इतिहास के आईने में हिमाचल पुलिस – कभी दिल्ली व अजमेर के पुलिस महानिरीक्षक संभालते थे हिमाचल पुलिस की कमान

Spread the love

इतिहास के आईने में हिमाचल पुलिस – कभी दिल्ली व अजमेर के पुलिस महानिरीक्षक संभालते थे हिमाचल पुलिस की कमान
शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
राजनीतिक इकाई के रूप में हिमाचल प्रदेश 15 अप्रैल 1948 को अस्तित्व में आया। यह चंबा, मंडी व सुकेत की रियासतों को एकीकृत करके गठित किया गया था। इसमेंं सिरमौर सहित पंजाब हिल स्टेट के रूप में जानी जाती 26 रियासतें भी शामिल थीं। इसके बाद साल1954 में बिलासपुर रियसासत का हिमाचल में विलय कर दिया गया। साल 1960 में पहले 27 पहाड़ी रियासतो को एकीकृत कर बनाने म्हासू जिला से किन्नौर जिला को अलग कर दिया गया। साल 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद, शिमला, कांगड़ा, कुल्लू व लाहौल – स्पीति जिलों का गठन हुआ। होशियारपुर जिले की ऊना तहसील और अंबाला जिले की नालागढ़ तहसील को केंद्र शासित हिमाचल प्रदेश में भी मिला दिया गया था। वर्ष 1972 में कांगड़ा और महासू के जिलों का पुनर्गठन किया गया। कांगड़ा जिले की ऊना और हमीरपुर तहसीलों को अलग– अलग जिले बनाया गया। महासू जिले के कुछ क्षेत्र को शिमला जिले के साथ मिला दिया गया, जबकि बाकि क्षेत्र से सोलन जिले का गठन किया किया गया।
1 अप्रैल 1943, सही मायनों में हिमाचल पुलिस की शुरूआत
साल 1948 में, मंडी, चंबा, सिरमौर, सुकेत और बिलासपुर जैसी रियासतों का अपना नियमित पुलिस बल था। अन्य छोटी रियासतों में एक सामान्य पुलिस बल था। सिरमौर और बिलासपुर के अपवाद के बीच पंजाब हिल स्टेट्स के शासकों ने उनकी रियासतो में पुलिसिंग की एक आम प्रणाली स्थापित करने का विचार किया। 1 अप्रैल 1943 से तीन वर्षों के लिए इस प्रणाली
को एक प्रयोग के रूप में अपनाया गया। सही मायने में यह हिमाचल प्रदेश पुलिस की शुरुआत थी।
पुलिस परियोजना के लिए कार्य समिति का गठन
उस दौर की इस महत्वपूर्ण योजना को लागू करने के लिए समुचित पुलिस प्रशासन के लिए एक कार्यकारी समिति का गठन किया गया, जिसमें 5 सदस्य शामिल थे। इस समिति के चार सदस्य रियासतों के शासकों द्वारा चुने गए थे जबकि 5 वें सदस्य को ब्रिटिश पंजाब के राजनीतिक एजेंट द्वारा नामित किया गया। इस समिति में से एक सदस्य को चेयरमैन के तौर पर निर्वाचित किया गया। पुलिस की उचित प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ब्रिटिश इंडिया पुलिस के सुपरीटेंडेंट ऑफ पुलिस स्तर के एक अधिकारी की नियुक्ति की गई। उस अधिकारी के पास इन रियासतों में पुलिस कैडर पर सामान्य निगरानी का अधिकार था।
दिल्ली व अजमेर के पुलिस महानिरीक्षक के पास हिमाचल का जिम्मा
साल 1948 में, केंद्र शासित प्रदेश के तौर पर हिमाचल प्रदेश के गठन के बाद देश के अन्य राज्यों की तरह प्रदेश के पुलिस बल को संगठित करने के प्रयास किए गए। विभिन्न रिायासतों के पुलिस बल को हटाकर हिमाचल प्रदेश पुलिस का गठन कर उन्हें समायोजित किया गया। उस समय राज्य में पुलिस प्रशासन का नेतृत्व एक पुलिस महानिरीक्षक स्तर का करता था जो दिल्ली व अजमेर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों का भी पुलिस महानिरीक्षक होता था। एस आर चौधरी (आईपी) पहले पुलिस महानिरीक्षक थे। साल1953 में हिमाचल प्रदेश के लिए एक अलग पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया। इम्पीरियल पुलिस सेवा का यह अधिकारी पंजाब कैडर से प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया गया।
ऐसे हुआ पुलिस रेजों का गठन
25 जनवरी 1971 को हिमाचल को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया। शुरू में पूरे राज्य में केवल एक पुलिस रेंज थी, जिसका मुख्यालय शिमला में था। इसके तहत सभी 12 जिले शामिल थे। 16 फरवरी, 1974 को उत्तरी रेंज स्थापित की गई, जिसका मुख्यालय धर्मशाला में बनाया गया। सात जिलों चंबा, ऊना, कांगड़ा, मंडी, लाहौल – स्पीति, कुल्लू और हमीरपुर को इसके अधिकार क्षेत्र में रखा गया था। पांच जिलों शिमला, किन्नौर, बिलासपुर, सोलन और सिरमौर को दक्षिणी रेंज में शामिल किया गया, जिसका मुख्यालय शिमला था। 24 अप्रैल, 1986 को मंडी में सेंट्रल रेंज बनाई गई। पांच जिलों मंडी, कुल्लू, लाहौल- स्पीति, हमीरपुर और बिलासपुर को इसके अधिकार क्षेत्र में रखा गया।
रिक्रयूट ट्रेनिंग सेंटर से पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज तक
शुरु से जो रिक्रयूट ट्रेनिंग सेंटर जो कि चंबा से संचालित किया जा रहा था,1974 में उसे शिमला जिले के जुन्गा में स्थानांतरित कर दिया। 25 जुलाई 1995 को इसे यहां से भी बदल कर कांगड़ा जिले के डरोह में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के तौर पर स्थापित किया गया। एक उप पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी इस पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के प्राचार्य होते हैं।
हिमाचल पुलिस की सात बटालियन
हिमाचल प्रदेश में सात पुलिस बटालियन हैं-, जिनमें से एक सशस्त्र पुलिस बटालियन है और छह भारत रिजर्व बटालियन हैं। साल 1971 में पहली सशस्त्र पुलिस बटालियन बनाई गई थी, जिसका मुख्यालय जुंगा में स्थित है। इस बटालियन के जिम्मे शिमला की जरूरी सेवाएं व जब भी आवश्यक हो स्थानीय पुलिस की सहायता करना है। पहली भारत रिजर्व बटालियन जून 1993 में में बनाई जिसका मुख्यालय डरोह था। इसका वर्तमान में यह बटालियान ऊना जिला के बानगढ़ में स्थित हैं। दूसरी और तहसरी भारत रिजर्व बटालियन 2005 में बनाई गईं। दूसरी बटालियन धर्मशाला के सकोह में स्थित है जबकि तीसरी बटानियन मंडी के पंडोह में स्थित है। साल 2008 में चौथी और पांचवीं भारत रिजर्व बटालियन (महिला)बनाई गईं। चौथी बटालियान हमीरपुर जिले के जंगलबेरी में स्थित है जबकि पांचवीं बटालियन बिलासपुर जिले के बस्सी में स्थित है। साल 2009 में छठी भारत रिजर्व बटालियन बनाई गई जो सिरमौर जिले के कोलार में स्थित है। इन बटालियनों का मुख्य कार्य सार्वजनिक व्यवस्था के रख रखाव में राज्य पुलिस की सहायता करना है।
तीन फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं
वर्ष 1988 में शिमला में राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना की गई, जिसे बाद में 26 अगस्त 1996 को जुन्गा में स्थानांतरित कर दिया गया। इस प्रयोगशाला को राष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकसित किया गया है। वर्तमान में धर्मशाला व मंडी में दो फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं कार्य कर रहीं हैं।
पुलिस वायरलेस संगठन अब पुलिस संचार व तकनीकी सेवा निदेशालय
हिमाचल प्रदेश पुलिस वायरलेस संगठन 1954 के दौरान अस्तित्व में आया था। क्रिप्टोग्राफी और वायरलेस कम्युनिकेशन इसके दो विंग थे। उप पुलिस महानिरीक्षक रैंक का एक अधिकारी इस संगठन के समग्र प्रभारी होता था। वायरलेस संगठन को साल 2007 में पुलिस संचार व तकनीकी सेवा निदेशालय के रूप में विकसित किया गया है।
भ्रष्टाचार पर नुकेल के लिए राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो
भ्रष्ट लोक सेवकों के मामलों की जांच के लिए साल 1965 में सतर्कता विभाग की स्थापना की गई थी। अतिरिक्त
पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी इस विभाग का मुखिया होता था। इसके तहत दो 2 जोन और 12 भ्रष्टाचार निरोधक इकाइयां स्थापित की गईं। सरकार के राजस्व का चूना लगाने वालों पर नुकेल कसने और सभी आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों की जांच करने के लिए साल 1981 में प्रवर्तन निदेशालय बनाया गया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रैंक का अधिकारी इसका मुखिया होता था। इसके तहत दो जोन उत्तरी जोन धर्मशाला और दक्षिणी जोन शिमला कार्य करते थे। प्रदेश सरकार की एक अधिसूचना संख्या पीइआर(वीआईजी) ए (4) -2/99 दिनांक, 15– 11- 2006 के अनुसार सतर्कता और प्रवर्तन विभागों को विलय कर राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो बनाया गया है। इसका मुख्यालय शिमला में है और पुलिस महानिदेशक / अतिरिक्त पुलिस महानिदेश रैंक का अधिकारी इसका मुखिया होता है।
यह है हिमाचल पुलिस की ताकत
वर्तमान में राज्य में 138 पुलिस स्टेशन हैं, जिनमें 12 पुलिस स्टेशन राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो के हैं, जबकि 2 पुलिस स्अेशन ट्रैफिक टूरिस्टस एंड रेलवे के और दो पुलिस स्टेशन सीआईडी के शामिल हैं। 12 जिलों में 139 पुलिस चौकियां हैं जबकि पुलिस राज्य बद्दी में एक पुलिस चौकी है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश पुलिस में 94 भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी (आईपीएस), 183 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी(एचपीए), 2144 एनजीओ ग्रेड- ए और और 15261 एनजीओ ग्रेड- दो के अधिकारी शामिल हैं।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *