कबायली लडक़ी की मिसाल, मिशन बेजुबानों की संभाल, प्रोफेशनल डेडिकेशन वाली लाहुल घाटी की वेटनरी सर्जन डॉ. शकुतला

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कबायली लडक़ी की मिसाल, मिशन बेजुबानों की संभाल, प्रोफेशनल डेडिकेशन वाली लाहुल घाटी की वेटनरी सर्जन डॉ. शकुतला

कुल्लू से आरती ठाकुर की रिपोर्ट
अगर कभी आपको कुल्लू जिले के किसी भी एनिमल लवर या एक्टिविस्ट से ओपिनियन लेने का अवसर मिले तो वह आपको बताएगा एक ऐसी कबायली लडक़ी के समपर्ण की कहानी, जो पिछले दो दशक से बुजुबानों की जुटी हैं। लगभग डेढ़ दशक तक वेटनरी पॉली कलीनिक मोहल को स्थापित करने व उसे नई पहचान देने , एक रूतबा प्रदान करने में अहम भूमिका अदा करने वाली वेटनरी सर्जरी डॉ. शकुतला वैद ने सर्जरी कर कई जानवरों को नवजीवन दिया है। उनके फेसबुक के हर एक प्रोफेशनल एलबम में जाकर आप उस डेडिकेशन और मेहनत को आंक सकते हैं, जो डॉक्टर शकुलता व उनकी टीम करती आ रही रही है।

सीनियर वेटनरी अफसर
शिक्षक पिता व गृहणी मां की लाडली शकुंतला ने वेटनरी कॉलेज पालमपुर से अपनी पढ़ाई की है। उन्होंने साल 2000 से लाहुल के किलिंग से बतौर वेटनरी सर्जन अपने कैरियर की शुरुआत की। साल 2002 से 2008 तक वेटनरी पॉली कलीनिक मोहल में कार्यरत रहीं। साल 2008 से 2011 तक शीप ब्रीडिंग फ़ार्म नगवाईं में सेवाएं देने के बाद 2011 से 2018 तक फिर से वेटनरी पॉली क्लीनिक मोहल में तैनात रहीं। साल 2018 में पदोन्नत हो कर सब डिवीजन वेटनरी हॉस्पिटल कुल्लू में सीनियर वेटनरी अफसर के पद पर तैनात हैं।

परिवार प्रायोरिटी, प्रोफेशन है पैशन
डॉ. शकुंतला कहती हैं, ‘प्रोफेशन और घर के अलावा कुछ नहीं है मेरी ज़न्दगी में। घर परिवार मेरी प्रायोरिटी है तो प्रोफेशन मेरा पैशन प्यार और सब कुछ है। मेने अपनी जि़न्दगी इन्ही दो चीज़ों क लिए न्यौछावर किया है । हां, आज की तिथि में इन दो के इलावा किसी भी चीज़ के लिए वक्त मिल नहीं पता। प्रोफेशनल डेडिकेशन के लिए पहचान रखने वाली डॉ. शकुंतला कहती हैं कि एक सर्जन को एडमिनिस्ट्रेटिव पोस्ट पर बिठा देना ठीक वैसा ही है जैसे एक अ‘छी भली बेहतरीन काम की मशीन को जंग लगने के लिए रख देना, उसका सदुपयोग न करना, एक सिपाही को बॉर्डर पर जाने से रोकने जैसा, जिसका दु:ख और दर्द मुझे जि़न्दगी भर रहेगा।’

सीटी बजाना और गीत गाना
अपने स्टाफ और दोस्तों में डॉ. शकुन के नाम से मशहूर डॉ. शुकंतला एक संवेदनशील कवियत्री है और उनकी कविताओं में कबायली क्षेत्र के लोगों खासकर महिलाओं के संघर्ष को पढ़ा जा सकता है। उनकी मां को समर्पित एक मार्मिक रचना सुनने वालों की आंखें नम कर देती है। होंठों से सीटी बजाना और सीटी में गाना गाने का भी हुनर रखती हैं। सदाबहार हंसी उनके व्यक्तित्व की पहचान है। उनके पति डॉक्टर हैं और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ हैं। फोकस हिमाचल टीम डॉ. शकुंतला के ज’बे को सेल्यूट करती है।


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