ओपिनियन

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स्मार्ट सिटी धर्मशाला के चयन को लेकर मामला प्रदेश  के उच्च न्यायालय तक पहुंचा था। स्थानीय विधायक एवं शहरी आवास मंत्री सुधीर शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्मार्ट सिटी मिशनÓ में धर्मशाला को शामिल करवाने के लिए तथ्यपरक गहन शोध एवं अध्ययन किया था। उन्होंने इन नेशनल मिशन में अपने विधानसभा क्षेत्र के  ऐतिहासिक धर्मशाला शहर की दावेदारी के लिए अदालत में गंभीर पैरवी की और नतीजतन धौलाधार के आंचल तले बसे शहर का नाम देश के उन सौ शहरों की सूचि में शामिल हो गया, जिन्हें केंद्र सरकार की उदार सहायता से देश के स्मार्ट शहरों में शामिल करना है। यह किसी सपनों के शहर को हकीकत में जमीन पर उतार लाने की महात्वाकांक्षी परियोजना है, जिसके लिए केंद्र दिल खोल कर  पैसा दे रहा है। परियोजना का क्रियान्यवयन सबसे बड़ी चुनौती  है। स्मार्ट सिटी का जिस तरह से  कागजी ड्राफ्ट तैयार किया गया है, हकीकत में सब कुछ वैसा हुआ तो तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की मौजूदगी के चलते दुनिया भर में मशहूर इस शहर का रूतबा और बड़ा हो जाएगा। स्थानीय विधायक जिस तरह से इस प्रोजेक्ट को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताकर जितनी गंभीरता से काम कर रहे हैं, इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले स्मार्ट सिटी हकीकत की जमीन पर नजर आने शुरू हो जाएगी। इसके लिए तमाम जरूरी मैकेनिज्म जुटाया जा चुका है, विशेषज्ञों ने काम करना शुरू कर दिया। स्थानीय विधायक को इतना जरूर याद रखना होगा कि स्मार्ट सिटी की दावेदारी के लिए उन्हें अदालत को दरवाजा देखना पड़ा था, ऐसे में उनके  हर काम पर राजनीतिक विरोधियों की नजर रहेगी।

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