इंजीनियरिंग की पढाई, हिमाचल पुलिस में मंजिल पाई, राष्ट्रपति सेवा मैडल से सम्मानित आईपीएस संतोष पटियाल की प्रेरककथा

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इंजीनियरिंग की पढाई, हिमाचल पुलिस में मंजिल पाई, राष्ट्रपति सेवा मैडल से सम्मानित आईपीएस संतोष पटियाल की प्रेरककथा
शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
हमीरपुर के उस कृषक परिवार के छह बच्चों में जब पांच परिजनों के साथ काम कर रहे होते तो सबसे सबसे बड़ा लाल किताबों की दुनिया में खोया होता। बच्चे के दादा कहते कि खेत का काम नहीं सीखेगा तो कल रोटी कामना कठिन होगा। बेशक प्राइमरी टीचर पिता ओम प्रकाश अपने सबसे बड़े बच्चे की जन्मजात प्रतिभा से गदगद थे, पर खेत – खलिहान के काम करने की कतई छूट नहीं देते थे। हमीरपुर के भोरंज के टाटपट्टी वाले सरकारी स्कूल में दाखिले के साथ की शिक्षक चौधरी कर्म सिंह इस चुलबुले बच्चे की ऊर्जा को पहचान लिया और तराश कर कोहिनूर बनाने की कोशिश शुरू कर दी। बच्चा हर कक्षा में टॉप करता गया। 8 वीं की बोर्ड परीक्षा में राज्य भर में 5 वां रैंक हासिल किया तो शिक्षक दूनी चंद शर्मा की प्रेरणा और प्रोत्साहन से दसवीं में बोर्ड इग्जाम में सैकेन्ड टॉपर रहे और हायर सेकेंडरी में पूरे हिमाचल में तीसरा स्थान हासिल किया। हायर सेकेंडरी करने के बाद एनआईटी भोपाल से इंजीनियरिंग की और कॉलेज में टॉप किया। दिल्ली में दो ब्रांचेज में एमटेक के लिए चयन हुआ और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ से एम टैक किया। साल 1994 में हिमाचल प्रदेश पुलिस सेवा में चयन हुआ और वर्तमान में डीआईजी साइबर क्राइम हैं। यह प्रोफाइल है आईपीएस संतोष पटियाल का जो वर्तमान में डीआईजी साइबर क्राइम हैं।
राष्ट्रपति सेवा मैडल से सम्मानित पुलिस अफसर
संतोष पटियाल को इसी साल राष्ट्रपति सेवा मैडल से सम्मानित किया गया है। अढ़ाई दशक से पुलिस विभाग में सेवायें प्रदान कर रहे संतोष पटियाल ने कठोर परिश्रम और कर्तव्य परायणता से कई उपलब्धियां हासिल की हैं। अब तक के अपने सेवाकाल कई ब्लाइंड मर्डर की गुत्थियों को सुलझाने के साथ इंटर स्टेट क्राइम के कई मामलों का पटाक्षेप किया है। उनकी इन्हीं उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति सेवा मैडल मिला है।
इंजीनियर, पुलिस अफसर और टीचर
संतोष पटियाल ने कुछ समय के लिए एनआईटी हमीरपुर में अध्यापन कार्य भी किया है। उनकी धर्मपत्नी पेशे से शिक्षिका हैं। यह दम्पति दो बेटियों और एक बेटे के माता – पिता हैं। उनकी बड़ी बेटी कंप्यूटर इंजीनियर है और छोटी बेटी और बेटे का इस साल इंजीनियरिंग के लिए चयन हुआ है. साल 2002 में संतोष पटियाल के पिता सेवानिवृत हुए हैं और समाजसेवा कर उसी ऊर्जा के साथ क्रियाशील हैं। साल 2008 में इस पुलिस अफसर की मां का देहांत हो गया। संतोष पटियाल फुर्सत के क्षणों में पढ़ने को प्राथमिकता देते हैं। वह सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हिमाचल के बंगाली समुदाय के सामाजिक – आर्थिक बदलाव के लिए लम्बे समय से प्रयासरत हैं। बंगाली समुदाय पर उन्होंने जमीनी स्तर पर शोध और अध्ययन किया है।

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