एजूकेशन स्टार्टअप : मेहनत और तजुर्बा, मेरिट का नाम ‘मिनर्वा’ दो भाइयों के प्रबंधन कौशल से टॉप एजूकेशन ब्रांड बने इस स्कूल में पढ़ रहे नौ जिलों के हजारों स्टूडेंट्स

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एजूकेशन स्टार्टअप : मेहनत और तजुर्बा, मेरिट का नाम ‘मिनर्वा’ दो भाइयों के प्रबंधन कौशल से टॉप एजूकेशन ब्रांड बने इस स्कूल में पढ़ रहे नौ जिलों के हजारों स्टूडेंट्स

 

बिलासपुर से विजय कुमार की रिपोर्ट

 

बिलासपुर के घुमारवीं कस्बे को स्कूल एजूकेशन का हब बनाने वाले दो भाईयों परवेश चंदेल और राकेश चंदेल के जज्बे और जुनून की इस प्रेरककथा में मेहनत की खुशबू है। 18 साल पहले ड्राइंग टीचर सुखदेव सिंह के दो बेटों ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में अनूठे प्रयोग करने की ठानी और संसाधनों के अभाव के बावजूद दोनों भाईयों के मैनेजमेंट का ही कमाल है कि आज ‘मिनर्वा’ स्कूली शिक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा बांड बन गया है। इस स्कूल को अब मेरिट स्कूल के नाम से भी पहचाना जाता है। अब स्कूल में प्रदेश के 12 जिलों में से 9 जिलों के हजारों स्टूडेंट्स शिक्षा हासिल कर रहे हैं। घुमारवीं के वार्ड नबंर-3 बजोहा में स्थित यह स्कूल पिछले लंबे अर्से से हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षाओं की मैरिट लिस्ट में अपना दबदबा बनाए हुए है।

 

ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए छोड़ दी जॉब


बीएससी, बीएड, एम.कॉम, एमएड करने के बाद परेवश चंदेल ने डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल कुमारसैन में बतौर साइंस टीचर काम किया। 2002 में उन्होंने नौकरी छोड़ खुद का शैक्षणिक संस्थान शुरू करने का निर्णय लिया। उनके छोटे भाई राकेश चंदेल ने फिजीक्स में एमएससी करने के बाद हमीरपुर के एक निजी संस्थान में सेवाएं प्रदान कीं और बाद में सरकारी शिक्षक के रूप में उनकी निुयक्ति हुई। उन्होंने अपने बड़े भाई के मिशन में साथ देने को प्राथमिकता दी।

किराये के भवन से हुई शुरुआत


साइंस स्ट्रीम में जमा एक और जमा दो की मेडिकल और नॉन मेडिकल के 82 स्टूडेंट्स के साथ 2003 में किराये के एक भवन में 6 कमरों से स्कूल शुरू किया। स्कूल लैब के लिए उपकरण भी उधारी पर खरीदे गए। शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न स्कूलों में कार्यरत दोस्तों को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के साथ जोड़ा। कमजोर स्टूडेंट्स की घर-घर जाकर मॉनीटरिंग की। दो साल बाद 2005 में फस्र्ट से जमा दो तक स्कूल शुरू किया।  वर्तमान में मिनर्वा स्कूल का 60 कमरों का अपना भवन है और विभिन्न कक्षाओं में 2000 से ज्यादा स्टूडेंट्स शिक्षा ग्रहण कर
रहे हैं।

 

बिलासपुर-घुमारवीं में सर्कल अकादमी


मिनर्वा एजूकेशन सोसायटी ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में स्थापित होने के बाद बिलासपुर और घमारवीं में मिनर्वा स्टडी सर्कल अकादमी की शुरुआत की है। इंजीनियरिंग और मेडिकल तथा एनडीए की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए गुणवतापरक शिक्षा प्रदान की जाती है। इस अकादमी से कोचिंग हासिल करने के बाद कई स्टूडेंट्स प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं। मिनर्वा आईएस जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित परीक्षाओंं के लिए प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए संस्थान स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है, जिसके लिए कैंपस निर्माणाधीन है।

 

बोर्ड एग्जाम में मैरिट, प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन

मिनर्वा स्कूल के स्टूडेंट्स जहां शिक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित दसवीं और जमा दो की परीक्षाओं में परचम लहरा रहे हैं, वहीं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां का एक स्टूडेंट प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थान इसरो के लिए चयनित हुआ है। एनआईटी हमीरपुर, आईजीएमसी सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में यहां के स्टूडेंट्स का चयन हो रहा है। स्कूल से पढक़र निकले 30 से ज्यादा स्टूडेंट्स विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित पदों पर सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। स्कूल की ओल्ड स्टूडेंट्स एसोशिएशन की ओर से हर साल गेट-टू-गेदर का आयोजन किया जा रहा है।

 

स्कूल से निकले मोती

मिनर्वा स्कूल के स्टूडेंट्स जहां शिक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित दसवीं और जमा दो की परीक्षाओं में परचम लहरा रहे हैं, वहीं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां के स्टूडेंट प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थान इसरो के लिए चयनित हैं तो एनआईटी हमीरपुर, आईजीएमसी सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में यहां के स्टूडेंट्स का चयन हो रहा है। स्कूल से पढक़र निकले 30 से ज्यादा स्टूडेंट्स विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित पदों पर सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। स्कूल की ओल्ड स्टूडेंट्स एसोशिएशन की ओर से हर साल गेट-टू-गेदर का आयोजन किया जा रहा है।

 

यूरो किड्स इंटरनेशनल प्ले स्कूल

मिनर्वा स्कूल बाहरी जिलों से शिक्षा ग्रहण करने आने वाले लडक़ों व लड़कियों के लिए अलग-अलग होस्टल सुविधा प्रदान करता है। मिनर्वा ने भारत के सबसे बड़ी चेन प्री स्कूल एजूकेशन, यूरो किड्स इंटरनेशनल के सहयोग से छोटे बच्चों के लिए प्ले स्कूल स्थापित किया है। मिनर्वा स्कूल में स्मार्ट क्लास रूम की सुविधा भी मौजूद हैं और पर्सनैल्टी डिवैल्पमेंट कोर्सेज भी करवाए जाते हैं। स्थानीय स्टूडेंट्स के लिए मिनर्वा स्कूल 14 रूट्स पर बस सुविधा उपलब्ध करवा रहा है।

 

नशा और डिप्रेशन चुनौती


परवेश चंदेल स्कूल मिनर्वा स्कूल के प्रिंसीपल और राकेश चंदेल वाइस प्रिंसीपल है। परवेश चंदेल कहते हैं कि वर्तमान में स्टूडेंट्स को नशे की चुंगल से बचाना और डिप्रेशन का शिकार न होने देना एक चुनौती है। उनका कहना है कि बच्चों से जरूरत से ज्यादा उम्मीदें उन्हें अवसाद का शिकार बना रही हैं। वे कहते हैं कि स्टूडेंट्स की जन्मजात प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारना ही असली शिक्षा है।

 

 


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