उसके प्रयासों से हरकत में आई भारत सरकार,चंदन की खेती के लिए हिमाचल से दरकार, एक दशक से हिमाचल प्रदेश में चंदन की खेती को मिशन बनाकर जुटे करसोग के भूप सिंह शर्मा की प्रेरककथा

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उसके प्रयासों से हरकत में आई भारत सरकार,चंदन की खेती के लिए हिमाचल से दरकार, एक दशक से हिमाचल प्रदेश में चंदन की खेती को मिशन बनाकर जुटे करसोग के भूप सिंह शर्मा की प्रेरककथा
मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट
आज से हिमाचल प्रदेश में इस साल के पौधारोपण का विधिवत शुभारंभ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मंडी के पनारसा से कर रहे हैं। इस अवसर पर हम आपको मिला रहे हैं मंडी जिला की करसोग तहसील के डाकघर जस्साल के तहत आते बड़ेयोग गांव के भूप सिंह शर्मा से जो हिमाचल प्रदेश में चंदन की खेती से किसानों के जीवन में समृद्वि की महक लाने के लिए पिछले एक दशक से पसीना बहा रहे हैं। भूप सिंह देश के वे इकलौते व्यक्ति हैं, जिनके प्रयासों से भारत सरकार ने पहली बार किसानों को चंदन की खेती का प्रशिक्षण देने की पहल की है। उनके इमानदार प्रयासों का ही परिणाम है कि अभी तक वे हिमाचज प्रदेश में 70 हजार से ज्यादा चंदन के पौधे रोपित करवा चुके हैं। वे कर्जदार होने के बावजूद चंदन की खेती को पहाड़ पर हकीकत की जमीन पर रोपने के प्रयासों में जुटे हैं। वर्तमान में भी उनकी नर्सरी में चंदन के 40 हजार पौधे मौजूद हैं, पर उनको मलाल है कि अभी तक प्रदेश सरकार चंदन की खेती को लेकर न तो कोई पॉलिसी बना पाई है और न ही इसकी खेती के लिए कोई मदद दे रही है।
भूप शर्मा ने फोकस हिमाचल को बताया कि वर्ष 2009 में जब उन्होंने केरल के मर्युर में प्रशिक्षण लिया तो वहा के चंदन डिविजन के डीएफओ ने उन्हें बताया कि चंदन की खेती के विषय में सरकार की ओर कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आल इंडिया वुड सांइस बंगलूरू का पता दिया। वे बंगलूरू गए और वहां में प्रधान मुख्य वन आरणयपाल से मिले, जिन्होंने उन्हें डारेक्टर वुड साइंस से मिलने का सुझाव दिया। भूप सिंह ने तत्कालीन केंद्रीय वन मंत्री व गृहमंत्री से मुलाकात कर वुड साइंस विभाग को चंदन की खेती से सम्बंधित पॉलिसी बनाने सम्बन्धी दिशा निर्देश भिजवाए। कई बार केरल, कर्नाटक व तमिलनाडु के विभिन्न क्षेत्रों में घूम कर चंदन की ग्रोथ क्वालिटी, संग्रहण व प्रोसेसिंग पर अध्ययन किए। उन्होंने पांच बार मैसूर के चन्दन धूप उद्योग को विजिट किया। वर्ष 2014 में उस वक्त उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, जब उन्हें केंद्र के वुड साइंस विभाग से मेल व फोन आया कि चन्दन की खेती लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया है। आप खुद भी ट्रेनिंग कर सकते हो और अन्य लोगों से भी आप ट्रेनिग करवा सकते हो।
चंदन खेती के लिए पहली बार ट्रेनिंग प्रोग्राम
