उसने माउंट एवरेस्ट को झुकाया, पर सरकार ने तरस नहीं खाया

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उसने माउंट एवरेस्ट को झुकाया, पर सरकार ने तरस नहीं खाया
भांदल से विनोद भावुक की रिपोर्ट
चंबा जिला की सलूणी तहसील की दूर दराज भांदल घाटी के एक छोटे से गांव के आम घर के एक साहसी युवक ने पर्वतारोहण में अपने कौशल के दम पर 19 साल की उम्र में चंबा जिला के नाम बिरला रिकॉर्ड लिख दिया। 19 मई 2013 अश्वनी कुमार मांउट एवरेस्ट पर चढऩे वाले चंबा जिला के पहले व्यक्ति बन गए। तब उनकी इस उपलब्धि पर सरकार ने खूब पीठ थपथ्पाई , लेकिन इस होनहार युवा को रोजगार के नाम पर झुनझुना ही मिला। नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ मांउटेनरिंग उत्तराकाशी से स्पेशल बेसिक कोर्स ए ग्रेड में पास करने के बाद स्विटरजरलैंड से एक माह का रेस्क्यू कोर्स करने वाले अश्वनी कुमार प्रथम श्रेणी में एमए हैं।
देश के रक्षा मंत्री के हाथों, रक्षा मत्री पदक से सम्मानित अश्वनी कुमार की सेवाएं बेशक इंडियन आर्मी तो रेस्क्यू ऑपरेशन्स में लेती है, लेकिन अक्सर आपदाओं से जुझने वाले पहाड़ी प्रदेश में सरकारों ने आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित और माहिर इस युवा को नजरअंदाज ही किया है। अश्वनी पांच बार प्रदेश के विभिन्न मुख्यमंत्रियों से मिल कर अपने मन की बात कह चुके हैं, सभी ने उनकी उपलब्धियों पर शाबाशी दी है, नौकरी का भरोसा भी दिया, पर नौकरी नहीं दी, इसलिए मांउट एवरेस्ट को जीत कर भी अश्वनी बेरोजगार हैं।
एमए फस्र्ट डिविजन,सरकार से स्कॉरशिप
भांदल स्कूल से दसवीं, किहार से जमा दो करने के बाद अश्वनी ने डीएवी कॉलेज बनिखेत से बीए और सरकारी कॉलेज पालमपुर से प्रथम श्रेणी में एमए किया है। एनसीसी के डीजी दिल्ली की ओर से उन्हें पचास हजार की स्कॉलरशिप प्रदान की गई है। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से भी उन्हें पचास हजार की स्कॉलरशिप प्रदान की गई।
रक्षा मंत्री पदक, स्विटजरलैंड से रेस्क्यू कोर्स
वह वर्ष 2010 से लेकर 2013 तक एनसीसी के बेस्ट कैडेट रहे हैं। वर्ष 2013 में मांउट रेनिंग में उन्हें गोल्ड मैडल मिला है, वर्ष 2013 में उन्हें रक्षा मंत्री एके एंथनी के हाथों रक्षा मंत्री पदक मिला है। वर्ष 2011- 13 तक वहे कॉलेज एनएसीसी टीम के हेंड रहे हैं। इससे पहले स्कूल वॉलीबाल टीम के कैंप्टन रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में स्विटजरलैंड से एक माह का रेस्क्यू कोर्स किया है।
एनसीसी से पर्वतारोहण की शुरूआत
सलूणी तहसील के भांदल क्षेत्र के रोधोला गांव के 15 अप्रैल 1991 में को पैदा हुए अश्वनी कुमार ने वर्ष 2010 में कैडेट के तौर एनसीसी ज्वाइन की। इसी साल पहले कैंप में ही उन्हें बेस्ट केंडीडेड का पुरस्कार मिला। वर्ष 2011 में अश्वनी ने 21576 फुट ऊंचे भरतकुंता मांउटेंनरिंग एक्सिपीडिशन में भाग लिया।
इसी साल उन्होंने दूसरा एनसीसी कैंप लगाया, जिसमें उन्हें अंडर ऑफिसर के रूप में प्रमोशन मिली। इसी साल एनसीसी का बी सार्टिफिकेट हासिल किया। इसी साल लगे तीसरे एनसीसी कैंप में उन्हें एक और प्रमोशन मिला और सीनियर अंडर ऑफिसर बन गए। वर्ष 2011 में ही उन्होंने आर्मी अटैंचमेंट कैंप में भाग लिया और नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ मांउटेनरिंग उत्तराकाशी से स्पेशल बेसिक कोर्स ए ग्रेड के पास पास किया।
और छू लिया आसमान
अश्वनी कुमार ने वर्ष 2012 में प्री एवरेस्ट के लिए हुए 19688 फुट ऊंचाई वाले दियो टिब्बा मांउटेनरिंग एक्सपीडिशन में भाग लिया। इस साल अश्वनी ने एनसीसी के सी सार्टिफिकेट को अपने नाम किया। इसी साल प्री मांउट एवरेस्ट के लिए 25446 फुट ऊंचाई वाले आउंट कामेट को फतेह करने वाले एनसीसी दल में शामिल रहे। देश के एनसीसी कैडेट्स के एक्सपीडिशन दल के सदस्य के तौर अश्वनी ने 19 मई 2013 को मांउट एवरेस्ट पर अपना झंडा गाड़ दिया।
एनसीसी के बेस्ट कैडेट
अश्वनी वर्ष 2010 से लेकर 2013 तक एनसीसी के बेस्ट कैडेट रहे हैं। वर्ष 2013 में मांउट रेनिंग में उन्हें गोल्ड मैडल मिला है, वर्ष 2013 में उन्हें रक्षा मंत्री एके एंथनी के हाथों रक्षा मंत्री पदक मिला है। वर्ष 2011- 13 तक वह कॉलेज एनएसीसी टीम के हैड रहे हैं। इससे पहले स्कूल वॉलीबाल टीम के कैप्टन रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में स्विटरजरलैंड से एक माह का रेस्क्यू कोर्स किया है।

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