एक भी गाय न हो बांझपन का शिकार, डॉ. मधुमीत तीन दशकों से कर रहे उपचार , बांझपन के कारणों का पता लगाने के लिए किया है व्यापक शोध किया, हजारों गायों से बांझपन से बचाया

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

एक भी गाय न हो बांझपन का शिकार, डॉ. मधुमीत तीन दशकों से कर रहे उपचार , बांझपन के कारणों का पता लगाने के लिए किया है व्यापक शोध किया, हजारों गायों से बांझपन से बचाया

 

पालमपुर से विनोद भावुक की रिपोर्ट

कोई गाय बांझपन का शिकार न हो, इसी मिशन के लिए डॉ. मधुमीत पिछले तीन दशक से उपचार करने में जुटे हैं। वे हिमाचल प्रदेश के कोने- कोने में 500 से अधिक पशु बांझपन उपचार शिविरों में भाग ले चुके हैं। उन्होंने प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों जैसे पांगी, भरमौर, होली, लाहौल, स्पीति, किन्नौर, सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र और जिला शिमला के डोडरा-क्वार क्षेत्र में बांझपन से ग्रसित दुधारू पशुओं का इलाज किया है। एक शोधकर्ता के तौर उन्होंने पिछले 30 वर्षों में प्रदेश की गायों और भैंसों में बांझपन के कारणों का पता लगाने के लिए व्यापक शोध किया है। उन्होनें दस शोध परियोजनाओं में भागीदारी की है। वर्तमान में वह कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में डायरेक्टर एक्सटेंशन एजुकेशन के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वे विश्वविध्यालय के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय,पशु मादा रोग एवं प्रसूति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष के पद पर तैनात रहे हैं।

 

अवारा गायों के प्रजनन और पुर्नवास पर काम

डॉ. मधुमीत सिंह हिमाचल प्रदेश में छोड़ी हुई आवारा गायों की प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं और उनके पुनर्वास के संभावित उपायों पर लगातार कार्य कर रहे हैं। वह नियमित रूप से राज्य के पशुपालन विभाग में काम करने वाले पशु चिकित्सकों और फार्मासिस्टों को कृत्रिम गर्भाधान और बांझपन प्रबंधन पर नवीनतम जानकारी और प्रशिक्षण दे रहे हैं।

 

अध्यापन का बिरला रिकॉर्ड है नाम

डॉ. मधुमीत सिंह अक्टूबर 1988 से नियमित रूप से प्रशिक्षु पशु चिकित्सकों की स्नातक और स्नातकोतर कक्षाओं में पढ़ा रहे हैं। पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय पालमपुर से अब तक जिन्होनें भी स्नातक किया है, सबको पढ़ाने का सम्मान उन्हें प्राप्त है। ये अब तक 38 स्नातकोतर व पीएच.डी. प्रशिक्षुओं का मादा रोग एवं प्रसूति विषय में प्रमुख सलाहकार के रूप में मार्ग दर्शन कर चुके हैं या कर रहे हैं।

 

सैकड़ों शोधपत्र प्रकाशित, कई पुरस्कारों से सम्मानित

डा. मधुमीत सिंह ने राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय पत्रिकाओं में 200 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उनको उनकी बेहतरीन सेवाओं के लिए कई मंचों से सम्मानित किया जा चुका है। उनके खाते में 15 से अधिक राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय पुरष्कार दर्ज हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की गायों में बांझपन की समस्यों पर आधारित उनके शोध के सम्बन्ध में अन्य देशों के दौरे भी किए हैं।

 

फोटोग्राफी का शौक, प्रकृति के प्रेमी

फोटोग्राफी डा. मधुमीत सिंह पसंदीदा शौक है। शिविरों में भाग लेने के लिए हिमाचल के दुर्गम स्थानों में जाने का मौका मिला। इसलिए, उन्होंने फोटोग्राफी को एक शौक के रूप में विकसित किया और वर्तमान में उनकी हार्ड डिस्क पर लगभग 40 हजार तस्वीरों का संग्रह है। वह हमेशा से प्रकृति प्रेमी रहे हैं और हिमाचल प्रदेश की और पशु- पक्षियों की फोटोग्राफी करना पसंद करते हैं। उनके कुछ संग्रह फेसबुक पेज पेज “Himachal through my eyes – Madhumeet Singh (https://www.facebook.com/Himachal-through-my-eyes-Madhumeet-Singh-273226582730364/) और “Avifauna of Himachal through my eyes – Madhumeet Singh (https://www.facebook.com/Avifauna-of-Himachal-through-my-eyes-Madhumeet-Singh-1427061374193380/ )” देखे जा सकते हैं । उनके अन्य शौक में पालतू जानवर रखना और बागवानी शामिल है।

 

विजय हाई स्कूल मंडी के स्टूडेंट्स

मधुमीत सिंह का जन्म 18 अक्टूबर, 1961 को सोलन में एक शिक्षाविद के परिवार में हुआ था। उनके पिता, बिधि सिंह, राजकीय महाविद्यालय मंडी में अर्थशास्त्र के प्रवक्ता थे और माता राज बिधि सिंह, राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मंडी व नाहन में प्रधानाचार्य व बाद में जिला शिक्षा अधिकारी रहीं। दसवीं तक की स्कूली शिक्षा विजय हाई स्कूल मंडी और कॉलेज स्तर की शिक्षा डिग्री कॉलेज नाहन में हुई। बाद में, उन्होंने पशु चिकित्सा विज्ञान में स्नातक की उपाधि और पशु मादा रोग एवं प्रसूति विज्ञान विभाग स्नातकोतर उपाधि पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय मथुरा से प्राप्त की।

 

कामयाबी से सफर में कई पड़ाव

मधुमीत सिंह अपने शुरुआती पेशेवर करियर में पंजाब और हिमाचल सरकार के राज्य पशुपालन विभागों में सेवाएं दी। बाद में उन्होंने अध्यापन को अपने व्यवसाय के रूप में चुना। अक्टूबर 1988 में उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय,पशु मादा रोग एवं प्रसूति विज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य शुरू किया। इस बीच, उन्होंने पशु मादा रोग एवं प्रसूति विज्ञान विभाग में डॉक्टरेट पूरी की। वह पशु विज्ञान महाविद्यालय,पशु मादा रोग एवं प्रसूति विज्ञान विभाग में विभागाध्यक्ष रहे और वर्तमान में डायरेक्टर एक्सटेशन एजुकेशन हैं। उनकी पत्नी, दीपिका सिंह सरकारी विद्यालय में प्रवक्ता हैं और बेटे शौर्य सिंह और समर्थ सिंह निजी क्षेत्र में अच्छे पदों पर कार्यरत हैं।

 


Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *