एक बार एनडीए, दो बार सीडीएस पास करने वाले सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा के स्टूडेंट विजेंद्र मेहरा में मजदूरों के हितों की हिफाजत के लिए संभाला मोर्चा, हिमाचल प्रदेश में मजदूर वर्ग की सबसे बुलंद आवाज, ‘अध्ययन व संघर्ष’ के जीवंत उदाहरण

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एक बार एनडीए, दो बार सीडीएस पास करने वाले सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा के स्टूडेंट विजेंद्र मेहरा में मजदूरों के हितों की हिफाजत के लिए संभाला मोर्चा, हिमाचल प्रदेश में मजदूर वर्ग की सबसे बुलंद आवाज, ‘अध्ययन व संघर्ष’ के जीवंत उदाहरण
बैजनाथ से प्रीतम सिंह की रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा के होनहार स्टूडेंट रहे और एक बार एनडीए और दो बार सीडीएस की राष्ट्रीय स्तर की लिखित परीक्षा पास कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले विजेंद्र मेहरा हिमाचल प्रदेश में मजदूर वर्ग की सबसे बुलंद आवाज हैं। नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के आह्वान पर आजाद हिंद फौज के सिपाही रहे और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आन्दोलन के लिए अंडेमान-निकोबार की सेल्यूलर जेल में दो साल का कारावास काटने वाले दादा रोडू राम के पोते विजेंद्र मेहरा स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के आदर्श वाक्य ‘अध्ययन व संघर्ष’ के जीवंत उदाहरण हैं। छात्र आंदोलन से लेकर मजदूर आंदोलन तक उनके ऊपर 100 से अधिक मुकदमे विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। दो बार टीजीटी साइंस की सरकारी नौकरी ठुकराने वाले विजेंद्र मेहरा वर्तमान वामपंथी मजदूर संगठन (सीआईटीयू) के राज्य अध्यक्ष हैं और शिमला नागरिक सभा के अध्यक्ष हैं। शिमला में निजी स्कूलों के मनमानी फीस लेने से रोकने के लिए जो छात्र अभिभावक मंच बना है, उसके संयोजक हैं।
सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार के बेटे
कांगड़ा जिला की जयसिंहपुर तहसील के कैलन पोस्ट ऑफिस के तहत आते बसूं गांव में 8 जुलाई 1977 को सैन्य पृष्ठभूमि वाले एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। पिता हुक्कम चंद भारतीय सेना में थे और माताजी किशोरी देवी गृहणी थी। दादाजी रोडू राम आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। प्रारंभिक शिक्षा के बाद माध्यमिक शिक्षा सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा से हुई। वे एनसीसी के साथ-साथ खेलकूद में भी गहरी रुचि रखते हैं। जब वह 15 वर्ष के थे तो पोंग डैम के अंदर साल 1992 में हुए बेसिक वाटर स्पोर्ट्स में प्रथम स्थान हासिल किया। उन्होंने एक बार एनडीए की और दो बार सीडीएस की लिखित परीक्षा पास की है।
छात्र आंदोलनों का नेतृत्व
छात्र राजनीति में विजेंद्र मेहरा का आगमन पालमपुर महाविद्यालय से हुआ। वे वर्ष 2000 में वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई के राज्य अध्यक्ष रहे उसके बाद साल 2002 में राज्य सचिव रहे उसके बाद 2003 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय केंद्रीय छात्र संघ के अध्यक्ष रहे और वर्ष 2009 से 2011 तक फिर एसएफआई के राज्य सचिव रहे। उन्होंने विश्व विद्यालय स्तर के कई छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया है और एक सुलझे हुए प्रवक्ता के रूप में पहचान बनाई है।
एक्टिविज्म के लिए क्विट की जॉब
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से बीजेएमसी, एमए हिस्ट्री, एमफिल और बीएड की पढ़ाई के बाद विजेंद्र मेहरा की दो बार टीजीटी साइंस सरकारी नौकरी लगी, परंतु सोशल एक्टिविजम को तरजीह देते हुए उन्होंने नौकरी करने से इनकार कर दिया। उनकी पत्नी मनोरमा शर्मा रसायन विज्ञान की प्रवक्ता हैं और वह हिमाचल प्रदेश जूनियर हॉकी टीम की सदस्य रही है।

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