इनसाइड हिमाचल

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rubaru1 copyहैल्पिंग हैंड & धरातल पर दिखने लगे 'रू-ब-रू : एक कदम सुनहरे कल की ओर' के सामाजिक और आर्थिक साकारात्मक प्रभाव 
 

धर्मशाला से संजीव कौशल की रिपोर्ट 
धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र की युवतियों/महिलाओं के हाथों के हुनर को निखारने के लिए 60 स्थानों पर कटिंग एंड टेलरिंग के 85 बैच संचालित किए जा रहे हैं, ताकि नारीशक्ति अपने पांवों पर खड़ा होकर परिवार की आर्थिकी का संबल बन सके। करीब दो हजार युवतियां/महिलाएं यहां से तीन माह का प्रशिक्षण हासिल कर रही हैं। यह सब संभव हुआ है गैर सरकारी संस्था 'हैल्पिंग हैंडÓ की ओर से शुरू किए गए  'रूबरू : एक कदम सुनहरे कल की ओरÓ कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन से। 'हैल्पिंग हैंडÓकी ओर से शुरू किए गए 'एक कदम सुनहरे कल की ओरÓ के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव धरातल पर बढ़े जाने लगे हैं। 

  • जरूररतमंदों के लिए मददगार हाथ

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'हैल्पिंग हैंड  स्थानीय विधायक एवं शहरी आवास मंत्री सुधीर शर्मा के नेतृत्व में धर्मशाला के बुद्धिजीवियों का एक गैर सामाजिक संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना है। यह गैर सरकारी संगठन लोगों को विभिन्न सरकारी विभागों की योजनाओं व कार्यक्रमों  के बारे में जागरूक कर रहा है और  इन योजनाओं व कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ विकास में लोगों की भागीदारी भी तय करता है।  

  • ताकि हर समस्या का हो समाधान 

रूबरू की टीम 'दस्तकÓ के तहत धर्मशाला के हर घर पर दस्तक देती है और संगठन की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत चर्चा करती है और लोगों की समस्याओं को सुनती है। समस्याओं के समाधान के लिए महिला सशिक्तकरण, नशा निवारण, पर्यटन  व रोजगार से संबंधित कई चर्चाएं और प्रस्तुतियां दी जाती हैं, जिसमें सबंधित विभागीय अधिकारियों, संबंधित पंचायतों और शहरी संस्थाओं के पदाधिकारियों, महिला मंडलों, स्वयं सहायता समूहों, युवा क्लबों व सामान्य नागरिकों को शामिल कर संबंधित मुद्दों के समाधान ढूंढे जाते हैं।

 

  • हैल्प डेस्क: सरकारी योजनाओं की जानकारी 

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हैल्पिंग हैंड के रूबरू कार्यक्रम के तहत सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए संस्था का हैल्पिंग डेस्क काम करता है। हैल्पिंग डेस्क की ओर से समाज कल्याण विभाग के माध्यम से लगने वाली वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, डीसी कार्यालय, महिला एवं बाल कल्याण विभाग, विधायक कोष के माध्यम से लड़की के विवाह के लिए मिलने वाली सहायता, कल्याण विभाग व विधायक फंड के माध्यम से आवास सहायता, मुख्यमंत्री फंड, विधायक फंड, स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से मिलने वाली चिकित्सा सहायता व सीएम फंड के माध्यम से मिलने वाली आपातकालीन सहायता के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाता है।  

  • महिलाओं में जागृति 

हैल्पिंग हैंड महिला समूहों, महिला मंडलों और महिला स्व-सहायता समूहों के साथ मिलकर महिला अधिकारों की जागरूकता और महिला सशाक्तिकरण को लेकर काम कर रहा है। संस्था ने अपने इस कार्यक्रम का नाम जागृति दिया है। संस्था नशे के खिलाफ अभियान के अलावा पर्यटन विकास और रोजगार को लेकर भी काम कर रही है।   

  • अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला शक्ति की ताकत 

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दाड़ी मेला ग्रांउड में आयोजित कार्यक्रम में महिला शक्तिने अपना अहसास करवाया। सात हजार से ज्यादा महिलाओं ने इस कार्यक्रम में भाग लेकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की झलक दिखाई। इस अवसर पर हैल्पिंग हैंड की ओर से चलाए जा रहे कटिंग एंड टेलरिंग सेंटरों से प्रशिक्षण हासिल कर रहीं युवतियोंं व महिलाओं की ओर से परिधानों को भी प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर शहरी आवास मंत्री सुधीर शर्मा की माता निर्मला देवी बतौर मुख्यातिथि उपस्थित रहीं।  

हैल्पिंग हैंड धर्मशाला के बुद्धिजीवियों का एक गैर सामाजिक संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के गरीबों और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना है। लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करना, योजनाओं व कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना और नशामुक्त, महिला सशक्तिकरण, पर्यटन और रोजगार की दिशा में काम करना है।                                                       -सुधीर शर्मा, शहरी आवास मंत्री।


 ग्रेट रिस्पेक्ट टू द नेशन – चार फुट बर्फ में तिरंगे को सलामी, मंत्री ने बारिश में भीगते हुए किया परेड का निरीक्षण 


शिमला से उमेश शर्मा की रिपोर्ट 


भारत का 68वें गणतंत्र दिवस हिमाचल प्रदेश के लिए कई मायनों में अहम रहा। इसे ग्रेट रिस्पेक्ट टू द नेशन कहें कि प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल स्पिति के मुख्यालय में चार फुट बर्फ पर बर्फबारी के बीच आयोजित गणतंत्र दिवस के जिला स्तरीय समारोह में तिरंगे को सलामी दी गई। उपायुक्त लाहौल स्पीति विवेक भाटिया ने सोशल मीडिया पर आयोजन की तस्वीरें अपलोड की हैं, जो तेजी से वायरल हो रहीं हैं। 

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केलांग में बर्फबारी के बीच तिरंगे को सलामी


नाहन में खूब भीगते हुए देशभक्ति के रंग में रंगे सुधीर शर्मा 


नाहन में जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में शहरी आवास मंत्री सुधीर शर्मा ने बारिश में भीगते हुए परेड का निरीक्षण और घ्वजारोहण किया। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने मंत्री को छाता ऑफर किया लेकिन युवा मंत्री परेड में शामिल टुकडियों के जवानों, एनसीसी कैडेटस व स्टूडेंट्स के साथ भीगते हुए देश भक्ति के रंग में रंगे दिखे। मंत्री के इस कदम ने शहरवासियों का दिल जीत लिया।   

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नाहन में भीगते हुए देश भक्ति के रंग में रेंज शहरी आवास मंत्री सुधीर शर्मा.


दिल्ली में छाएं चंबा के रंग 


देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में शामिलचंबा रूमाल की झांकी ने प्रदेशवासियों का मन मोह लिया।  हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के फाइन आर्टस के प्रोफेसर हिम चटर्जी की तैयार की गई झांकी मे, चंबा मेलिनियम गेट, कृष्ण रासलीला युक्त चंबा रूमाम हरकत करते जहां नजर आए।  परेड मंच से गुजरने के दौरान मॉडल में महिला का दाया हाथ चंबा कढ़ाई करता नजर आया। 

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राजपथ पर चंबा रुमाल की झांकी

प्रफुल्ल की बहादुरी को जय हिन्द 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 68वें गणतंत्र दिवस समारोह से पहले 23 जनवरी को देश के 25 बहादुर बच्चों को राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया। मंडी के सरकाघाट क्षेत्र के बहादुर बालक प्रफुल्ल देश के इन बच्चों में शामिल हैं। 11 वर्षीय प्रफुल्ल को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी सम्मानित कर चुके है।

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मंडी के सरकाघाट क्षेत्र के बहादुर बालक प्रफुल्ल को सम्मानित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी


देशभक्ति के रंगों में डूबा हिमाचल 


25 जनवरी को हिमाचल प्रदेश के पूर्ण राज्यत्व दिवस और अगले दिन गणतंत्र दिवस, दो दिनों तक सारा हिमाचल कड़ाके की ठंड के बावजूद देशभक्ति के रंगों में रंगा न जर आया। गएातंत्र दिवस को लेकर प्रदेश के युवाओं में खासा जोश देखा गया। हालांकि परा दिन बारिश होने के बावजूद स्कूली बच्चों में देशभक्ति के कार्यक्रमों को लेकर खासा आकर्षक रहा।  

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नगरोटा बगवां में गणतंत्र के अवसर पर कुछ यूँ दिखा जोश

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आने वाले दिनों में जहां हिमाचल प्रदेश के पशुपालकों को हरे चारे की समस्या से निजात मिल जाएगी, वहीं प्रदेश में दूध उत्पादन भी पहले के  मुकाबले बढ़ जाएगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के विशेषज्ञों ने वंडर प्लांट कहे जाने वाले अजोला को  प्रदेश के विभिन्न जलवायु वाले क्षेत्रों में   उगाने में आरंभिक कामयाबी हासिल कर ली है। आरंभिक चमत्कारिक परिणामों के बाद आईआईटी मंडी की टीम अजोला से होने वाले लाभों का आकलन करने में जुटी हुई है।

वंडर प्लांट : आईआईटी मंडी की टीम को सदाबहार चारा 'अजोला हिमाचल की जलवायु में उगाने के मिली बड़ी कामयाबी


मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट

 

सिर्फ चार महीने ही पशुओं को नसीब होता हरा चारा


हिमाचल प्रदेश में हरे चारे की समस्या विकराल हो चुकी है। घासनियों पर कांग्रेस ग्रास का कब्जा हो चुका हैं।  ऐसे में  पशुओं  को सुबह- शाम धान
का पुआल अथवा तूड़ी जैसे अपौष्टिक सुखे चारे के सहारे ही छोडऩा पड़ता है। दुधारू पशुओं को प्रतिदिन कम से कम दो किलो दाने की आवश्यकता होती है।
चारा दाना मंहगा होने के  कारण पशुओं  को पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है। इसके चलते पशुओं में तेजी से कुपोषाण बढ़ता है।

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अब अपने घर के आंनग में उगाईए साल भर हरा चारा


पशुआहार के विकल्प की खोज में विस्मयकारी फर्न-अजोला सदाबहार चारे के रूप में उपयोगी हो सकता है। कम लागत पर पैदा होने वाले इस चारे  से
पशुपालन व्यवसाय को लाभकारी बनाया जा सकता है।  चारे की लागत कम होगी तो पशुपालन घाटे का सौदा नहीं रहेगा। पशुपालन के घाटे को पाटने के लिए
प्रकृति प्रदत्त अजोला की भूमिका अहम हो सकती है। ऐसे में जबकि वनों एवं पारंपरिक चारागाहों  का क्षेत्रफल घटता चला जा रहा है। अजोला चमत्कारी
साबित हो सकता है। दुग्ध उत्पादन लागत में कमी कर अजोला जैसा सस्ता चारा पशुपालको  के लिए वरदान बन सकता है। इस चारे को घर-आंगन में उगा सकते हैं और साल भर हरा चारे का उत्पादन कर सकते हैं। अजोला के बेहतर नतीजे सामने आ रहे हैं।

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हरी खाद के रूप में भी बड़ा क्रांतिकारी नाम है अजोला


अजोला  तेजी से बढऩे वाली एक प्रकार की जलीय फर्न है, जो  पानी की सतह पर तैरती रहती है। धान की फसल में नील हरित काई की तरह अजोला को भी हरी खाद के रूप में उगाया जाता है और कई बार यह खेत में प्राकृतिक रूप से भी उग जाता है। इस हरी खाद से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और उत्पादन में भी
आशातीत बढ़ोतरी होती है। अदभुद पौधे अजोला में उच्च मात्रा में प्रोटीन उपलब्ध होता है। प्राकृतिक रूप से यह उष्ण व गर्म उष्ण कटिबंधीयक्षेत्रों में पाया जाता है। देखने में यह शैवाल से मिलती जुलती है और आमतौर पर उथले पानी में अथवा धान के  खेत में पाई जाती है।

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सस्ता सा दिखने वाले इस अजोला के हैं बडे-बड़े गुण

 

अजोला सस्ता, सुपाच्य एवं पौष्टिक पूरक पशु आहार है। इसे खिलाने से वसा व वसा रहित पदार्थ सामान्य आहार खाने वाले पशुओं के दूध में अधिक पाई जाती
है। अजोला  पशुओं में बांझपन निवारण में उपयोगी है। पशुओं के पेशाब में खून की समस्या फॉस्फोरस की कमी से होती है। पशुओं को अजोला खिलाने से यह
कमी दूर हो जाती है। अजोला में प्रोटीन आवश्यक अमीनो एसिड, विटामिन (विटामिन ए, विटामिन बी-12 तथा बीटा-कैरोटीन) एवं खनिज लवण जैसे
कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, आयरन, कापर, मैगनेशियम आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते है। इसमें वसा की मात्रा अत्यंत कम होती है।

 

और गाढ़ा हो जाएगा दूध, बढ़ जाएगी दूध की पैदावार


दुधारू पशुओं पर किए गए प्रयोगों से साबित होता है कि जब पशुओं को  उनके दैनिक आहार के   साथ 1.5 से 2 किग्रा अजोला प्रतिदिन दिया जाता है तो
दुग्ध उत्पादन में 15-20 प्रतिशत वृद्धि  दर्ज की गई है। इसके  साथ इसे खाने वाली गाय-भैसों की दूध की गुणवत्ता भी पहले से बेहतर हो  जाती है।प्रदेश में मुर्गीपालन व्यवसाय भी बहुतायत में प्रचलित है। यह बेहद सुपाच्य होता है और  यह मुर्गियों का भी पसंदीदा आहार है। पोस्ट्री फार्ममें आहार के  रूप में अजोला का प्रयोग करने पर ब्रायलर मुर्गो के भार में वृद्धि तथा अंडा उत्पादन में भी वृद्धि पाई जाती है।आरंभिक नजीते रहे शानदार, कई जगह  प्रयोग रहा सफल आईआईटी मंडी की ओर से वंडर प्लांट अजोला लगाने के आरंभिक नजीते शानदार रहे हैं। आईआईटी की विशेषज्ञों की ओर से इस प्लांट की सक्सेस रेट का पता लगाने के लिए मंडी के विभिन्न जलवायु वाले क्षेत्रों जैसे बल्ह घाटी, सनौर घाटी, चौहार घाटी सहित कई जगहों पर अजोला पैदा करने के प्रयोग
शानदार रहे हैं। मंडी आईआई के आरंभिक प्रयोगों में सामने आया है कि अन्यदुधारू पशु तो बड़े चाव से अजोला को खा रहे हैं, लेकिन पहाड़ी गाय इसको
खाने से कुछ आनाकानी कर रही है। इस बारे में भी प्रयोग जारी हैं।

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अजोला एक फायदे अनेक


अजोला से दूध की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ती है। अजोला सूअर, खरगोश,मुर्गी, बत्तख और मछली सहित पशुओं के विभिन्न प्रकार के लिए भोजन के पूरक
के रूप में प्रयोग किया जाता है। इतना ही नहीं चमत्कारी पैदा अजोला बायोगैस के उत्पादन में इस्तेमाल किया जा सकता है। अजोला खरपतवार के
नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। अजोला एक जैव उर्वरक के रूप मे चावल, गेहूं सहित अन्य फसलों के लिए लाभप्रद है। इतना ही नहीं केंचुआ
खाद बनाने के लिए भी अजोला का प्रयोग बेहद लाभकारी साबित हुआ है। इस प्लांट कीर सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे सिर्फ एक बार ही उगाना है, फिर
यह पौध अपने आप साल भर हरे चारे के रूप में आपके आंगन में ही उगा रहेगा।

 

गुणों से भरपूर है यह चारा


अजोला प्रोटीन, आवश्यक अमीनो एसिड, विटामिन (विटामिन ए, विटामिन बी 12 और बीटा कैरोटीन), खनिज कैल्शियम फास्फोरस, पोटेशियम, लौह, तांबा,
मैग्नीशियम से भरपूर है तथा पशुओं के विकास मे भी सहायक है। सूखे वजन के  आधार पर इस मे 25-30 प्रतिशत प्रोटीन,10-15 प्रतिशत मिनरल्स और 7-10
अमीनो एसिड, जैव सक्रिय पदार्थ और जैव पॉलिमर पाये जाते हैं। इसकी उच्च  प्रोटीन और कम लिग्निन सामग्री के कारण पशुधन आसानी से इसे पचा सकते हैं।
अजोला पशुओं के चारे के साथ मिलाया जा सकता है या  सीधे दिया जा सकता है।दुधारू पशुओं के लिए यह सबसे कम लागतवाला हरा चारा साल भर आपके डेयरी फार्म के पास ही उपलब्ध रहेगा। पशु तंदरूस्त रहेेंगे, दूध उत्पादन की लागत कम होगी और दूध की पैदावार ज्यादा होगी। पशुपालन लाभदायक हो जाएगा।

