कभी स्कूल की ग्रुप फोटो के लिए नहीं थे साढ़े तीन रुपए, अब लाखों दुर्लभ तस्वीरों के खजाने के मालिक, फोटोग्राफी को जीवन का मकसद बनाने वाले हिमाचल गौरव के लिए चुने गए बीरबल शर्मा की प्रेरकगाथा

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कभी स्कूल की ग्रुप फोटो के लिए नहीं थे साढ़े तीन रुपए, अब लाखों दुर्लभ तस्वीरों के खजाने के मालिक, फोटोग्राफी को जीवन का मकसद बनाने वाले हिमाचल गौरव के लिए चुने गए बीरबल शर्मा की प्रेरकगाथा
मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट
साल 1970 की बात है, हमीरपुर की बड़सर तहसील के राजकीय ग्यारह ग्रां स्कूल, हरसौर में आठवीं में पढऩे वाले गरीब घर के एक स्टूडेंट के पास साल के अंत में यादगार के रूप खिंचवाए जाने वाले ग्रुप फोटो की कीमत देने के साढ़े तीन रुपए नहीं थे। शायद बचपन की यही चोट ही कहीं गहरे असर कर गई। उस स्टूडेंट ने फोटो खींचने को ही अपनी जिंदगी का मकसद बना डाला। इंटर करने के बाद मुंबई से रंगीन फोटोग्राफी का प्रशिक्षण लेकर 15 अगस्त 1972 को फोटोग्राफी की दुनिया में उस समय कदम रखा, जब वह महज 16 साल का था। उसकी जिद का यह सिलसिला पिछले 48 साल से निरंतर जारी है। उस दौर में ऐसे लोग जो कभी अपना फोटो खिंचवाने की सोच भी नहीं सकते थे, उन्हें कैमरे में कैद करने की की हसरत के चलते आज वही स्टूडेंट हिमाचल प्रदेश के फोटो के सबसे बड़े खजाने का मालिक है। उसने शौक के लिए लाखों फोटो खींचे हैं। इस प्रेरक कहानी के नायक हैं मंडी के वरिष्ठ पत्रकार- छायाकार बीरबल शर्मा, जिन्हें इस साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से हिमाचल गौरव से सम्मानित किया जा रहा है।
मौत को मात देकर तस्वीरें उतारने का जुनून
55673 वर्ग किलोमीटर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले हिमाचल प्रदेश में कई खास महत्व वाले स्थानों तक जाने के लिए कई कई दिन लग जाते हैं। कई नदियों के उद्गम स्थलों तक पहुंचने के लिए जान हथेली पर रखनी पड़ती है। खतरनाक दर्रों को पैरों से नापने के लिए कई बार सांसें थम जाती हैं। बर्फानी ठंडी हवाएं खून जमा देती हैं। होंठ सूख जाते हैं और पांव छलनी हो जाते हैं। बड़ा भंगाल, डोडरा क्वार, पांगी, गरवीं दरैहट, श्री खंड महादेव, किन्नर कैलाश, नीलकंठ महादेव, मणीमहेश, दशौहर, भृगु, चंद्रताल, खीर गंगा, मानतलाई, सरयोलसर, पार्वती घाटी, चंद्रनाहन, पब्बर घाटी, भूवू जोत, चांसल दर्रा, थमसर जोत, साच पास, चंद्रखणी जोत व मलाणा जैसे कई ऐसे स्थल हैं जो अब भले ही सडक़ से जुड़ गए हों अथवा सडक़ें इनके करीब पहुंच गई हों, मगर पहले तो यहां पहुंचने के लिए कई कई दिन कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती थी, मीलों सफर करना पड़ता था। कई बार यहां मौत से सामना होता था। ऐसी ही हजारों यात्राओं के गवाह हैं बीरबल शर्मा।
ऐसे मिला जीवन को मकसद
बीरबल शर्मा ने जनवरी 1982 को मंडी शहर के कालेज रोड़ पर बीरबल स्टूडियो स्थापित किया। साल 1986 में मंडी जिला भाषा अधिकारी के रूप में आए डॉ. विद्या चंद ठाकुर ने उनके शौक को नया मोड़ दिया। बीरबल शर्मा बताते हैं, उन्होंने मुझे प्रदेश की संस्कृति, मेलों, त्योहारों, मंदिरों, किलों, मठों, गुरूद्वारों, मजिस्दों, स्मारकों, इतिहास, सुंदरता, लोकजीवन व इन विधाओं से जुड़े छायांकन करने की प्रेरणा दी। वह कहते हैं, उस समय तक मैं पाराशर, कमरूनाग समेत कई जगहों की पैदल यात्राएं कर चुका था। इसके बाद न तो मैंने अपना परिवार देखा न घर और न स्टूडियो। जब भी समय मिलता मैं अपने चंद दोस्तों के साथ कई कई दिन के भ्रमण पर निकल जाता और यह सिलसिला अब भी चल रहा है। भ्रमण के दौरान कई बार मेरा मौत से सामना हुआ, मगर ईश्वर व देवी देवताओं की कृपा बनी रही।
बीरबल के काम की गवाह हिमाचल दर्शन गैलरी
बीरबल शर्मा ने 24 अप्रैल 1997 को हिमाचल दर्शन फोटो गैलरी की स्थापना की। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इसका उदघाटन किया। पूरे उतरी भारत में यह अपनी तरह की पहली फोटो गैलरी थी, जिसमें एक ही छत्त के नीचे पूरे हिमाचल प्रदेश को छायाचित्रों के माध्यम से दर्शाया गया। अब तक इसमें देश- विदेश से चार लाख दर्शक आ चुके हैं, जिनमें हजारों नामी हस्तियां शामिल हैं। गैलरी परिसर में ही एक म्युजिम भी स्थापित किया जा रहा है, जिसमें प्राचीन वस्तुओं को संकलन किया गया है। दुर्लभ उपयोगी पुस्तकों पर आधारित पुस्तकालय भी इसमें जोड़ा गया है जो शोधकर्ताओं के लिए बेहद उपयोगी है। फोटो गैलरी का नाम देश के 569 संग्रहालयों की विवरणिका में दर्ज हो चुका है।
गैलरी मेेंं प्रवेश निशुल्क है। इस फोटो गैलरी के फोरलेन की जद में आ जाने से 19 जुलाई 2019 को प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इसकी पुनस्र्थाना की पहल की है।
जोखिम भरी पत्रकारिता का चेहरा
बीरबल शर्मा का पत्रकारिता में लंबा अनुभव है। साल 1985 में दैनिक हिमाचल सेवा, शिमला से शुरू हुआ सिलसिला अब भी जारी है। साल 1987 से फरवरी 2000 तक जनसता में मंडी जिला संवाददाता के रूप में कार्य किया और दौरान प्रदेश के हर भाग में जाकर सचित्र कवरेज की। प्रदेश के दूरस्थ इलाकों डोडरा क्वार, बड़ा भंगाल, पांगी भरमौर, चौहार घाटी की यात्राएं कर वहां के लोगों की समस्याओं पर विषेश कवरेज की है। साल 1995 में पंजाब हिमाचल के राज्यपाल सुरेंद्र नाथ के हवाई जहाज हादसे की मीलों पैदल चलकर सबसे पहले कवरेज करने के अलावा कांडा व काठाबाईं हवाई हादसों की भी मीलों पैदल चलकर विशम परिस्थितियों में छाया पत्रकारिता की। जोखिमपूर्ण पत्रकारिता के लिए उन्हें जनसता के संपादक प्रभाश जोशी ने सम्मानित किया है। उन्होंने फरवरी 2000 से 2004 तक अमर उजाला का मंडी ब्यूरो प्रभारी, 2004 से 2007 तक मंडी से दिव्य हिमाचल ब्यूरो, 2007- 2008 में दैनिक भास्कर ब्यूरो के तौर पर कार्य किया है। साल 2008 से अब तक लगातार जनसता के जिला संवाददाता के रूप में कार्य कर रहे हैं। साल 2001 से हिंदुस्तान टाइम्स के जिला मंडी से प्रेस छायाकार के रूप में कार्यरत हैं। बीरबल शर्मा पूरे प्रदेश के हर भाग का भ्रमण करके रिपोर्टिंग व छायांकन करने वाले प्रदेश के एकमात्र संवाददाता हैं।
प्रदर्शनियों में हिमाचल दर्शन के चित्र
भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश के सौजन्य से 13 मई से लेकर 18 मई 2012 तक गेयटी थियेटर शिमला में ‘वाह हिमाचल’ के नाम से आयोजित उनके चित्रों की प्रदर्शनी को हजारों दर्शकों ने सराहा।
17 दिसंबर 2014 को जब एनआईटी हमीरपुर के 7 वें दीक्षांत समारोह में एनआईटी परिसर में 12 दिन तक प्रदर्शनी आयोजित।
