उन हाथों ने तराशे भगवान, मूर्तियों में डाल दी जान, बिलासुपर के मशूहर मूर्तिकार विजय राज उपाध्याय की कला की अनूठी दुनिया

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उन हाथों ने तराशे भगवान, मूर्तियों में डाल दी जान, बिलासुपर के मशूहर मूर्तिकार विजय राज उपाध्याय की कला की अनूठी दुनिया
बिलासपुर से विनोद भावुक की रिपोर्ट
उनके हाथों में भगवान तराशने का हुनर है। मूर्ति बनाने की कला में वे इतने माहिर हैं कि उनकी बनाई कलाकृतियां जीवंत दिखती हैं। बिलासपुर के मशहूर मूर्तिकार विजय राज उपाध्याय ने साढ़े तीन दशक की कला साधना में कई आदित्य मूर्तियों का निर्माण किया है। उन्होंने बंदला में 18 फुट हनुमान की मूर्ति का निर्माण किया है, वहीं बिलासपुर में महान सैनानी जनरल जोरवर सिंह की मूर्ति बनाई है। मशोबरा, पतलीकूहल, चामुंडा और चंडीगढ़ सहित प्रदेश के कई स्थानों पर उनकी बनाई मूर्तियों को देख इस मूर्तिकार के हुनर को देख सकते हैं।
वे सैंकड़ों मूर्तियों का निर्माण कर चुके हैं। शुरू में वे देवी देवताओं की मूर्तियां ही बनाते थे, लेकिन बाद में हर तरह के विषयों पर काम करने लगे। वर्तमान में यह मूर्तिकार बिलासुपर जिला प्रशासन की ओर से स्वच्छता का संदेश देने के लिए बनाई जा रही जल की रानी की अनूठी आकृर्ति के निर्माण में जुटे हैं।
13 साल की उम्र में बनाई पहली मूर्ति
विजय राज उपाध्याय बताते हैं कि उन्होंने 13 साल की उम्र में पहली बार मिट्टी से मूर्ति बनाई थी। वे कहते हैं कि उनके परिजनों ने उनके इस हुनर को प्रोत्साहित किया और उम्र मेंसाथ मूर्तियां बनाने का जुनून बढ़ता गया।
शुरू में वे देवी देवताओं की मूर्तियां बनाते थे। मूर्तियों के निर्माण सें संबंधित विभिन्न कार्यशालाओं और प्रदर्शनियों में देश के प्रतिष्ठित मूर्तिकारों को जानने- समझने का अवसर मिला। मूर्ति कला के लिए विजय राज उपाध्याय को न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि कई अन्य राज्यों में भी सम्मानित किया गया है। उन्हें उड़ीसा में आयोजित नेशनल इंट्रोग्रेशन कार्यक्रम में प्रथम स्थान मिला है।
पेंटिंग में माहिर, थियेटर मेें कमाल
विजय कुमार उपाध्याय ने खुद को न केवल एक मूर्तिकार के तौर पर स्थापित किया है, बल्कि पेंटिंग और थियेटर में भी खुद को साबित किया है। रंगमंच के सफर में बिलासपुर से लेकर गियेटी तक नाटकों के मंचन में बेस्ट एक्टर के कई खिताब जीते हैं।
पेंटर के तौर पर उनको वाटर कलर और ऑयल पेंटिंग में महारत हासिल है। उनके चित्रों की कई एकल व सांझा प्रदर्शनियां आयोजित हो चुकी है। बहुआयामी प्रतिभा के धनी विजय राज उपाध्याय आज भी अपनी कला साधना में जुटे हुए हैं।

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