अचीवर्स – हमीरपुर के छोटे से गांव के युवक की न्यूजीलैंड की संसद तक पहुंचने की प्रेरककथा, न्यूजीलैंड की संसद में संस्कृत में शपथ लेने वाले पहले इंडियन हैं डॉ. गौरव शर्मा

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अचीवर्स – हमीरपुर के छोटे से गांव के युवक की न्यूजीलैंड की संसद तक पहुंचने की प्रेरककथा, न्यूजीलैंड की संसद में संस्कृत में शपथ लेने वाले पहले इंडियन हैं डॉ. गौरव शर्मा
हमीरपुर से दिनाक्षी की रिपोर्ट
साल 1996 में जब हमीरपुर जिला के गलोड़ हड़ेटा गांव से संबंध रखने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड के सहायक अभियंता गिरधर शर्मा सरकारी नौकरी छोड़कर परिवार समेत न्यूजीलैंड चले गए, उस समय उनके बेटे गौरव शर्मा की उम्र महज 11 साल थी। गिरधर शर्मा ने न्यूजीलैंड को लेकर जो परिकल्पना की थी, हकीकत उससे विपरीत निकली और उन्हें वहां नौकरी हासिल करने के लिए 6 साल का लम्बा संघर्ष करना पड़ा। देश से दूर रह रहे इस परिवार का यह समय कष्टों भरा था। किशोर से युवा होते गौरव के मन पर इस सबका गहरा असर पड़ा। पढने के लिए खूब मेहनत करनी पड़ी। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद गौरव शर्मा ने मेडिकल की पढ़ाई शानदार अकेडमिक रिकॉर्ड के साथ पूरी कर बिजनस मेनेजमेंट में भी खुद को दक्ष कर जनरल प्रैक्टिशनर के तौर पर करियर की शुरुआत की।
गौरव और उसके परिवार ने जो सालों लम्बा संघर्ष किया था, उसकी अंतस में गहरी छाप ने उसे न्यूजीलैंड की सक्रिय राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। विदेश में आजीविका और रोजगार की चुनौतियों का मुकाबला करते हुए अढाई दशक के कालखंड में डॉ. गौरव शर्मा सांसद निर्वाचित होकर न्यूजीलैंड की संसद की शोभा बढ़ा रहे हैं। पिछले साल अक्टूबर में सांसद निर्वाचित होने वाले डॉ. गौरव शर्मा की यह सफलता फर्श से अर्श तक पहुंचने की प्रेरककथा है।
मौरी भाषा के साथ संस्कृत में भी शपथ
डॉ. गौरव शर्मा पहले भी 2017 में बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें पहले जीत नसीब नहीं हुई थी। इस बार उन्होंने हैमिल्टन वेस्ट सीट से लेबर पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की। डॉ. गौरव शर्मा को 15873 मत प्राप्त हुए, जबकि इनके प्रतिद्वंद्वी नेशनल पार्टी के नेता को 11487 वोट मिले। डॉ. गौरव शर्मा ने न्यूजीलैंड के वैलिंगटन स्थित संसद भवन में मौरी भाषा के अलावा संस्कृत में भी शपथ लेकर सारी दुनिया खासकर भारत का ध्यान अपनी तरफ खींचा। समोआ और न्यूजीलैंड में भारत के उच्चायुक्त मुक्तेश परदेशी ने ट्विटर पर कहा कि डॉ. गौरव शर्मा ने सबसे पहले न्यूजीलैंड की माओरी भाषा में शपथ ली, उसके बाद संस्कृत में शपथ लेकर उन्होंने दोनों देशों की सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान दिखाया। सोशल मीडिया पर डॉ. गौरव का शपथ लेने का वीडियो जमकर वायरल हुआ। न्यूजीलैंड की संसद में संस्कृत में शपथ ग्रहण करने वाले डॉ. गौरव शर्मा पहले भारतीय हैं।
विदेश में प्रतिभा की चमक
गौरव शर्मा का जन्म एक जुलाई 1987 को पिता गिरधर शर्मा और माता पूर्णिमा शर्मा के घर मध्यवर्गीय परिवार में हुआ। पिता की सरकारी जॉब की वजह से गौरव की प्राइमरी की पढ़ाई धर्मशाला और शिमला में हुई। साल 1996 में जब अपनी जॉब छोड़कर उनके पिता गिरधर शर्मा परिवार सहित न्यूजीलैंड चले गए, इस कारण गौरव की आगे की शिक्षा न्यूजीलैंड से हुई। डॉ. गौरव शर्मा ने ऑकलैंड से एमबीबीएस करने के बाद वाशिंगटन से एमबीए किया है। वह हैमिल्टन के नवाटन में जनरल प्रैक्टिशनर रजिस्टर्ड हैं।

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