आओ याद करें बर्फीले रेगिस्तान में रंगों से खेलने वाले चितेरे सुखदास को, सोभा सिंह को अध्यात्मिक गुरु मानने वाले सुखदास के चित्रों में रोरिक की शैली की झलक

Spread the love

आओ याद करें बर्फीले रेगिस्तान में रंगों से खेलने वाले चितेरे सुखदास को, सोभा सिंह को अध्यात्मिक गुरु मानने वाले सुखदास के चित्रों में रोरिक की शैली की झलक
केलंग से विनोद भावुक की रिपोर्ट
रंगों की दुनिया में विशेष मुकाम हासिल करने वाले पहाड़ी चित्रकारों की चर्चा हो तो बर्फीले रेगिस्तान में रंगों से खेलने वाले अध्यापक सुखदास के रचनाकर्म के बिना अधूरी ही रहेगी. विख्यात चित्रकार सरदार सोभा सिंह से संपर्क में आने पर रंगों की नई दुनिया बसाने की राह चुनने वाले सुखदास ने निकोलाई रेरिख की प्रेरणा से लाहुल घाटी की प्रकृति और जनजीवन के चित्र रचे हैं।
चित्रकला का कोई संस्थानगत प्रशिक्षण लिए बगैर बौद्ध थंका की चित्रांकन प्रक्रिया को समझा समझा । रेरिख जब चित्रांकन के लिए लाहुल आए तो सुखदास ने उन जैसा चित्रकार बनने की ठान ली। सुखदास के चित्रों में लाहुल के शिखरों पर धूप और चांदनी में बर्फ के बदलते रंग, मरुभूमि के घर, गांव, छोरतेन,गोंपा और लामा आज भी जीवंत हैं। हिमालय को केंद्रित कर बनाई उनकी पेंटिंगस में रशियन पेंटर निकोलस रोरिक की शैली की झलक मिलती है।
सोभा सिंह अध्यात्मिक गुरु
30 जून 1929 को लाहौल घाटी के ठोलंग गांव में जन्मे सुखदास ने अध्यापन को चुना और पेंटिंग को अपना शौक बना लिया। चित्रकला के प्रति बेशक देरी से रुझान हुआ लेकिन प्रसिद्ध समकालीन चित्रकार सोभा सिंह के सम्पर्क में आने पर सुखदास वर्मा ने उन्हें अपना आत्मिक गुरू मान कर उनसे चित्रकारी की बारिकियों का अध्ययन किया और फिर खुद को साबित – स्थापित किया।
नग्गर में प्रदर्शनी से पहचान
नग्गर स्थित रोरिक आर्ट गेलेरी में 2004 में उनकी पेंटिग्स की प्रदर्शनी को खूब सराहना मिली। यह उनके जीवन की पहली सबसे बड़ी प्रदर्शनी प्रदर्शनी थी जो रशियन दूतावास की और से प्रायोजित की गई थी । 2006-07 में दिल्ली में आयोजित उनकी दूसरी बड़ी प्रदर्शनी का शुभारम्भ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। गेयटी थियेटर शिमला में भी उनके चित्रों की प्रदर्शनी आयोजित की गई ।
चित्रों में ज़िंदा सुखदास
सुखदास को चित्रकाल में बेहतरीन काम के लिए वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राज्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। बेहद शालीन स्वभाव के बेहतरीन चित्रकार सुखदास जीवन के आखिरी वर्षों में लम्बी बीमारी से घिर गए और 30 मई 2016 को 87 साल की उम्र में उनके निधन से चित्रकारी के एक युग का अंत हो गया। वे दुनिया को बेहतरीन चित्रों का तोहफा दे गए। वे आज भी अपने चित्रों में ज़िंदा हैं ।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *