एजे डंकन की किताब ‘द सिंपल एडवेंचर्स आफ  ए मेम साहब’ में है ऊंट और बैलगाड़ियों से शिमला पहुंचने और ब्रिटिश इंजीनियर के साथ रेलमार्ग निर्माण में मदद करने वाले बाबा भलखू का किस्सा

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शिमला से सुनील शर्मा की रिपोर्ट

एजे डंकन की किताब में विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलखंड से जुड़ी दिलचस्प बातें हैं। सुंदर, मनमोहक पहाडिय़ों एवं घाटियों, बर्फीले हिमखंडों से युक्त 102 सुरंगों और चार मंजिला स्टोन आर्च पुल वाले विश्व धरोहर कालका-शिमला हेरीटेज रेलमार्ग के निर्माण में किसी ब्रिटिश इंजीनियर की बजाय एक अनपढ़ पहाड़ी गडरिया भलखू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रेलखंड के निर्माण से पहले विक्टोरिया युग में शिमला की यात्रा अपने आप में इसलिए खास थी, क्योंकि सामान सहित ऊंटों और बैलगाडिय़ों के जरिये यात्रा पूरी होती थी।आज़ादी का अमृत महोत्सव : क्रांति की लौ जगाने में  मियां जवाहर के सिपहसालार जवाहर नरयाल की रही मुख्य भूमिका, 1915 को नागचला के लाकिया गोसाई के घर में हुई लूट में थे शामिल, ऐसे क्रांतिकारियों का विभाग के पास नहीं कोई रिकार्ड

डंकन ने अपनी पुस्तक ‘द सिंपल एडवेंचर्स आफ  ए मेम साहब’ (लंदन 1983) में बताया है कि किस प्रकार एक परिवार जिसमें एक मां, तीन बच्चे, एक नर्स आदि अपने सामान के साथ कोलकत्ता से शिमला आने के लिए 11 ऊंट और 4 बैलगाडिय़ों से यात्रा करने की योजना बनाते हैं। पुस्तक के अनुसार, उन दिनों रेलगाड़ी नहीं होने के कारण ऐसी यात्रा ऊंटों और बैलगाडिय़ों की मदद से पूरी की जाती थी। पहले ऊंट पर कपड़ों के दो बड़े एवं दो छोटे ट्रंक, दूसरे ऊंट पर बच्चों के कपड़ों का संदूक एवं तीन बैग, तीसरे ऊंट पर किताबों के बक्से एवं फोल्डिंग कुर्सियां, चौथे ऊंट पर सामान के चार बक्से एवं बरसाती शीट, पांचवें ऊंट पर दराज वाले बाक्स, दो चारपायी एवं चार टेबल, छठे ऊंट पर दराजों वाला दूसरा बक्सा, स्क्रीन लैंप, लालटेन आदि, सातवें ऊंट पर चादर, बाल्टी, साजावटी सामान एवं बर्फ  रखने की बाल्टी, आठवें ऊंट पर क्राकरी के तीन बक्से, टेनिस पोल आदि, नौवें ऊंट पर दूध रखने के बर्तन, बच्चों के टब, सिलाई मशीन घड़े, दसवें ऊंट पर रसोई के बर्तन एवं गलीचे तथा ग्यारहवें ऊंट पर नौकरों की चारपायी, टेबल ग्लास आदि का लदान होता था।आज़ादी का अमृत महोत्सव : एक आयरिश लेडी ने नाटकों में भारतीय संस्कृति को उभारकर ब्रिटिश हुकूमत को दी थी चुनौती, दिल में भारत के लिए प्रेम लेकर इंग्लैंड से लौट आईं नोरा रिचर्ड्स ने कांगड़ा के अंद्रेटा में किया बसेरा, यहीं नाटकशाला बनाकर ग्रामीणों को दिया अभिनय का प्रशिक्षण, इनकी ख्याति से प्रभावित होकर महान अभिनेता पृथ्वीराज कपूर और बलराज साहनी भी आये थे अंद्रेटा  
डंकन ने पुस्तक में लिखा है कि चार बैलगाडिय़ों पर ऐसे सामान लादे जाते थे, जो क्षतिग्रस्त नहीं हों। इनमें प्यानो आदि शामिल थे। 1903 के अंत में रेललाइन खुलने के बाद कालका-शिमला रेलवे पर नियमित रूप से रेल सेवाएं प्रारंभ हुई।


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