करिअर किया दरकिनार, समाजसेवा बनी आधार : युवतियों और महिलाओं के सशक्तिकरण में जुटी धर्मशाला की सारिका , सुविधा और हक से वंचित लोगों की आवाज बनना है मकसद

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धर्मशाला से  संजीव कौशल की रिपोर्ट

संवेदना का रिश्ता मानव के साथ गहरा है, लेकिन जीवन में ऐसे कम लोग ही हैं, जो दूसरों के संग संवेदना के साथ जुड़े होते हैं। इन्हीं में से एक नाम है सारिका कटोच पंवर। दूसरों के दु:ख को बांटने को सारिका ने अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया है। करिअर के तमाम बेहतरीन अवसरों को दरकिनार कर समाज की सेवा को प्राथमिकता देने वाली सारिका दूसरों के जीवन में खुशी और रोशनी लाने का काम कर रही है। वह युवतियों व महिलाओं को कुछ कर दिखाने की भावना का संचार करती हैं। सारिका को उनके काम के लिए देश और विदेश में कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है, लेकिन वह सबसे बड़ा सम्मान तब मानती हैं जब सुविधा व हक से वंचित वगज़् के जीवन में कोई खुशी आती है। इन दिनों वह हिमाचल चिल्ड्रन एंड डेवल्पमेंट ऑगेनज़इजेशन से जुड़ी हुई हैं और अपने पति अरविंद कंवर के साथ मकसद को पूरा करने में जुटी हुई हैं।देवानंद की ‘ट्रैक्सी डाइवर’ से चमकी मिस शिमला शीला रमानी, साठ दशक में भारत और पाकिस्तान की फिल्मों में दिखाया अभिनय का जौहर, अस्सी साल की उम्र में मध्यप्रदेश के महू में हुई थी गुमनाम मौत 


कई संस्थाओं संग किया काम
शुरू में सारिका ने त्रिगतज़् कला मंच, नेहरू युवा केंद्र संगठन आदि संस्थाओं के साथ जुड़कर काम किया। युवा विकास, एचआइवी एड्स जागरूकता व लोक संस्कृति में उन्होंने अहम योगदान दिया।  वह अपनी स्वतंत्र पहचान के रूप में वह जानी जाती हैं। गांव की युवतियों व महिलाओं को वह आगे बढऩे के लिए प्रेरित करती हैं। उनके जीवन साथी अरविंद कंवर समाजसेवी हैं, दोनों मिलकर स्वयंसेवी संस्था चलाते हैं।दुनिया की सबसे ऊंची सड़क पर भुवनेश्वर साइकलिंग और एडवेंचर क्लब के 20 सदस्यों ने 10 दिन में की 550 किलोमीटर साइकलिंग, 6 दर्रों को किया पार, दिया शांति और मित्रता का संदेश

समाजसेवा जीवन का लक्ष्य
धमज़्शाला के घरोह के समीप झिक्कड़ गांव में 18 माचज़् 1982 को स्वगीज़्य सूबेदार मेजर राजिंद्र सिंह कटोच के घर पैदा हुई सारिका कटोच ने अपनी शिक्षा स्थानीय स्कूलों में ग्रहण की। वाणिज्य स्नातक सारिका शिक्षा में अव्वल होने के साथ ही एनसीसी सी सॢटफिकेट पास हैं, लेकिन उन्हें समाजसेवा का शौक था। इसे उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बनाते हुए इसी क्षेत्र में कायज़् किया।

समाजसेवा जीवन का लक्ष्य
सारिका कटोच पंवर जिंदगी को बेहद सकरात्मक नजरिए से देखती हैं। उनका मानना है कि यदि हर व्यक्तिअपनी जिम्मेवारी को समझे तो उसे अधिकार स्वयं मिल जाएंगे। समाज के प्रति हर व्यक्तिका दायित्व हैं। इसलिए उन्हें अपनी भूमिका निभानी होगी। इससे समाज स्वत: ही बदल जाएगा। पिछड़े व हक से वंचित लोगों को उनके अधिकार दिलाने के लिए सजग व्यक्तियों को कायज़्  करना होगा।प्रेरक – बचपन में ही सिर से उठ गया था मां-बाप का साया, मासी ने पढाया, सेना में बने अफसर, फिर हिमाचल पुलिस में बने अफसर, अब बने पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन 

यहां निभाई भूमिका
एचआइवी एड्स जागरूकता पर हाथ से हाथ मिला।
ग्रामीण क्षेत्र में युवा विकास पर कायज़्।
लोक संस्कृति संरक्षण व विकास ।
सरकार व विभाग के साथ स्वास्थ्य व शिक्षा।
एनजीओ के साथ मिलकर योजनाओं पर कार्य।

काम को सम्मान
सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय सेवा स्वयंसेवी 2002 ।
जिला युवा अवार्ड 2003 ।
बीबीसी यूथ स्टार अवार्ड ।
रेडक्रॉस सोसायटी अवार्ड ।
हिमाचल केसरी अवाडज़्।
पंजाब साहित्य कला अकादमी के लिए नामांकित।


विशेष उपलब्धियां
 2006 में युवा मामले मंत्रालय की ओर से यूथ डेलीगेट रूप में चीन यात्रा।
 2007 में पाकिस्तान में रीजनल यूथ कॉक्स एंड रीजनल एडवाइजरी बोडज़् मीटिंग में शिरकत।
 2008 में सिंगापुर में यूथ एंड क्लाइमेंट चेंज वकज़्शॉप ।
 2008 में कोलंबो श्रीलंका में सातवीं कॉमनवेल्थ यूथ मिनिस्ट्रीज मीटिंग।
 2008 में नई दिल्ली में सीवाइपी एशिया एंड मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयसज़् के एचआइपी एड्स पर वकज़्शॉप।
2009 में कॉमनवेल्थ देशों में क्लाइमेंट चेंज एंड इन्वायरनमेंट सम्मेलन में यूथ कॉडिज़्नेटर।
 2009 में इंटरनेशनल प्लानिंग टीम कॉमनवेल्थ यूथ फोरम में मेंबर एंड फेसिलिटेटर।
 2010 में त्रिनिदाद एडं टौबेगो में यूथ कम्युन्यूक मीटिंग।
 2011 में दक्षिण अफ्रीका में कॉमनवेल्थ यूथ क्लाइमेंट नेटवर्क। ललिता के हुनर का कमाल, दुनिया में चमका चंबा रूमाल:  शिल्प गुरु अवॉर्ड हासिल करने वाली हिमाचल की इकलौती हस्तशिल्पी हैं चंबा की ललिता वकील


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