सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर शुरू हुआ साइबर वांर अब फील्ड तक पहुंचा, थप्पड़ मारने की खबर से शुरू हुआ था सारा विवाद 

कांगड़ा से विजयेन्दर शर्मा की रिपोर्ट :
 
 सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर में इन दिनों कांगड़ा में कांग्रेस के दो नेताओं की आपसी लड़ाई के चटखारे फेसबुक यूजर्स चटखारे लगाकर पढ़ रहे हैं। कांगड़ा के निर्दलीय विधायक पवन काजल को कथित तौर पर मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती के थप्पड़  मारने को लेकर शुरू हुई बहसबाजी अब परिवहन मंत्री जीएस बाली  व नीरज भारती के बीच राजनीतिक लड़ाई का रूप अख्तियार कर चुकी है। इस लड़ाई में जहां नीरज भारती खुद मोर्चा संभाले हुए हैं और उनके पक्ष के पूर्व मंत्री एवं ओबीसी वित्त निगम के अध्सक्ष चौधरी चंद्र कुमार उतर आए हैं। दूसरी तरफ इस सारे प्रकरण पर परिवहन मंत्री ने चुप्पी साध रखी है और उनकी ओर से उनके समर्थक मोर्चा संभाले हुए हैं।
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 ओबीसी के नाम पर तेज हुई राजनीतिक लड़ाई
भले ही अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि नीरज भारती ने पवन काजल को थप्पड़ मारा है कि नहीं, लेकिन इस लड़ाई में जातिवाद एक अहम मुद्दा बनकर उभरा है। दरअसल नीरज भारती ने बाली को निशाने पर लेते हुये खुद को कांगड़ा का बड़ा ओबीसी नेता होने का दम भरा है। इधर  घिर्थ बाहती चाहंग महासभा की बैठक में हुई पोस्टरबाजी से ओबीसी के मुद्दे को खूब हवा दी जा रही है।
कांगड़ा की सियासत की धुरी है ओबीसी समुदाय 
 प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में 15 विधानसभा क्षेत्र हैं, व प्रदेश की सत्ता का रास्ता कांगड़ा से होकर ही जाता है। जिससे ओबीसी बिरादरी का अहम रोल रहता है। यही वजह है कि अगले साले होने वाले चुनावों को लेकर अभी से बिसात बिछने लगी है।
तो क्या चुनाव के लिए हो रही जमीन तैयार? 
राजनीति के जानकारों का कहना है कि आज की तारीख में बाली हों या नीरज भारती दोनों ही नेता जानते हैं कि सरकार की कार्यशैली व कामकाज के आधार पर यह अगले चुनावों में जनता के बीच जाना आसान नहीं होगा। सरकार के प्रति लोगों के गुस्से को शांत  करना उनके लिए एक बड़ी चनौती होगी। ऐसे में अब ओबीसी के भावनात्मक मुददे को हवा दी जा रही है, ताकि अगले विधानसभा चुनाव में खुद को बचाया जा सके।
राजनीति में बिरादरी विशेष के वोटों का ध्रुवीकरण 
 दिलचस्प बात यह है कि कथित तौर पर थप्पड़ खाने वाले विधायक पवन काजल ओबीसी से आते हैं, नीरज भारती भी इसी बिरादरी से हैं। वहीं जीएस बाली का चुनाव क्षेत्र ओबीसी बहुल्य है। हालंाकि बाली ब्राहम्ण है, लेकिन ओबीसी बिरादरी में लोकप्रियता के चलते यहां एकछत्र राज करते आए हैं।
 राजनीति में बिरादरी विशेष के वोटों का ध्रुवीकरण 
 बाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं,लेकिन यह उनकी अपनी तिकड़म है कि भाजपा में भी उनके मुरीद हैं। नगरोटा बगवां ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी मान सिंह ने कहा की बाली की बढ़ती लोकप्रियता देखकर ओबीसी के नाम पर राजनीति करने वाले नेता घबरा गए हैं इसलिए अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि बाली ओबीसी के हितों में बिना भेदभाव के काम कर रहे हैं। उधर नीरज कहते हैं कि बाली के पक्ष में उनके चंद ही वफादार हैं। पवन काजल और नीरज भारती के एक मंच पर आने से कई संदेश गए हैं।
चुनाव मे कोई न कोई नया गुल खिलाएगी लड़ाई 
बाली बनाम नीरज भारती की यह लड़ाई क्या रूप लेती है, यह आने वाले दिनों में तय होगा, लेकिन इतना तो तय  हो चका है कि यह सियासी लड़ाई कांगड़ा की राजनिति में आने वाले चुनावों में अहम रोल अदा करेगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

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