करियाला, बांठड़ा, धाजा और भगत लोकनाट्यों पर एचपीयू के अंग्रेजी डिपार्टमेंट से रिसर्च करने वाली पहली हिमाचली, इंगलिश की असिस्टेंट प्रोफेसर दिव्य शर्मा ने सिमटती हिमाचली लोकनाट्य परम्पराओं पर किया गहरा अध्ययन

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करियाला, बांठड़ा, धाजा और भगत लोकनाट्यों पर एचपीयू के अंग्रेजी डिपार्टमेंट से रिसर्च करने वाली पहली हिमाचली, इंगलिश की असिस्टेंट प्रोफेसर दिव्य शर्मा ने सिमटती हिमाचली लोकनाट्य परम्पराओं पर किया गहरा अध्ययन
शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
मंडी जिला के धर्मपुर कॉलेज में इंगलिश की असिस्टेंट प्रोफेसर दिव्य शर्मा ने सिमटती हिमाचली लोक नाट्य परमपराओं पर गहरा अध्ययन किया है। धर्मपुर की रहने वाली दिव्य शर्मा हिमाचल विश्वविद्यालय के इंगलिश डिपार्टमेंट से हिमाचली लोक नाट्यों पर पीएचडी करने वाली पहली हिमाचली हैं। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कभी आम जनमानस का मनोरंजन करने के साथ शिक्षित करने वाली करियाला, बांठड़ा, धाजा और भगत लोकनाट्य शौलियों का विस्तृत अध्ययन किेया है। उन्होंने इन नाट्य शैलियों की शुरूआत, इसके फलने– फूलने से लेकर वर्तमान में इनके तेजी से सिमटने के कारणों को खंगालने की ईमानदार कोशिश की है। दिव्य शर्मा को मलाल है कि कभी पहाड़ के जनमानस को जोड़ कर रखने वाली यहां की समृद्व नाट्य परम्पराएं तेजी से खत्म हो रहीं हैं।
कांगड़ा की बेटी, मंडी की बहू
दिव्य शर्मा का जन्म कांगड़ा जिला के कोटला में 3 फरवरी 1979 को पिता राम प्रकाश शर्मा व मां नीलम शर्मा के घर हुआ। पिता लोक निर्माण विभाग में अधिकारी थे और मां नीलम शर्मा समाजसेवा के क्षेत्र में सकिय। कुछ साल पहले पिता का साया उसके सिर से उठ गया, लेकिन मां अब भी समाजसेवा और राजनीति में खासी सक्रिय हैें। नीलम के बड़े विशाल शर्मा अधिशाषी अभियंता है। 4 अगस्त 2006 को दांपत्य की डोर में बंधने वाली दिव्य शर्मा के पति विश्वभूषण शर्मा हाईकोर्ट शिमला में वकालत करते हैं। उनका एक सात साल का बेटा विशाल है।
अपने स्कूल की टॉपर
दिव्य ने दसवीं तक की पढ़ाई डीएवी बाघणी से करने के बाद जमा दो की पढ़ाई सरकारी स्कूल कोटला से की और जमा दो में अपने स्कूल में टॉप किया। उन्होंने पंजाब युनिवर्सिटी के चंडीगढ़ के सेक्टर 42 में स्थित गल्र्ज कॉलेज से स्नातक की। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर करने के बाद जम्मू से बीएड किया। शादी के बाद चौधरी देवी लाल युनिवर्सिटी से एमफिल की। कॉलेज कैडर में अस्स्अिेट प्रोफेसर की जॉब मिलने के बाद उन्होंने वर्ष 2017 में अपनी पीएचडी पूरी की।

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