मंडी जिला की करसोग तहसील के डाकघर जस्साल के तहत आते बड़ेयोग गांव के भूप राम शर्मा ने 2008 में चन्दन को हिमाचल प्रदेश में तैयार करने के लिए काम शुरू किया । वर्ष 2009 में उन्होंने चन्दन की खेती करने के बारे में केरल के मार्युर में प्रशिक्षण लिया और कई जगह ट्रायल किए। ट्रायल कामयाब होने के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने चंदन के साठ हजार पौधों की नर्सेरी तैयार की। भूप सिंह को विश्वास था कि चंदन की खेती को उत्तम प्रोजेक्ट समझ कर प्रदेश सरकार मदद के लिए आगे आएगी, लेकिन सरकारी उदासीनता के चलते वे साठ हजार पौधों में से महज चार हजार पौधे ही किसानों को बेचने में कामयाब हुए। चंदन की खेती से पहाड़ की आर्थिकी को महकाने के सपने बुन रहे भूप सिंह लाखों के कर्जदार हो गए, बावजूद इसके वे हर साल चन्दन की नर्सरी तैयार कर रहे हैं और हिमाचल प्रदेश के किसानों को चन्दन की खेती करने बारे जागरूक कर रहे हैं। भूप सिंह का दावा है कि अभी तक वे चंदन के करीब 70 हजार पौधे रोपित करवा हैं। वर्तमान में उनकी नर्सरी में चंदन के 40 हजार पौधे उपलब्ध है।
निचले हिमाचल की तकदीर बदल देगा चंदन
भूप सिंह कहते हैं कि हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्र में चंदन की खेती की अपार संभावनाएं है। प्रदेश सरकार किसानों कि आय को दोगुणा करने कि कोशिश कर रही है, जबकि चंदन की खेती से आय को कई गुणा तक बढ़ाया जा सकता है। चंदन तीसरे– चौथे साल से कमाई देना शुरू कर देता है। चंदन के बीज का तेल आयुवर्धक है। इसकी लकड़ी का तेल एंटी केंसर है। इसका हर कतरा उपयोगी है। समिति इसके बेस्ट मैटीरियल का धूप तैयार करने के अलावा मोटे लकड़ को पूजा व अनुष्ठान के लिए करियाना मार्केट में बेचने की योजना पर काम कर रही है। वे चन्दन के बूरे सेफ वुड से मूर्तियां बनाएंगे व इसकी पत्तियों को भी उपयोग में लाएंगे।
चंदन की खेती के लिए चन्दन क्रंाति का मॉडल
भूप सिंह ने चन्दन क्रंाति समिति का गठन किया है। यह समिति शत प्रतिशत रिप्लेसमेंट देकर पौधारोपण करवा रही है। जो पौधा मर जाता है, अगले साल उसके बदले मुफ्त में पौधा दिया जाता है। तीन चार साल बाद उससे उत्पन टेहना व बीज एकत्रित करवाकर समिति खरीदती है। समिति 12 साल बाद पूरे पौधे को 50 हजार प्रति पौधे की दर से खरीदती है। चंदन क्रांति समिति ने चन्दन की खेती को हर किसान तक पहुंचाने के लिए एक आकर्षक ईनामी प्रतियोगिता शुरू की है। इसमें पहले एक हजार चन्दन व अन्य औषघीय उत्पादकों को शामिल किया जाएगा। प्रतियोगिता 20 माह तक जारी रहेगी। हर माह पचास इनाम बांटे जाएंगे और हर एक सदस्य को ईनाम मिलेगा। जिसमें प्रथम पुरस्कार एक लाख रूपए व दूसरा पुरस्कार 51 हजार रूपए होगा। प्रतियोगिता मे शामिल होने के लिए तीन चरणो मे पौधरोपण को आबंटित किया है। 200 पौधो की यूनिट का मूल्य 25 हजार, दूसरे चरण में 100 पौधो की यूनिट की कीमत 15 हजार रूपए रखी है। तीसरे चरण में 50 पौधो की एक यूनिट बनाई है, जिसकी किमत नौ रूपए रखी है। एडवांस एकमुश्त भुगतान पर विशेष छूट व किश्त में भुगतान की व्यवस्था है।

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