कहीं हो न जाये ‘जीरो’, बर्फीले रेगिस्तान का ‘हीरो’ नेशनल ब्यूरो ऑफ़ एनीमल जेनेटिक रिसोर्स की रिपोर्ट में वार्निंग, मशहूर स्पीति हॉर्स का वजूद खतरे में

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कहीं हो न जाये ‘जीरो’, बर्फीले रेगिस्तान का ‘हीरो’ नेशनल ब्यूरो ऑफ़ एनीमल जेनेटिक रिसोर्स की रिपोर्ट में वार्निंग, मशहूर स्पीति हॉर्स का वजूद खतरे में
स्पीति से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट
स्पीति पोनी के नाम से मशहूर छोटे कद और बड़ी खूबियों वाले और बर्फीले रेगिस्तान का ‘हीरो’ कहे जाने वाले स्पीति हॉर्स के वजूद पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. नेशनल ब्यूरो ऑफ़ एनीमल जेनेटिक रिसोर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन दशक में इस नस्ल के घोड़े की संख्या में तेज़ी से कमी आई है. रिपोर्ट के मुताबिक साल 1982 में देश भर में स्पीति पोनी के बीस हजार से ज्यादा घोड़े थे, जो अब एक तिहाई तक सिमट चुके हैं. स्पीति हॉर्स को बचाने के लिए मंडी के कामांद में ब्रीडिंग फ़ार्म खोला गया था, जिसे आईआईटी के निर्माण के चलते स्पीति के लरी में बदल दिया गया. नेशनल ब्यूरो ऑफ़ एनीमल जेनेटिक रिसोर्स के विशेषज्ञ इस नस्ल के संरक्षण के लिए बड़े प्रोजेक्ट की वकालत करते हैं.
उदण्ड नहीं होते स्पीति पॉनी, सूंघ पर ग्लेशियर का लगा लेते हैं पता
नेशनल ब्यूरो ऑफ़ एनीमल जेनेटिक रिसोर्स के डॉ. आरके पुंडीर की रिपोर्ट कहती है कि कभी इस नस्ल का घोड़ा लाहुल- स्पीति के हर घर की जरूरत होता था. राइडिंग, स्पोर्ट्स और दुर्गम क्षेत्रों में माल धुलाई के काम आने वाले इस नस्ल के घोड़े उदण्ड नहीं होते और विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई वाले बर्फीले इलाकों का यह घोड़ा बादशाह कहा जाता है. यह घोडा गहरी बर्फीली खाइयों को लांगने में माहिर होता है तो फर्फीले पहाड़ फांद सकता है. इस नस्ल के घोड़ों में सूंघ कर ग्लेशियर का पता लगाने की क्षमता होती है और शून्य से 45 डिग्री नीचे के तापमान में जिन्दा रह सकता है.
घोड़ों का संसार
भारत में कुल छह नस्लों के घोड़े पाए जाते हैं. कथयावाड़ी और मारवाड़ी घोड़े नार्थ ईस्ट में पाए जाते हैं. भूटया और मणिपुरी ईस्ट में पाए जाते हैं. स्पीति पोनी और जंस्कारी घोड़े नॉर्थ रीजन के दुर्गम क्षेत्रों में पाए जाते हैं.
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फोटो साभार – नेशनल ब्यूरो ऑफ़ एनीमल जेनेटिक रिसोर्स।

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