कडाके की ठण्ड और कम ऑक्सीजन वाले क्षेत्र में 100 किलो भार ढोने की ताकत, गधों की दुर्लभ स्पीति प्रजाति के वजूद पर खतरा

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कडाके की ठण्ड और कम ऑक्सीजन वाले क्षेत्र में 100 किलो भार ढोने की ताकत, गधों की दुर्लभ स्पीति प्रजाति के वजूद पर खतरा
मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट
यह पालतू जानवर विपरीप भोगोलिक परिस्थियों के बीच कडाके की ठण्ड और कम ऑक्सीजन वाले पहाड़ी क्षेत्र में कम चारा खाकर भी 100 किलो भार ढोने में सक्षम है। कभी स्पीति गधों का स्थानीय आर्थिकी में अहम रोल था और उनका मुख्य उपयोग चरागाह व खेतों के लिए गोबर व खाद ले जाना, जंगल से जलाने की लकड़ी व चारा लाना, भवन निर्माण की सामग्री ढ़ोना और सैलानियों का सामान ढ़ोना होता था। इन गधों की बिक्री से भी पशुपालकों को आमदनी होती थी, परन्तु वर्तमान में तेज़ी से हो रहे अभियांत्रिकीकरण के इनकी चलते स्पिति गधों की संख्या में तेज़ी से निरंतर कमी आ रही है। आलम यही रहा तो कुछ ही सालों में गधों की इस दुर्लभ प्रजाति का नामोनिशान मिट जाएगा। राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो करनाल इस प्रजाति को बचाने के लिए इसके संरक्षण व सुधार के लिए गंभीरता से आवश्यक कदम उठाने की वकालत कर रहा है।
तेज़ी के कम हो रही संख्या
स्पीति प्रजाति के गधे हिमाचल प्रदेश के लाहुल- स्पिति जिला के स्पीति व यांगथांग क्षेत्रों में पाए जाते हैं। यह क्षेत्र समुद्र तल से तीन हाजार से चार हजार मीटर के बीच स्थित है। इस क्षेत्र की जलवायु अत्यधिक ठंडी व शुष्क है। बहुत अधिक हिमपात व अत्यधिक ठण्ड के कारण यहाँ शरद ऋतु बहुत ही कठिन होती हैं। पिछली पशु जनगणना के अनुसार लाहौल स्पीति और किन्नौर जिलों में गधों की कुल संख्या क्रमशः 2007 और 2361 है।
योजनाकारों की नजर में नजरअंदाज
गधा एक शर्मीला व मेहनती जानवर है। इसकी कठिन मार्गों पर आसानी से बिना फिसले चलने की विशेषता के कारण इसे, विशेषकर दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में, बोझा ढोने के काम में लाया जाता है। पालने में कम खर्च के कारण यह आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए भी काफी उपयोगी है। गधे के इन गुणों के बावजूद इसे योजनाकारों व् अनुसंधानकर्ताओं ने अक्सर इसे नजरअंदाज किया है। भारत में पाई जाने वाली गधे की नस्लों, उनके शारीरिक गुणों, पालने की विधि व उपयोगिता पर बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। देश में गधे की कुछ प्रजातियों जैसे स्पीति अथवा लद्दाखी गधों के बारे में ही कुछ उल्लेख उपलब्ध हैं।
छोटा आकार, गठे शरीर और मजबूत टांगें
राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो करनाल के अध्ययन के मुताबिक स्पीति गधे छोटे आकार के मजबूत और गठे हुए शरीर के होते हैं। इनकी पीठ सीधी व् टाँगे मजबूत होती हैं। इनका शरीर लंबे बालों की मोटी तह से ढका रहता है। यह मुख्यतः गहरे भूरे/काले, हलके रंग की तली वाले भूरे और लगभग सफेद तली वाले हल्के भूरे रंग के होते हैं। इन गधों का सिर छोटा व चौड़ा होता है। नाक की हड्डी सीधी या हल्की सी उत्तल होती है। इनके कान अपेक्षाकृत छोटे, सीधे व् ऊपर की और उठे होते हैं जो आड़ी व सीधी, दोनों धुरियों पर घूम सकते हैं। सिर मजबूत गर्दन पर टिका होता।
छह मादाओं पर एक नर
राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो करनाल का अध्ययन बताता है कि स्पिति गधों का मुख्य प्रजनन समय मार्च से सितम्बर तक रहता है, परन्तु यह वर्ष भर प्रजनन करते देखे गए हैं। नर पशुओं की प्रजनन के लिए वयस्क होने की उम्र डेढ़ से दो साल तक है। चार से छः मादाओं से प्रजनन के लिए एक नर रखा जाता है। प्रजनन के लिए नर का चुनाव पशु के स्वास्थ्य, काम करने की क्षमता, फुर्ती, खड़े कान, चमकीली आँखों आदि के आधार पर किया जाता है। मादा पशुओं की प्रजनन के लिए वयस्क होने की उम्र डेढ़ से दो साल तक है। पहला गर्भधारण दो से तीन साल के बीच में होता है। गर्भ का अन्तराल 12 से 12.5 महीने तक का होता है।
चारे की कमी सहन करने की क्षमता
स्पिति गधों को गर्मियों में खुले स्थान में रखा जाता है, जो पत्थरों की दीवार या बाड़ से घिरा होता है। सर्दियों व रात के समय इन्हें पशु गृह में रखा जाता है, जो अक्सर घर का हिस्सा होता है। इनको चराकर अथवा घर पर ही चारा उपलब्ध करा कर पाला जाता है। गर्मियों में इन्हें नजदीकी चरागाहों व अन्य अनुपयोगी भूमि में चरने के लिए छोड़ दिया जाता है। सर्दियों में, जब यह क्षेत्र पूरी तरह से बर्फ से ढका रहता है, इनको गर्मियों में संरक्षित किया सूखा चारा उपलब्ध कराया जाता है। ये गधे इस क्षेत्र में पड़ने वाली ठण्ड व चारे की कमी को सहन करने में सक्षम हैं। इनको कुछ मात्रा में काला मटर, जौ, मटर का छिलका, गेहूं व बाजार में उपलब्ध पशु आहार भी दिया जाता है।
photo credit – the spiti vailey

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