कई सैन्य ऑपरेशन में भाग लेते हुए की पढाई, रिटायर्ड हो शिक्षक बने, फिर बैंक ऑफिसर और तीसरे प्रयास में पास की एचएएस परीक्षा, कुल्लू की दुर्गम लग वैली के साधारण किसान परिवार के होनहार टिक्कम ठाकुर की प्रेरककथा

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कई सैन्य ऑपरेशन में भाग लेते हुए की पढाई, रिटायर्ड हो शिक्षक बने, फिर बैंक ऑफिसर और तीसरे प्रयास में पास की एचएएस परीक्षा, कुल्लू की दुर्गम लग वैली के साधारण किसान परिवार के होनहार टिक्कम ठाकुर की प्रेरककथा

 

कुल्लू से आरती ठाकुर की रिपोर्ट

 

आज की प्रेरककथा के नायक हैं कुल्लू जिला की लग घाटी के एक साधारण कृषक परिवार में पैदा हुए होनहार और जुनूनी बेटे टिक्कम ठाकुर की, जिसने दसवीं करने के बाद भारतीय सेना को ज्वाइन कर कई सैन्य ऑपरेशन में भाग लेते हुए की अपनी आगे की पढाई जारी रखी और रिटायर्ड होकर  शिक्षक के रूप में पारी शुरू की और फिर अपनी प्रतिभा से बैंक ऑफिसर बने। बैंकर रहते हुए उन्होंने तीसरे प्रयास में प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित एचएएस परीक्षा पास कर अपने हुनर का लोहा मनवाया। वर्तमान में नूरपुर के सहायक आयुक्त राज्यकर एवं आबकारी टिक्कम ठाकुर ने कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयासों से यह मुकाम हासिल किया है। आइये फर्श से अर्श तक पहुँचने की इस कथा का आनंद लेते हैं और प्रेरणा भी।

 

सैनिक ने खोला पढने के लिए मोर्चा 

 

7 फरवरी 1969 को कुल्लू की लग वैली के साधारण किसान मघु राम ठाकुर के घर पैदा हुए टिक्कम ठाकुर स्थानीय स्कूल से दसवीं करने के बाद भारतीय सेना की 7 डोगरा में भर्ती हो गए। अपनी 15 साल की आर्मी जॉब के दौरान उन्होंने कई सैन्य ऑपरेशन में भाग लिया। 1989- 90 में श्रीलंका में शांति सेना का हिस्सा रहे तो 1999 में कारगिल युद्ध में भाग लिया और कश्मीर के ऑपरेशन रक्षक में भी शामिल रहे। सैनिक की भूमिका निभाते हुए उन्होंने अपनी आगे की पढाई जारी रखी और इंग्लिश में एमए करने के बाद बीएड की डिग्री हासिल की।

 

तीसरा प्रयास, एचएएस पास

 

2003 में सेना से सेवानिवृति के बाद उन्होंने कुल्लू में डेढ़ साल तक बतौर शिक्षक सेवायें प्रदान कीं और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की मनाली शाखा में दो साल सेवायें प्रदान कीं। इस बीच टिक्कम ठाकुर हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा हिमाचल प्रशासनिक सेवा (एचएएस) की तैयारियों में भी जुटे रहे। पहले दो प्रयासों में असफलता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में इस परीक्षा को पास कर राज्यकर एवं आबकारी विभाग में नियुक्त हुए। प्रशिक्षण के बाद टिक्कम ठाकुर की पहली नियुक्ति चंबा जिला के तुनु हट्टी में हुई। उसके बाद डमटाल, नगरोटा बगवां, गगरेट, धर्मशाला, पांवटा साहिब और शिमला में सेवायें प्रदान करने के बाद जनवरी 2021 में आबकारी जिला नूरपुर के राज्यकर एवं आबकारी उपायुक्त पदोन्नत हुए।

 

व्यक्तित्व में कई खूबियां

 

साल 1990 में टिक्कम ठाकुर की शादी विमला देवी से हुई, जो एक घरेलू महिला हैं। ठाकुर दम्पति का एक बेटा वीर सिंह है, जो कॉर्पोरेट सेक्टर में कार्यरत है और हाल ही में उसकी शादी हुई है। बागवानी के शौक़ीन टिक्कम ठाकुर नाचने के हुनर के उस्ताद हैं और उनकी हैण्ड राइटिंग का भी कोई तोड़ नहीं है। भारतीय सेना से मिला अनुशासन उनकी सबसे बड़ी ताकत है और बैंक में रहते हुए फाइनेंस के मामले में दक्षता हासिल की है। राजकर एवं आबकारी अधिकारी के रूप में शानदार उपलब्धियां उनके नाम हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


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