आईआईटी मंडी के कमांद परिसर में भी दूसरे दीक्षांत समारोह पर मार्च 2015 में हिमाचल दर्शन फोटो गैलरी के छायाचित्रों पर आधारित प्रदर्शनी को तत्कालीन राज्यपाल कल्याण सिंह व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने देखा व सराहा।
साल 1982 से लेकर अब तक लगातार सांस्कृतिक क्षेत्र की पत्रिकाओं जिनमें विपाशा, सोमसी, हिमप्रस्थ, गिररीराज, हिमभारती आदि में उनके खींचे चित्र प्रकाशित होते रहे हैं। लेखकों, साहित्यकारों व कवियों की हजारों पुस्तकों में उनके चित्र प्रकाषित हुए हैं।
काम को मिला सम्मान
साल 1982 में भाषा एवं संस्कृति विभाग की राज्यस्तरीय फोटोग्राफी प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार।
साल 1983 में भाषा एवं संस्कृति विभाग की राज्यस्तरीय फोटोग्राफी प्रतियोगिता में दूसरा पुरस्कार। मंडी जिला प्रशासन द्वारा सर्वश्रेष्ठ छायांकन व पत्रकारिता के लिए सम्मानित।
साल1995 में जनसत्ता के प्रधान संपादक प्रभाश जोषी द्वारा प्रेस क्लब चंडीगढ़ में जोखिमपूर्ण दुर्गम क्षेत्रों के छायांकन व पत्रकारिता के लिए हिमाचल के सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टर का पुरस्कार।
साल 1997 में निरमंड वालीबाल एसोसिएशन द्वारा पुरातत्व एवं संस्कृति संरक्षण के लिए सम्मानित।
हमीरपुर उत्सव हमीरपुर में लगाई गई प्रदर्षनी में दूसरा स्थान।
साल 2003 में प्रदेश सरकार द्वारा विकासात्मक छायांकन पत्रकारिता के लिए जिला स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित।
पत्रकार संसद हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों के लोगों के जीवन से समस्याओं व मुद्दों पर आधारित छायांकन व पत्रकारिता के लिए सम्मानित
हिमाचल केसरी धर्मषाला द्वारा सर्वश्रेष्ठ छायाकार के रूप से सम्मानित
मांडव्य कला मंच द्वारा मांडव रत्न से सम्मानित।
स्वर्गीय रूलदू राम स्मृति अवार्ड, महादेव सुंदरनगर से सम्मानित।
शिवरात्रि मेला में फोटोग्राफी प्रतियोगिता 1993 में द्वितीय पुरस्कार
राज्य स्तरीय नलवाड़ मेला 1994 में फोटोग्राफी प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार
साल 2007 को सिरमौर कला संगम द्वारा रेणुका जी में सर्वश्रेष्ठ छायाकार के रूप में से सम्मानित।
2012 में हिमोत्कर्ष संस्था द्वारा सर्वश्रेष्ठ छायाकार के अवार्ड से सम्मानित।
2015 में दिव्य हिमाचल अखबार के अंग्रेजी संस्कार न्यूज दिस वीक द्वारा गैलरी आफ दी इयर के अवार्ड से सम्मानित।
साल 2015 में हमीरपुर के नेरी में ठाकुर राम सिंह जन्म शताब्दी समारोह में प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ छायाकार के सम्मान से नवाजा गया।
साल 2015 में हिमाचल प्रदेश सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा आयोजित फोटोग्राफी प्रतियोगिता में जिला स्तर पर प्रथम पुरस्कार।
15 अप्रैल 2018 को रोटरी क्लब मंडी द्वारा बेस्ट छायाकार के सम्मान से सम्मानित।
अखिल भारतीय फोटोग्राफी प्रतियोगिता भारत के रंग 2018 में गोल्ड अवार्ड
अखिल भारतीय फोटोग्राफी प्रतियोगिता फेस्टीवल आफ इंडिया 2019 में गोल्ड अवार्ड
30 जून 2019 को भारतीय संस्कृति निधि के मंडी चेप्टर द्वारा सम्मानित
प्रतिभा पुष्प फाउंडेषन हिमाचली कला, संस्कृति व इतिहास के संवर्धन हेतु प्रतिभा पुष्प 2018-2019 का अवार्ड
साल 2020 – हिमाचल प्रदेश का प्रतिष्ठित हिमाचल गौरव।

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