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बड़ा ही आसान है अजोला को उगाना

 

 अजोला की तेज पैदावार और उत्पादन के लिए इसे प्रतिदिन उपयोग हेतु लगभग 200 ग्राम प्रति वर्गमीटर की दर से बाहर निकाला जाना आवश्यक हैं।  अजोला
तैयार करने के लिए अधिकतम 30 डिग्री सेंग्रे तापमान उपयुक्त माना जाता है। समय-समय पर गड्ढे में गोबर एवं सिंगल सुपर फॉस्फेट डालते रहें, जिससे
अजोला फर्न तीव्रगति से विकसित  होता रहे। प्रति माह एक बार अजोला तैयार करने वाले गड्ढे या टंकी की लगभग 5 किलो मिट्टी को ताजा मिट्टी से
बदलेें, जिससे नत्रजन की अधिकता या अन्य खनिजों की कमी होने से बचाया जा सके। एजोला तैयार करने की टंकी के पानी के पीएच मान का समय-समय पर
परीक्षण करते रहें। इसका पीएच मान 5.5-7.0 के  मध्य होना उत्तम रहता है।10 दिनों के अन्तराल में, एक बार अजोला तैयार करने की टंकी या गड्ढे से

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25-30 प्रतिशत पानी ताजे पानी से बदल देना चाहिए, जिससे नाइट्रोजन की अधिकता से बचाया जा सके  हर 6 माह के अंतराल में, एक बार अजोला तैयार
करने की टंकी या गड्ढे को पूरी तरह खाली कर साफ कर नये सिरे से मिट्टी,गोबर, पानी एवं अजोला कल्चर डालना चाहिए। अजोला की उत्पादन लागत
बहुत ही कम आती है, इसलिए यह किसानों के  बीच तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है। दक्षिण भारत से शुरू हुआ अजोला की खेती का कारवां अब इस पहाड़ी
प्रदेश तक आ पहुंचा है। आईआईटी मंडी की ओर से प्रगतिशील पशुपालकों को अजोला कल्चर सहित अलोचा तैयार करने की किट बांटी गई है।

 

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बीड बिलिंग पैराग्लाइडिंग एस्सोसिऐशन के अध्यक्ष को यकीन, एक दिन ओलिंपिक में भी स्थान मिलेगा

विनोद भावुक, / बीड़, बिलिंग:

पैराग्लाइडिंग एशिया गेम्स में शामिल, बीड़ बिलिंग का कद बढा

ओलिंपिक कौंसिल ऑफ़ एशिया ने परग्लाइडिंग को 2018 में प्रस्तावित 18वें एशिया गेम्स में पैराग्लाइडिंग को शामिल करने को सहमति दे दी है। 8वें एशिया गेम्स इंडोनेशिया के जकार्ता और पलमवर्ग में आयोजित होने जा रहे हैं. इन गेम्स में 32 ओलिंपिक और 8 नॉन ओलिंपिक स्पोर्ट्स को शामिल किया गया है, जिनमें परग्लाइडिंग भी शामिल है. पिछले पैराग्लाइडिंग का आयोजन कर सुर्खोयाँ बटोरने वाले बीड बिलिंग पैराग्लाइडिंग एस्सोसिऐशन के अध्यक्ष एवं शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का कहना है कि परग्लाइडिंग से जुड़े दुनिया भर के हर खिलाड़ी, विशेषज्ञ और परग्लाइडिंग के विकास में जुटे संघों के लिए बड़ी सकून भरी खबर है. उनको यकीन है कि साहस और रोमांच के खेल को एक दिन ओलिंपिक में भी स्थान मिलेगा. वह दिन भी जल्द आयेगा।BIr-Billing-Himachal

पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप का मेगा इवेंट सुधीर शर्मा के खाते में
बेशक बीड़ बिलिंग में प्रस्तावित पैराग्लाइडिंग वल्र्ड कप के मेगा इवेंट के आयोजन का श्रेय शहरी आवास मंत्री सुधीर शर्मा के खाते में जाता हो, लेकिन यह बात शायद कम ही लोगों को पता है कि इस घाटी में एयरो स्पोर्टस की संभावनाओं को देखते हुए यहां एयरो स्पोट्र्स का पहला आयोजन अस्सी के दशक में तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री पंडित संत राम ने करवाया था।

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नील किनियर और कीथ निकोल्स ने की पहचान 
चाय बागानों और देवदार के घने जंगलों से घिरे धौधार की बीड़ बिलिंग घाटी दुनिया की दूसरी सबसे अच्छी एयरो स्पोट्र्स साइट है। बीड़ बिलिंग अस्सी के दशक में उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैराग्लाइडिंग के खेल को लेकर सुर्खियों में आया, जब नील किनियर और कीथ निकोल्स जैसे साहस और रोमांच शोकीनों ने एयरो स्पोर्टस के खेल में घांटी में संभावनाओं को पता लगाया और समुद्र तल से 2400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बीड़ बिलिंग में टेक ऑफ प्वांयट से हैंग ग्लाइडिंग शुरू की।

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पंडित संत राम ने बनाया बीड़ बिलिंग को पैराग्लाइडरों का स्वर्ग 
बीड़ बिलिंग को पैराग्लाइडरों को स्वर्ग बनाने की का श्रेय तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री पंडित संत राम शर्मा को जाता है। उन्होंने घाटी में पहले हैंग ग्लाइडिंग के आयोजन के लिए जमीन तैयार की, जिसे फोर स्क्वायर ने प्रायोजित किया। हालांकि अस्सी के दशक में घाटी में शुरू हुए एयरो स्पोट्र्स ने धीरे- धीरे रफ्तार पकड़ी और नब्बे के दशक में घाटी में एयरो स्पोर्टस के आयोजन नियमित हो गए।

आसमान में कलाबाजियों को लगे पंख
बीड़ बिलिंग में पैराग्लाइडिंग को शुरू करने का श्रेय फ्रेंच पायलटों को जाता है। उन्होंने दो दशक पहले शुरू हुई पैराग्लाइडिंग 1992 में घाटी में पैराग्लाइडिंग की शुरूआत की। 2002 से लेकर 2007 में घाटी में लगातार पैराग्लाइडिंग प्री वल्र्ड कप का आयोजन स्थल बन गया। 2013, के प्री वल्र्ड कप ने बीड़ बिलिंग को पैराग्लाइडिंग वल्र्ड कप का आयोजन स्थल बनने के लिए जमीन मजबूत की। वर्मतान शहरी आवास मंत्री सुधीर शर्मा जो बीड़ बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोशिएशन के अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप मेगा इवेंट के लिए अहम भूमिका अदा की है।birbillingparagliding4

 

sudhir-sharma-himachal"साहस और रोमांच के खेल को एक दिन ओलिंपिक में भी स्थान मिलेगा. वह दिन भी जल्द आयेगा। "
सुधीर शर्मा, बीड बिलिंग पैराग्लाइडिंग एस्सोसिऐशन के अध्यक्ष एवं शहरी विकास मंत्री

 

संगीत जन्म से था हेंडीकैप, पहनी टीम इंडिया की कैप 

मंडी की उत्तरशाल घाटी के रूंज गांव के दिव्यांग संगीत चौहान ने विपरीत परिस्थितियों में पेश की संघर्ष की मिसाल 

मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट 

मंडी जिला के द्रंग विधानसभा क्षेत्र की उत्तरशाल घाटी के रूंज गांव के इंजीनियर नानक चंद एव गहणी मां आशा देवी के घर जब 24 मार्च 1991 को पहली ही संतान के रूप में दिव्यांग बच्चे  संगीत का जन्म हुआ तो किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन यही बच्चा अपनी आसाधरण खेल प्रतिभा के बलबूते देश में अपनी खास पहचान बनाएगा। 

सात साल की उम्र, गांव से शुरू हुआ किक्रेट का सफर 

संगीत चौहान ने सन 1998 में सात साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया। हालांकि एक दिव्यांग ब"ो के लिए क्रिकेट जैसे खेल में खुद को साबित करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन संगीत में एक आग थी, एक गुस्सा था, जो उसे हमेशा कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करता रहा। मुश्किलें उसे और मजबूत करती गईं और वह निखरता गया।

सुंदरनगर से होकर निकला बड़ी कामयाबी का रास्ता 

Sangeet Chauahanसंगीत चौहान पहली बार सन 2005 में तब सुर्खियों में आया, जब हिमाचल प्रदेश रा’य टेनिस बॉल क्रिकेट एसोशिएशन की ओर से सुंदरनगर में आयोजित टूर्नामेंट में खेलने का अवसर मिला। उनकी प्रतिभा को चंडीगढ़ के कोच ओम प्रकाश और सुदरनगर के कोच रविकांत जम्वाल ने पहचाना और उन्हें आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। अगले ही साल युनाइटेड क्लब चंडीगढ़ की ओर से खेलने का अवसर मिला।

अंडर 16 खेलने वाले प्रदेश के पहले दिव्यांग खिलाड़ी 

संगीत चौहान के हिमाचल प्रदेश के  पहले दिव्यांग क्रिकेटर हैं जो जिला स्तर पर समान्य टीम में खेले हैं। सन 2008 में एचपीसीए की ओर से आयोजित अंडर 16 इंटर डिस्ट्रिक के लिए वे लाहौल स्पीति टीम से चुने गए और ऊना के साथ अपना पहला मैच खेला। यहीं से टीम के अतिरिक्त खिलाड़ी और लास्ट डाऊन पर बल्लेबाजी करने उतरने वाले संगीत को ओपनर बेट्समैन व ऑल रांउडर के तौर पर स्थापित होने का अवसर मिला। हिमाचल प्रदेश में शारीरिक अक्षम क्रिकेट टीम बनाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। उन्होंने उन्होंने अन्य खेलों में भी शारीरिक अक्षम खिलाडिय़ों को खोजने में अहम भूमिका अदा की है। 

संगीत  अपनी  मां ,छोटे  भाई और  बहन के  साथ

संगीत  अपनी  मां ,छोटे  भाई और  बहन के  साथ​

भोपाल के रणजी प्लेयर की  पारखी नजर में आई प्रतिभा

मार्च 2010 में जब वह दिल्ली में नेट प्रेक्टिस कर रहे थे तो भोपाल के रणजी खिलाड़ी चमन लाल उनके खेल से इतने प्रभावित हुए और उन्हें ओल्ड युनाइडेट क्रिकेट क्लब से खेलने का ऑफर दिया। संगीत चौहान नियमित इस क्लब के लिए खेलते आ रहे हैं।  सन 2010 में अचानक संगीत के पिता का देहांत हो गया। परिवार में सबसे बड़ा बेटा होने के चलते संगीत पर क्रिकेट छोडऩे का दबाव आ गया, तब मां ने संबल दिया।  

फरिशता बन आए मनाली को होटलियर अमन वर्मा

मनाली के होटलियर एवं क्रिकेटर अमन वर्मा ने मानसिक और आर्थिक तौर पर संगीत की हर संभव मदद की। यह अमन की मदद का कमाल था कि सन 2012 में संगीत का चयन पहली बार टीम इंडिया के लिए हुआ।  उन्हें पाकिस्तान के साथ होने वाली सीरिज के लिए संगीत को भारतीय शारीरिक अक्षम क्रिकेट टीम में चुना गया। संगीत का कहना है कि आज वह जहां भी है,  जिस भी मुकाम है, उसमें उसकी मेहनत के अलावा कई लोगों की मदद शामिल है। उनका कहना है कि वे हमेशा उन तमाम मददगारों के ऋणी रहेंगे, जिन्होंने उन्हें उनके बचपन के सपने को पंख लगाने में हर संभव मदद   की है। 

 

सबसे पहले पाकिस्तान के खिलाफ पहनी टीम इंडिया की कैप 

 पाकिस्तान के खिलाफ इंडिया कैप  पहचचने वाले संगीत सन 201& में एशिया कप में टीम इंडिया का हिस्सा रहे संगीत भारत, पाक- अफगानिस्तान की ट्राई सीरिज टीम इंडिया की ओर से खेले। वे काठमांडू में आयोजित भारत नेपाल सीरिज में भी टीम इंडिया का हिस्सा थे। सन 2014 में वे कंधे में आई चोट के चलते साऊथ अफ्रीका टूअर नहीं कर सके। सन 2015 में एशियन चैंपियनशिप में भाग लेकर एक बार फिर ख्ुाद को साबित किया। इस साल15 अक्टूबर से 20 अक्टूबर के बीच होने वाले जोनल टूर्नामेंट के संगीत नॉर्थ जोन टीम का हिस्सा हैं। 

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अरूणिमा से मिला संगीत को जीवन का मकसद 

आर्टिफिशियल पांव के बलबूते दुनिया की सबसे ऊंची चोटी मांउट एवरेस्ट को फतेह कर अपने साहस का लोहा मनवाने वाली नेशनल स्तर की वालीबॉल खिलाड़ी अरूणिमा सिन्हा शहीद चंदशेखर अजाद विकलांग खेल अकादमी एवं स्पोर्टस युनिवर्सिटी फॉर हैंडीकैप्ड की स्थापना कर रही हैं। संंगीत इस संस्था से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि अकादमी पैरा ओलंपिक के लिए प्लेयर तैयार करेगी। वह कहते हैं कि अरूणिमा से उनके जीवन को नया मकसद दिया है। 

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सॉल्ट वैली फांउडेशन तराशेगी ग्रामीण प्रतिभाएं 

हिमाचल प्रदेश की शारीरिक अक्षम क्रिकेट टीम जब भी प्रदेश से बाहर टूर्नामेंट खेलने जाती है तो टीम के आने- जाने व ठहरने के खर्च की व्यवस्था संगीत चौहान करते हैं। संगीत के पिता का सपना था कि ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए उनकी आर्थिक मदद बेहद जरूरी है। संगीत का कहना है कि अपने दिवंगत पिता के अरमानों को पूरा करने के लिए वे सॉल्ट वैली फाउंडेशन की स्थापना कर रहे हैं। फोकस हिमाचल के साथ संवाद में उन्होंने बताया कि जब तक उनके जीवित थे, हर बार एक ही बात समझाते थे कि मेहनत करो, कभी न कभी किसी न किसी की नजर जरूर पड़ती है। संगीत का कहना है कि यही गुर वे युवा प्रतिभाओं को देते हैं। 

भावुक का चाबुक 

‘संगीत’ की मधुर धुन कभी सुनेंगे ‘अनुराग’ 

Anurag Thakurहिमाचल के लिए यह गौरव की बात है कि देश में क्रिकेट को संचालित और नियंत्रित करने वाली और दुनिया की सबसे अमीर संस्था बीसीसीआई के सर्वो"ा पद पर हिमाचल प्रदेश के होनहार युवा अनुराग ठाकुर काबिज हैं। इस बात में भी कोई शक नहीं है कि पहाड़ पर क्रिकेट के प्रति तभी दीवानगी पैदा हुई जब अनुराग ठाकुर के हाथ एचपीसीए की कमान आई। धर्मशाला में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट  ग्रांउड का निर्माण और वहां पर आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों के आयोजन को अनुराग ठाकुर की व्यक्तिगत उपलब्धि के तौर पर प्रचारित करने में भी कोई हिचक नहीं। यहां दूसरा पहलू यह भी है कि बीसीसीआई के अध्यक्ष को अपने प्रदेश में क्रिकेट को लेकर जांच की आंच से गुजरना पड़ रहा है। एचपीसीए और प्रदेश सरकार के टकराव के बीच यह भी कड़वा सच है कि प्रदेश में शरीरिक रूप से अक्षम क्रिकेट टीम के लिए न तो कभी एचपीसीए की ओर से मदद को हाथ बढ़ाए गए और न ही प्रदेश सरकार ही इस बारे में संवेदनशील दिखी। बावजूद इसके संगीत चौहान  जैसे युवा शरीरिक अक्षम खिलाड़ी ने अपनी प्रतिभा के दम पर तमाम संघर्ष के बावजूद इंडिया टीम की कैप पहन कर दिखा दी। सामायिक सवाल है कि विपरीत परिस्थितियों में क्रिकेट के उत्थान की गौरव गाथा लिखने वाले ‘संगीत’ जैसे खिलाड़ी निखारने में एचपीसीए मदद करेगी?

शिमला से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट 
 ऐसा पहली बार हो रहा है कि हिमाचल प्रदेश में काम करने वाली महिला पत्रकार अपने हकों को लेकर  एकजुट हुई हैं। महिला पत्रकारों के अधिकारों को लेकर पहली बार संगठन    बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश राज्य महिला पत्रकार संघ के बैनर तले अब प्रदेश की महिला पत्रकार महिला पत्रकारों को संगठित करने, उन्हें सशक्त बनाने, महिला पत्रकारों के अधिकारों, सुरक्षा कानून, समान न्यूनतम वेतन और मीडिया संस्थानों में महिला उत्पीडन जैसे मुददों पर अपनी आवाज मुखर करेंगी। इसी संदर्भ में बीते सप्ताह  प्रदेश भर से शिमला पहुंची महिला पत्रकारों ने महिला पत्रकारों के सामने आने वाली समस्याओं को लेकर मंथन किया। करीब तीन दर्जन महिला पत्रकारों ने बैठक में एकजुट होकर भविष्य की रणनीति तय की और राज्य कार्यकारिणी का गठन किया।

मीडिया और महिला  :  शिमला में हुआ हिमाचल प्रदेश महिला पत्रकार संघ का गठन, सर्वसम्मति से प्रदेश कार्यकारिणी का गठन कर बनाई विस्तार की योजना

 नन्दिनी  मुख्य सलाहकार, उपासना को अध्यक्ष पद 
वाईएमसीए में आयोजित बैठक के दौरान सर्वसम्मति से राज्य कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें शिमला की वरिष्ठ पत्रकार नन्दिनी मित्तल को मुख्य सलाहकार  और  सिरमौर के पांवटा की पत्रकार उपासना शर्मा सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया। संघ की उपप्रधान कुल्लू की रिपोर्टर लवलिन थरमानी, महासचिव नाहन की अंजलि त्यागी, कोषाध्यक्ष शिमला की जया शर्मा, संयुक्त सचिव  शिमला की शिवानी कपूर, प्रेस सचिव शिमला की भावना शर्मा, सचिव मंडी  की सोनिया शर्मा, सह सचिव घुमारवी की आशा शर्मा, संगठन सचिव चंबा की नीलम ठाकुर को नियुक्त किया गया। इसके साथ ही मुख्य सलाहकार नंदनी मित्तल, प्रतिभा चौहान,भवानी नेगी, नैना वर्मा को मनोनित की गई।
एक बेटी को गोद लेगा संघ, उठाएगा पढ़ाई का सारा खर्च
उपासना शर्मा ने बताया कि संघ के गठन का मुख्य उददेश्य प्रदेश की महिला पत्रकारों को संगठित करने और उन्हें सशक्त करना है। महिला पत्रकारों के अधिकारों, महिला सुरक्षा कानून, समान न्यूनतम वेतन और मीडिया संस्थान में उत्पीडन जैसे मुददों को भी संघ प्राथमिकता से उठाएगा।  महासचिव अंजलि त्यागी ने बताया कि संघ द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत एक बच्ची गोद ली जाएगी, जिसकी शिक्षा की सारी जिम्मेदारी संघ उठाएगा। सामाजिक उत्थान से जुड़े सभी राष्ट्रीय कार्यक्रमों में संघ भागीदारी देगा। जिला स्तर पर भी कमेटीयां बनाई जाएगी जो अपने अपने जिलों में पत्रकारिता से जुड़ी महिलाओं और समाज की अन्य महिलाओं के लिए कार्य करेगी।

लो मुकाम तक पहुंचाई, मजीठिया वेतन बोर्ड की लड़ाई

   धर्मशाला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
मीडिया कर्मियों के उत्पीडन की लड़ाई लडऩे और मजीठिया आयोग की सिफ़ारिशो को लागू करवाने के लिए लम्बा संघर्ष करने वाले रविन्द्र अग्रवाल प्रदेश के इकलौते पत्रकार हैं। कांगड़ा शहर से संबंध रखने वाले विधि स्नातक रविन्द्र अग्रवाल लंबे अर्से से  मजीठिया बेज बोर्ड की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। उपनी लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने के लिए उन्होंने आरटीआई को हथियार बनाया और प्रदेश उच्च न्यायालय में मामले को ले गए। अखबार प्रबंधन को अदालत तक खींचने वाले व्हिसल ब्लोहर रविन्द्र  अग्रवाल को उनके संघर्ष को सलाम करते हुए नामी वेबपोर्टल भड़ास 4मीडिया  की ओर से 11 सितंबर को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश में पत्रकारों के हकों के लिए मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लडऩे के लिए सम्मानित किया।
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ऐसा पत्रकार जो पत्रकारों के हकों के लिए लड़ रहा 
जिस मजीठिया वेज बोर्ड को सरकार ने गठित किया, उसकी रिपोर्ट को लागू किया, कानून बनाने के बाद मीडिया मालिकों को इसे इंप्लीमेंट करने को कहा, सुप्रीम कोर्ट ने मालिकों की याचिका को खारिज कर जल्द से जल्द इसका लाभ मीडिया वालों को देने का निर्दश दिया, उसे ही अखबार मालिकों ने कूड़ेदान में डाल दिया। अब सुप्रीम कोर्ट में मानहानि का मुकदमा चल रहा है। देश के कोने कोने से सैकड़ों ऐसे मीडियाकर्मी उठ खड़े हुए, जिन्हें उनका प्रबंधन उनका वाजिब कानूनी हक नहीं दे रहा था। हिमाचल प्रदेश में मजीठिया  बेज बोर्ड की लड़ाई लडऩे में रविंद्र अग्रवाल की भूमिका अहम रही है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों की लड़ाई लडऩे वाले संगठनों के साथ मिल कर प्रदेश के पत्रकारों की आवाज को दिल्ली पहुंचाया है। रविंद्र अग्रवाल कहते हैं कि बेशक प्रदेश के अधिकतर मीडियाकर्मी अपने प्रबंधन के दबाव के चलते इस बारे में सामने आने से कतराते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि अधिकतर मीडियाकर्मी अउनके संपर्क में  हैं, तभी वे इस लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने में कामयाब रहे हैं।
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हिमाचल के लेबर कमिशनर को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
रविंद्र अग्रवाल के ही संघर्ष का परिणाम है कि प्रदेश के मीडियाकर्मियों की लड़ाचई सु्रपीम कोर्ट में आखिरी चरण में पहुंच चुकी हैं। ताजा जानकारी के अनुसार अखबारों में तैनात पत्रकार व गैर पत्रकार कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमल न करने पर चल रहे अवमानना मामले में हिमाचल प्रदेश के लेबर कमिशनर आईएएस, अमित कश्यप  को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए अगली पेशी पर हिमाचल प्रदेश के समस्त समाचार पत्रों में मजीठिया वेज बोर्ड के तहत वेतनमान दिए जाने से संबंधित पूरा रिकार्ड प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं, सुपीम कोर्ट ने उन्हें चार अक्टूबर को होने वाली अगली पेशी पर व्यक्तिगत तौर पर हाजिर होने के आदेश दिए है। प्रदेश के पत्रकार यह उम्मीद कर रहे हैं कि सु्रपीम कोर्ट में होने वाली अगली पेशी में समाचार पत्रों के प्रबंधन को मीडिया कर्मियों के हक  तत्काल देने के आदेश हो सकते हैं। प्रदेश के मीडिया कर्मी इस मसले को देश के मीडिया की मुख्यधारा में लाने के लिए अग्रवाल को धन्यवाद करते हैं।
डेस्क-फील्ड दोनों जगह फिट  कांगड़ा, हमीरपर और चंबा में किया काम
रविंद्र अग्रवाल ने अपने पत्रकारिता कैरियर की शुरूआत डेस्क से की थी।  बाद में वे रिपोर्टर के तौर पर भी खुद को साबित कर चुके हैं। वे ‘दिव्य हिमाचलÓ, ‘दैनिक भास्करÓ और ‘अमर उजालाÓ में प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे कांगड़ा, हमीरपुर और चंबा  में काम करने के बाद अब  द्घद्बह्म्.ष्शद्व के नाम से अपने वेब पोर्टल का संचालन करते हैं। मजीठिया बोर्ड की लड़ाई लडऩे में उनकी कानून की पढ़ाई बहुत काम आई है। उन्होंने न केवल प्रदेश के पत्रकारों के हकों की लड़ाई को बुलंंद किया, बल्कि पत्रकारों को इस लड़ाई को लडऩे के लिए प्रेरित भी किया है।  मध्यवर्गीय परिवार से संबंध रखने वाले रविंद्र को अपनी लड़ाई लडऩे के लिए अदालतों के कई चक्कर लगाने पड़े और कोर्ट कचहरी के चलते खासा पैसा खर्च करना पड़ा है।
पिछली रिपोर्ट पर उठाए कई सवाल, अब चार सप्ताह में देनी होगी फिर रिपोर्ट 
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के संबंध में आदेश जारी करते हुए लिखा है कि कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के लेबर कमिशनर अमित कश्यप द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट/ शपथपत्र पूरी तरह चिपकाई गई रिपोर्ट की तरह है और यह इस बात का खुलासा नहीं करती। कोर्ट इस शपथपत्र के बेसिक फैक्ट तक नहीं समझ पाया है। यह रिपोर्ट/शपथपत्र बहुत ही साधारण तरीके से फाइल किया गया है और लेबर कमिशनर ने उन्हें सौपे गए दायित्व का अस्वीकार्य तरीके से निर्वाह किया है। हिमाचल प्रदेश के लेबर कमिशनर को चार सप्ताह में इस संबंध में एक रिपोर्ट कोर्ट को सौंपने के निर्देश देते हुए चार अक्तूबर को कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत तौर पर मौजूद रहने के आदेश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि अगली पेशी में प्रदेश के पत्रकारों को राहत मिलने वाली है।
हादसा भी नहीं तोड़ पाया इस पत्रकार का हौसला 
रविंद्र अग्रवाल कुछ साल पहले एक हादसे का शिकार हो गए थे, जिसके चलते उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और वे लम्बे समय तक बिस्तर पर रहे थे। इसके बावजूद हकों के प्रति लडऩे  की उनकी न आग कम हुई और न हौसला पस्त हुआ। उन्होंने तमाम कानूनी पेचीदगियों के बावजूद मजीठिया बोर्ड के लाभ के लिए मजबूत केस बनाया और अखबार प्रबंधन को कोर्ट तक लेकर गए। वे कहते हैं कि इस लड़ाई को लडऩे के लिए उन्हें अखबार प्रबंधन की ओर से प्रताडि़त करने की हर संभव कोशिश की गई। इस लड़ाई में अकेला होने के बावजूद उन्होंने पहाड़ के पत्रकारों की आवाज को बुलंद करने में कोई कोर कसर बाकि नहीं रखी। भड़ास 4 मीडिया की ओर से सम्मानित किए जाने पर उनका कहना है कि दूसरों के लिए न्याय दिलाने वाली कौम को अपनी लड़ाई लडऩी जरूरी है। इसलिए वह संघर्षरत हैं।

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