ऐतिहासिक विरासत – ब्रिटिश रूल के दौरान सुपरीटेंडेंट ऑफ़ हिल स्टेट्स का कैम्प ऑफिस रहा रामपुर का सौ साल से पुराना ‘डगलस कॉटेज’ अब एसडीएम का ऑफिसियल रेजिडेंस

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ऐतिहासिक विरासत – ब्रिटिश रूल के दौरान सुपरीटेंडेंट ऑफ़ हिल स्टेट्स का कैम्प ऑफिस रहा रामपुर का सौ साल से पुराना ‘डगलस कॉटेज’ अब एसडीएम का ऑफिसियल रेजिडेंस
रामपुर से विनोद भावुक की रिपोर्ट
ब्रिटिश रूल के दौरान सुपरीटेंडेंट ऑफ़ हिल स्टेट्स का कैम्प ऑफिस रहा एक सदी पुराना सुंदर छोटा सा ‘डगलस कॉटेज’ है वर्तमान में एसडीएम रामपुर के ऑफिसियल रेजिडेंस की भूमिका निभा रहा है। सतलुज के किनारे एक पहाड़ी पर अकेले खड़े डगलस कॉटेज तक पहुंचने के लिए लंबी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। आबादी से दूर ऊंचे स्थान पर बने इस कॉटेज के फर्श की योजना सरल है। वॉशरूम में खुलने वाले एक छोटे से ड्रेसिंग से बाहरी तरफ दो बड़े कमरे जुड़े हुए हैं। जगह की वास्तुकला आमतौर पर ब्रिटिश है। ऊंची लकड़ी की छत और रसोई क्षेत्र के साथ बड़े कमरे शांति सुनिश्चित करते हैं। इस कॉटेज के कमरों की ट्रेन जैसी व्यवस्था एक बरामदे में खुलती थी, जिसके सामने खुला आंगन था। पूर्वी छोर से आने वाले रास्ते में घोड़ों के आराम करने के लिए एक छोटा सा अस्तबल था, जबकि कॉटेज के पश्चिमी छोर में एक रसोई क्षेत्र था जो मुख्य कॉटेज से अलग था। कलांतर में डगलस कॉटेज में बड़े बदलाव हुए। आउटहाउस में रसोई को एक अतिरिक्त कमरे में बदल दिया गया, जबकि बरामदे से एक छोटे से हॉल और एक रसोई घर को रास्ता बना दिया गया है। प्रवेश द्वार के पास घोड़े के अस्तबल की जगह एक और आउटहाउस बन गया है। इस सबके बावजूद यह कॉटेज मोटी पत्थर की दीवारें, ऊंची लकड़ी की छत और फायरप्लेस जैसे अपने प्रमुख तत्वों को अभी भी बरकरार रखे हुए है।
गुमनाम कॉटेज के इतिहास की खोज
इस ब्रिटिशकालीन कॉटेज के इतिहास के बारे में चार साल पहले तक अधिकतर लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं थी। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी डॉ. निपुण जिंदल ने जब रामपुर बुशहर के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट का कार्यभार संभाला तो उन्होंने डगलस कॉटेज के इतिहास को खंगालने की पहल की और इस कॉटेज के निर्माण से जुडी एतिहासिक जानकारियों को जुटाकर 2017 में एक ब्लॉग के जरिये पाठकों से साझा किया। डॉ. निपुण जिंदल वर्तमान में कांगड़ा जिला के उपायुक्त हैं। ब्लॉगर और फोटोग्राफर के तौर पर दखल रखने वाले डॉ. निपुण जिंदल लिखते हैं, ‘डगलस कॉटेज’ में प्रवेश करते ही उन्हें ऐतिहासिक विरासत की भावना ने अभिभूत कर दिया। उन्हें आश्चर्य हुआ कि जिस डगलस के नाम पर कॉटेज बना है वह कौन हो सकता है? सबसे हैरानी की बात थी कि उस समय इस दुर्गम स्थान पर क्या कर रहा होगा? इन्हीं सवालों ने इस कॉटेज के निर्माण की वजह के बारे में जानने की जिज्ञासा पैदा की, लेकिन इस कॉटेज के इतिहास और इसके दस्तावेज़ीकरण की कमी ने उन्हें अंत तक परेशान किया।‘
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का केंद्र रामपुर
तत्कालीन बुशहर रियासत की राजधानी रामपुर बुशहर इस क्षेत्र के पूरे इतिहास में एक प्रमुख स्थान रखती है। यह स्थान बुशहर राजाओं के सदियों के शासन, शासन को उखाड़ फेंकने की कई साजिशों, कई लड़ाइयों, गोरखाओं के एक छोटे शासन और साल 1815 के बाद से ब्रिटिश प्रभाव के अलग- अलग कालखंडों की गवाही देता है। ऐतिहासिक रामपुर शहर सतलुज नदी के तट पर स्थित है, जिसका उल्लेख विदेशी यात्रियों और लेखकों विशेषकर रुडयार्ड किपलिंग के कई लेखों में मिलता है । यह शहर 350 वर्षों से भी अधिक समय से तिब्बत और लद्दाख के साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का केंद्र रहा है और व्यापार मेले के नाम से मशहूर लवी मेला आज भी जारी है। डॉ. निपुण जिंदल कहते हैं कि जब उन्होंने बुशहर साम्राज्य और शिमला हिल्स स्टेट्स के पूरे इतिहास के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की तो शिमला हिल्स स्टेट्स के सुपरीटेंडेंट के रूप में सेवा करने वाले एक मेजर एम डब्ल्यू डगलस के संदर्भ में केवल कुछ ही संदर्भ मिले। डॉ. निपुण जिंदल ने जब ऐतिहासिक सन्दर्भों की खोज शुरू की तो शिमला उपायुक्त कार्यालय के इनकम्बेंसी बोर्ड की तरफ से बताया गया कि साल 1906 से 1911 तक की जानकारी गायब है।
एंग्लो नेपाल युद्ध के बाद अंग्रेजों का दखल
बुशहर रियासत में ब्रिटिश का प्रभाव वर्ष 1815 से शुरू होता है, जब अंग्रेजों ने एंग्लो नेपाल युद्ध के दौरान गोरखाओं को खदेड़ने में पहाड़ी रियासतों के प्रमुखों की मदद की थी। इसके बाद यहां का स्थानीय प्रशासन एक ब्रिटिश राजनीतिक एजेंट द्वारा निर्देशित किया जाता था, जो शिमला में तैनात सुपरीटेंडेंट ऑफ़ हिल स्टेट्स को रिपोर्ट करता था। इस जानकारी से यह तर्कसंगत प्रतीत होता है कि सुपरीटेंडेंट ऑफ़ हिल स्टेट्स का निवास शिमला में होगा न कि रामपुर में। ऐसे में सवाल यह उठता है कि शिमला में सुपरीटेंडेंट ऑफ़ हिल स्टेट्स के रूप में सेवायें देने वाले डगलस ने क्यों रामपुर में कॉटेज बनाया होगा? इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए डॉ. जिंदल को इतिहास की गहराई में उतरना पड़ा।
सबसे बड़ी और सबसे धनी रियासत
डॉ. जिंदल कहते है, ’जो जानकारी उन्होंने जुटाई, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि मेजर एम डब्ल्यू डगलस का सुपरीटेंडेंट ऑफ़ हिल स्टेट्स के रूप में कार्यकाल बुशहर रियासत के सबसे अशांत राजनीतिक समय के साथ मेल खाता है। 28 पहाड़ी रियासतों में सबसे बड़ी और सबसे धनी रियासत होने के कारण ब्रिटिश बुशहर को अनदेखा नहीं कर सकते थे। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, राजा शमशेर सिंह के इकलौते पुत्र टिक्का रघुनाथ सिंह की 1898 में अकाल मृत्यु हो गई थी और सिंहासन का कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं था। 1907 में रियासत ने एक ‘बाहरी’ सुरेंद्र शाह को गोद लिया गया जो गढ़वाल के राजा के भाई थे। लेफ्टीनेंट गवर्नर पंजाब ने राज्य के स्थानीय लोगों, रिश्तेदारों, अधिकारियों और प्रबंधकों के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए गोद लेने के बारे में एक निश्चित राय देने के लिए, तत्कालीन सुपरीटेंडेंट ऑफ़ हिल स्टेट्स शिमला डगलस को मामला भेजा।
ब्रिटिश डिप्टी कंजरवेटर की हत्या की कोशिश
इस जांच के दौरान, राजा पदम सिंह सहित कई लोगों ने सिंहासन पर अपना दावा पेश किया। 1908 में सुपरीटेंडेंट ऑफ़ हिल स्टेट्स ने अन्य सभी दावों को खारिज करते हुए सुरेंद्र शाह को अपनाने की सिफारिश की, भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। 1909 में रियासत में अथरबिस फारेस्ट रेंज के ब्रिटिश डिप्टी कंजरवेटर गिब्सन की हत्या का एक असफल प्रयास हुआ। गिब्सन की हत्या के प्रयास के मुकदमे की इन्क्वायरी सुपरीटेंडेंट ऑफ़ हिल स्टेट्स को सौंपी गई। ऐतिहासिक अभिलेखों से पता चलता है कि 1910 में तत्कालीन सुपरीटेंडेंट एबी केटलवेल ने हत्या के प्रयास में सुरेंद्र शाह की संलिप्तता को स्थापित करने वाले तथ्यों, परिस्थितियों और अनुमानों का ज्ञापन प्रस्तुत किया था। दत्तक को निष्कासित कर दिया गया और राजा पदम सिंह को 1914 में राजा के रूप में राज्याभिषेक किया गया, जिसने बाद में एक यादगार शासन किया।
इसलिए बना डगलस कॉटेज !
डॉ. जिंदल लिखते हैं कि रियासत में जो कुछ घटित हुआ उससे बहुत अच्छी तरह से कल्पना की जा सकती है कि इन सभी मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए अंग्रेजों की ओर से बहुत समय और प्रयास लगा होगा। इन मामलों को हल करने के लिए सुपरीटेंडेंट ऑफ़ हिल स्टेट्स ने अक्सर शिमला से रामपुर की यात्रा की होगी। पुराने हिंदुस्तान- तिब्बत रोड पर शिमला से रामपुर से 70 मील की दूरी पर होने के कारण ज्यादातर यात्राएं घोड़े की पीठ पर बैठ कर की गई होगी। रियासत में हुए इस तरह के मामलों की जांच के लिए सुपरीटेंडेंट ऑफ़ हिल स्टेट्स के लिए रामपुर में एक कैम्प ऑफिस की आवश्यकता महसूस की गई होगी और यह आवश्यकता डगलस कॉटेज के निर्माण की वजह बनी होगी। इस कोटेज में रियासत से सम्बंधित कितने ही ऐतिहासिक फैसले लिखे गए होंगे।

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