्न पदों पर रहने के बाद आजकल आशा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्य व पंजाब की प्रभारी हैं। आशा पहली बार हिमाचल विधानसभा के लिये 1985 में विधायक चुनी गईं। उसके बाद 1993,1998 और 2003 में भी बनीखेत से विधायक बनीं। हालांकि 2007 में वह चुनाव हारीं थीं। उसके बाद बनीखेत का नाम डल्हौजी हो गया तो डलहौजी से पांचवीं बार विधायक चुनी गईं। इस बीच आशा कुमारी 1995 से 1998 और 2003 व 2005 के बीच के बीच हिमाचल सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहीं। आज आशा कुमारी का रूतबा प्रदेश की राजनिति में बढ़ा है। उन्हें कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में समझा जाता है, लेकिन अब आशा कुमारी पर स्थानीय राजनिति में पूरा समय न देने का आरोप भी लगा है।
2017 में भाजपा के डीएस ठाकुर से मुश्किल से जीत पाई थी
वर्ष 2012 से डलहौजी की सीट पर लगातार कांग्रेस का कब्जा कायम है। वर्ष 2012 में भी कांग्रेस उम्मीदवार आशा कुमारी ने यहां से जीत दर्ज की थी। उन्होंने भाजपा की रेणु चड्ढा को करीब सात हजार मतों के अंतर से शिकस्त दी थी। वहीं 2017 कांग्रेस टिकट पर आशा कुमारी को भाजपा उम्मीदवार डीएस ठाकुर से कड़ी टक्कर मिली थी और वह इस मुकाबले में मात्र 556 मतों से जीत पाई थीं।
इस सीट पर भाजपा के लिए भी कड़ी चुनौती
वहीं, भाजपा के लिए कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने के लिए अच्छी खासी जद्दोजहद करनी पड़ेगी। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कुल 48.77 फीसदी मतदाताओं ने वोटिंग की थी। कांग्रेस की उम्मीदवार को कुल 48.77 जबकि भाजपा उम्मीदवार को 47.65 फीसदी मत मिले थे। कांग्रेस उम्मीदवार ने 2017 के चुनाव में 24,224 जबकि भाजपा के उम्मीदवार ने 23,668 मत हासिल किए थे। इस प्रकार बेहद नजदीकी मुकाबले में भाजपा उम्मीदवार को कांग्रेस उम्मीदवार ने 556 मतों से मात देते हुए जीत दर्ज की।
गद्दी और गुज्जर मतदाता के हाथों सफलता की कुंजी
डलहौजी प्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में उभर कर सामने आया है। यहां के एक तबके की आजीविका का प्रमुख साधन पर्यटन ही है। बाकी लोग आज भी अपने पुश्तैनी काम धंधों से जुड़े हैं। विधानसभा डीलिमिटेशन के बाद बनीखेत के सलूणी तहसील, भलेई सब तहसील , शेरपुर, मनोला भटोली , रूल्याणी, बाथरी, डल्हौजी नगर व बनीखेत और डलहौजी कैंट व तहसील डलहौजी को मिलाकर डलहौजी विधानसभा चुनाव क्षेत्र बना। हालांकि यह सीट अनारक्षित है, लेकिन यहां के गद्दी व गुज्जर मतदाता जब-जब एक हुये हैं तब तब उम्मीदवारों का भविष्य बदला है। अनूसूचित जाति के मतदाताओं की भी यहां अछी खासी तादाद है। खासकर इलाके का सलूणी,किहार व भांदल इलाके के गुज्जर मतदाता ने यहां के नेताओं की हमेशा ही तकदीर लिखी है। यह हिस्सा जममू काशमीर की सीमा से सटा है।चुराह विधानसभा सीट: सोशल मीडिया पर बार- बार ट्रोल होते रहे भाजपा के डॉ. हंस राज की जीत हैट्रिक को रोकने के लिए कांग्रेस ने शिक्षक यशवंत सिंह खन्ना को मैदान में उतारा

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