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प्रफुल्ल की बहादुरी को जय हिन्द 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 68वें गणतंत्र दिवस समारोह से पहले 23 जनवरी को देश के 25 बहादुर बच्चों को राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया। 
मंडी के सरकाघाट क्षेत्र के बहादुर बालक प्रफुल्ल देश के इन बच्चों में शामिल हैं। 11 वर्षीय प्रफुल्ल को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी सम्मानित कर चुके है। प्रफुल्ल की बहादुरी को जय हिन्द

प्रफुल्ल की बहादुरी को जय हिन्द

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 68वें गणतंत्र दिवस समारोह से पहले 23 जनवरी को देश के 25 बहादुर बच्चों को राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया। 
मंडी के सरकाघाट क्षेत्र के बहादुर बालक प्रफुल्ल देश के इन बच्चों में शामिल हैं। 11 वर्षीय प्रफुल्ल को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी सम्मानित कर चुके है। प्रफुल्ल की बहादुरी को जय हिन्द

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 मंडी से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट 
 14322238_1580968615541754_497126286190467156_nइस बार अडंर 19 सिंगल व डबल की बैडमिंटन स्टेट चैंपियन दिव्या मंडी जिला की सिराज घाटी की दूर- दराज खलबाहण पंचायत के सुधरानी गांव से सम्बन्ध रखती हैं। इस गांव की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां इंडोर कोर्ट तो दूर की बात, आउटडोर स्टेडियम तक की कल्पना नहीं की जा सकती हैं। छठी कक्षा में पढ़ाई के दौरान ढलानदार खेतों से बैडमिंटन की शुरुआत करने वाली दिव्या बेडमिंटन जैसे खेल में देश का एक बड़ा सितारा है।
16 नेशनल खेलने का रिकॉर्ड 
दिव्या के नाम अब तक विभिन्न आयुवर्ग में16 नेशनल खेलने का रिकॉर्ड दर्ज है। सन 2014 में कर्नाटक में आयोजित ग्रामीण खेलों में अंडर 14 में सिल्वर मेडल जीतने वाली दिव्या तीन बार जोनल खेलों में हिस्सा ले चुकी है। विभिन्न ओपन प्रतियोगिताओं में जीत का परचम लहराने वाली दिव्य भविष्य का बड़ा स्टार है। वह रोज  कोर्ट पर घंटों पसीना बहाती है और ओलंपिक खेलों में गोल्ड मेडल के सपने देख रही है।
वल्लभ कॉलेज मंडी की स्टूडेंट 
 दिव्या मंडी शहर में किराए के रूम में रह कर अपनी पढ़ाई कर रही है। वह वल्लभ कॉलेज मंडी में आर्ट स्ट्रीम में द्वितीय वर्ष की स्टूडेंट है। दिव्या पिछले कई सालों से बेडमिंटन जैसे चुस्ती- फुर्ती के खेल में अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवा रही है। स्कूली खेलें हों, ओपन टूर्नामेंट हों अथवा  ग्रामीण खेलें, उसने हर जगह अपना लोहा मनवाया है। वह पिछले कई सालों से अपने शानदार प्रदर्शन से विभिन्न आयु वर्ग में स्टेट चैंपियन रह चुकी हैं और नेशनल लेबल पर मेडल  जीत चुकी है।
पिता ने दिया बेटी को आसमान
बेटी दिव्या की खेल प्रतिभा को पहचानने और निखारने में उसके पिता संत राम की अहम भूमिका है। आरटीआई एक्टिविस्ट संत राम एक जागरूक नागरिक के तौर पर अपनी पहचान रखते हैं। वे जिला परिषद सदस्य हैं एवं पूर्व प्रधान रह चुके हैं। संत राम ने अपनी बेटी के सपने को पूरा करने के लिए कोचिंग की व्यवस्था की है। दिव्या भी पिता की उम्मीदों पर खरा उतर रही है।

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