कभी जहरमुक्त खेती करने की पहल पर इंदिरा का परिवार ने उड़ाया था मजाक, आज उसी की प्रेरणा से पंचायत के बीस किसान परिवार कर रहे प्राकृतिक खेती

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कभी जहरमुक्त खेती करने की पहल पर इंदिरा का परिवार ने उड़ाया था मजाक, आज उसी की प्रेरणा से पंचायत के बीस किसान परिवार कर रहे प्राकृतिक खेती
जोगिंद्रनगर से राकेश संगराई की रिपोर्ट
मंडी जिला के जोगिंद्रनगर उपमंडल के दरंग ब्लॉक की मसौली पंचायत की इंदिरा राणा ने जब अपने खेतों में जहरमुक्त खेती करने का प्रस्ताव अपने परिवार के सामने रखा तो घर में उसका मखौल उड़ाया गया और कहा गया क़ि बिना रासायनिक खाद के खेतों में कुछ पैदा होने से रहा। इंदिरा के ससुर उसके इस प्रस्ताव के पूरी तरह खिलाफ थे। इंदिरा ने अपने पति दुर्गा दत्त को विश्वास में लेकर ऐसा करने की स्थिति में होने वाले फसल के संभावित नुक्सान की एवज में दो हजार रूपए अग्रिम दे दिए।
प्राकृतिक खेती करने का प्रक्टिकल
अब जमीन इंदिरा की थी और उसमे पहली बार अपने खेतों में प्राकृतिक खेती करने का प्रक्टिकल किया। इंदिरा कहती हैं कि उनका प्रयोग सफल रहा और गेहूं के साथ मटर व चने की फसल बहुत अच्छी हुई। अब धान और मक्की में सोयाबीन और मास की फसल के परिणाम भी शानदार रहे।अब इंदिरा अपनी पांच बीघा जमीन पर प्राकृतिक खेती कर रही हैं। इतना ही नहीं, इंदिरा ने अपनी पंचायत में बीस महिलाओं का समूह बना कर बीस किसान परिवारों को प्राकृतिक खेती की और मोड़ा है। इंदिरा खुम्ब और सब्जी उत्पादन में भी प्रगतिशील कृषक हैं । इंदिरा का कहना है कि समय- समय पर आत्मा मंडी से अधिकारी आते रहते है और उन्हें प्राकृतिक खेती के सन्दर्भ में नई जानकारियां देते रहते हैं।
पालमपुर में पद्मश्री सुभाष पालेकर से मिली सीख
इंदिरा ने बताया कि दरंग ब्लॉक की तरफ से कुछ लोगों को पालमपुर में पद्मश्री सुभाष पालेकर की अध्यक्षता वाले प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने और प्रशिक्षण का अवसर मिला। शिविर में बताया गया कि किस तरह से रसायनिक खेती को त्याग कर देसी गाय के गोबर गोमूत्र से खाद और कीटनाशक तैयार कर खेती करनी है। इंदिरा कहती हैं कि उन्हें आज भी पद्मश्री सुभाष पालेकर का वो वाक्य याद है कि पहली फसल में बेशक परिणाम अच्छे न आएं, लेकिन हर बार जब हम गोबर- गोमूत्र से जीवामृत, घनजीवामृत , बीजामृत आदि बनाएंगे और खेतों में समय समय पर छिड़काव करेंगे तो परिणाम अच्छे ही आते हैं । इंदिरा ने सोचा कि पहले खुद प्रयोग करेगी और अगर परिणाम अच्छा आए तो ओरों को भी बताऊंगी। सुभाष पालेकर विधि द्वारा की गई खेती से सन्तुष्ट इंदिरा कहती हैं कि इसके परिणाम बहुत अच्छे रहे।

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