आज़ादी का अमृत महोत्सव : रानी ने राजपाठ ठुकराया, क्रांति का बिगुल बजाया ; स्वतंत्रता आंदोलन में कूदने वाली रानी खैरगढ़ी पहाड़ों की पहली महिला, लाला लाजपत राय के क्रांतिकारी दल की बनी संरक्षक

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मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट

स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का यह विरला उदाहरण है कि एक रानी ने राजमल के शाही ठाठ-बाठ को ठोकर मारकर अपने मुल्क को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करवाने के लिए बसंती चोला पहना और क्रांतिकारी योजनाओं के लिए धन जुटाने के मकसद से राजकीय खजाने के दरवाजे खोल दिए। उस दौर में जब अधिकतर पहाड़ी रियासतों के राजा अंग्रेजों का साथ दे रहे थे, मंडी की रानी ललिता कुमारी ने राजपाठ को छोडकर क्रांति का बिगुल फूंक दिया। रानी खैरगढ़ी के नाम से मशहूर रानी ललिता ने 1912 में पति राजा भवानी सेन की मृत्यु के बाद राजा वैभव को त्याग कर मंडी में क्रांतिकारियों की सहयोगी के तौर पर काम करना शुरू कर दिया । उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी लाला लातपत राय के क्रांतिकारी दल का नेतृत्व किया और उसकी आर्थिक मदद की। 1914 में जब मंडी में गदर पार्टी के क्रांतिकारियों की गतिविधियां तेज हुईं तो रानी खैरगढ़ी ने इस दल के नेताओं को आंदोलन के लिए बहुत सा धन प्रदान किया। एक तरफ जहां रानी क्रांतिकारियों के साथ क्रांतिकारी योजनाओं के लिए धन मुहैया करवा रही थी तो दूसरी और अंग्रेजों के खिलाफ बगावत में अहम भूमिका भी निभा रही थी।आजादी का अमृत महोत्सव : विक्टोरिया पुल को उड़ाने की थी योजना, गदर पार्टी के क्रांतिकारियों में मियां जवाहर सिंह आंदोलन को धार दी, अपने बेटे बदरी को भी क्रांतिकारी का पहनाया बसंती चोला

रियासत से बेदखल की रानी

यह वह समय था जब अमरिका और कनाडा से प्रशिक्षित क्रांतिकारी सुरजन सिंह, निधान सिंह और किशान सिंह मंडी के क्रांतिकारियों को क्रांतिकारी गतिविधियों का ज्ञान दे रहे थे। क्रांतिकारियों ने मंडी के ब्रिटिश सुपरिटेंडेंट, वजीर और अन्य कुछ अंग्रेज अफसरों को मारने की योजना बनाई। योजना के लिए धन जुटाने के चलते क्रांतिकारियों ने नागचला में सरकारी खजाने का लूट लिया। इस डकैती में दलीप सिंह और पंजाब के क्रांतिकारी निधान सिंह पकड़े गये। बर्बर यातनाएं देकर अंग्रेजों ने उनसे संगठन का भेद उगलवा लिया, जिसके फलस्वरूप क्रांतिकारी मियां जवाहर सिंह, बद्रीनाथ, शारदा राम, ज्वाला सिंह और लौंगू राम को पकड़ कर जेल  में डाल दिया गया, जबकि सिधु खराड़ा भागने में कामयाब रहे। पकड़े गये क्रांतिकारियों को मंडी षड्यंत्र केस के तहत कैद की सजा हुई, जबकि क्रांतिकारी दल की संरक्षिका रानी खैरगढ़ी को मंडी रियासत से निकाल दिया गया।भगत सिंह को फांसी वाले रोज़ लाहौर जेल में कैद थे “भगत राम’, 16 साल की उम्र में क्रांति के लिए कविता पढ़ने पर अंग्रेजी हुकूमत की आँखों की किरकिरी बनने वाले स्वतंत्रता सेनानी लाला भगत राम कड़ोहता के बलिदान को भूला पहाड़

लखनऊ में जगाई आजादी के अलख
क्रांतिकारी गतिविधियों के चलते मंडी की रियासत से बेदखल की गई रानी ललिता कुमारी ने क्रांति की शमा को जलाए रखा। रानी ललिता कुमारी का मायका लखनऊ के पास खैरगढ़ में था। रानी खैरगढ़ी  ने लखनऊ में पहुंचकर स्वाधीनता आंदोलन में भाग लेना शुरू कर दिया। मंडी रियासत के क्रांतिकारियों की प्रेरक और प्रचारक  रहीं रानी खैरगढ़ी ने अपने लखनऊ प्रवास के दौरान की कांग्रेस में प्रवेश किया और महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में बढ़ चढ़ कर भाग लिया। प्रदेश के भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से प्रकाशित हिमाचल प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम का संक्षिप्त इतिहास में कहा गया है कि पर्वतीय क्षेत्र के राष्ट्रीय संग्राम में कूदने वाली रानी खैरगढ़ी पहली महिला थी।आज़ादी का अमृत महोत्सव : शहीदे-आज़म भगत सिंह, सुखदेव और भगवती चरण की दोस्ती ने यशपाल के अंदर क्रांति की मशाल जलाई, बंदूक और कलम से लड़ी आज़ादी की लड़ाई 


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