उपन्यास छपवाने के लिए शगुन की अंगूठी बेच पहुंच गए थे दिल्ली, किसी युवा पत्रकार से ज्यादा सक्रिय हैं वरिष्ठ पत्रकार – साहित्यकार कुलदीप चंदेल

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उपन्यास छपवाने के लिए शगुन की अंगूठी बेच पहुंच गए थे दिल्ली, किसी युवा पत्रकार से ज्यादा सक्रिय हैं वरिष्ठ पत्रकार – साहित्यकार कुलदीप चंदेल
बिलासपुर से रत्न चंद निर्झर की रिपोर्ट
70 साल की उम्र में वरिष्ठ साहित्यकार – पत्रकार कुलदीप चंदेल एक युवा पत्रकार- साहित्यकार के मुकाबले ज्यादा सक्रिय हैं। सोशल मीडिया फ्लेटफॉर्म फेसबुक पर वे नियमित और निरंतर अपनी लेखनी से पाठकों को सृजन की नई दुनिया की सैर करवाने हैं। उनकी फेसबुक वाल इस बात की गवाही देती हैं। वे पुराने पत्रकारों के जीवन वृत्त पाठकों के सामने की योजना कर भी काम कर रहे हैं। उन्होंने आकाशवाणी के लिए कई धारावाहिकों का लेखन किया है, बिलासपुर किलों और केंद्र की योजनाओं के 13 किस्से भी लिखे हैं। इतना ही नहीं रानी उमावती की डायरी का पुनर्लेखन कर आकाशवाणी से प्रसारित करवाया है। 1986 में उनका पहला कहानी संग्रह ‘परिवर्तन’ प्रकाशित हुआ, जबकि ‘मनोकृति’ साल 1988 में प्रकाशित हुआ। ‘ नाहर सिंह बज्जिया’ भी उनकी लिखी पुस्तक है। उन्होंने अपने दौर की चर्चित अखबारों जनसत्ता और दैनिक ट्रिब्यून में सालों रिपोर्टिंग की है और नामी पत्रिकाओं सरिता, पांचजन्य, सोमसी, साप्ताहिक हिन्दोस्तान और दिनमान और वीर प्रताप और मिलाप जैसे समाचार पत्रों में उनकी साहित्यिक रचनाएं प्रकाशित होती रही हैं। कुलदीप चंदेल ने साल 1976 में ‘विद्रोह’ उपन्यास लिखा। दिल्ली प्रकाशक के पास प्रतिलिपि भिजवाई तो बुलावा आ गया। शादी में शगुन के रूप में मिली अंगूठी बेच कर दिल्ली पहुँच गए, पर प्रकाशक ने टरकाकर वापिस भेज दिया। वापिस लौट कर किराने की दुकान शुरू की और साथ ही एव्री वन साप्ताहिक हिन्दोस्तान और दिनमान में लिखने लगे।
फोटो देखकर कर दी थी शादी को हां
4 अगस्त 1950 में बिलासपुर (पुराने शहर में) राजा आनंद चंद के स्टेनो रहे चांद सिंह चंदेल के घर पैदा कुलदीप हुए छह बच्चों में सबसे बड़े बेटे हैं.। साल 1960 में प्राइमरी करने के बाद 1965 – 66 में बॉयज स्कूल बिलासपुर से दसवीं कर कॉलेज में साइंस स्ट्रीम में एडमिशन लिया। इंजीनियर बनने का सपना पाले कुलदीप फर्स्ट ईयर में ही पढ़ाई छोड़ कर हिसार पहुँच गए। भाखड़ा बांध विस्थापित होने की एवज में पुनर्वास के लिए वहां उन्हें जमीन का पट्टा मिला हुआ था. दस साल वहां खेती की. पिता ने बेटे की शादी के लिए एक लड़की की हिसार फोटो भेजी तो फोटो देख शादी के लिए हाँ कर दी। साल 1980 में जमीन बेच कर बिलासपुर लौट आये। कुलदीप चंदेल की पत्नी का देहांत हो चुका है। उनका एक बेटा है, जिसका नाम कर्ण चंदेल है।
पांचजन्य के प्रदेश प्रभारी
साल 1980 में नारायण सिंह स्वामी के अनुरोध पर कुलदीप चंदेल भाजपा शहरी इकाई के महासचिव बने।1982 के चुनाव में पार्टी ने उन्हें बिलासपुर जिला में चुनाव अभियान का इंचार्ज बनाया। इस दौरान वीर प्रताप और मिलाप में उनकी कहानियां छपती रहीं। साल 1990 में दिग्गज भाजपाई शांता कुमार के कहने पर पांचजन्य के प्रदेश प्रभारी बने.पांचजन्य के सम्पादक तरुण के सम्पादन में कुलदीप चंदेल ने शानदार पारी खेली। इस दौरान उन्होंने सरस्वती विद्या मंदिर के संचालन और प्रबंधन का कार्य भी देखा।

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