डेमोक्रेसी

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ठाकुर के खिलाफ ठाकुर, द्रंग में दरार 

धर्मशाला को प्रदेश की दूसरी राजधानी बनाने की मुख्यमंत्री की घोषणा के विरोध और समर्थन के साईड इफेक्ट्स 
विनोद भावुक की रिपोर्ट 
हिमाचल की सियासत की हल्की सी समझ रखने वाला जानता है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह के बीच छतीस का आंकड़ा है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जब धर्मशाला से धर्मशाला को प्रदेश की दूसरी राजधानी बनाने  की घोषणा की  तो स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह मंडी से इस घोषणा का विरोध करने वाले प्रदेश के पहले कांग्रेसी बन गए। एक केबिनेट सहयोगी ने अपनी ही सरकार के मुखिया के फैसले के विपरीत मीडिया में अपने विरोध को मुखर किया। इस कहानी में ट्रवीस्ट  तो तब आया जब उनके अपने ही घर में उनके बयान का विरोध हो गया और मुख्यमंत्री के फैसले को ऐतिहासिक करार दे दिया गया। इस कहानी में ठाकुर के खिलाफ ठाकुर के आ जाने से द्रंग कांग्रेस की दरार साफ दिखने लगी है। 

 

 

 

ठाकुर की पीठ पर राजा का हाथ 

कभी ठाकुर कौल सिंह के हनुमान कहे जाने वाले प्रदेश कांग्रेस  के उपाध्यक्ष एवं जिला परिषद मंडी के उपाध्यक्ष पूर्ण चंद ठाकुर ने मीडिया को जारी प्रैस बयान में कहा है कि धर्मशाला को प्रदेश की दूसरी राजधानी बनाने का मुख्यमंत्री का फैसला स्वागत योग्य है। पूर्व चंद ठाकुर लंबे अर्से तक कांग्रेस के जिला संगठन की राजनीति करते आ रहे थे। कुछ ही दिन पहले उन्हें कांग्रेस के जिला अध्यक्ष पद से हटाकर प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। बताया जा रहा है कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के दौरान ठाकुर कौल सिंह और पूर्ण चंद ठाकुर बढ़ी दूरियों के चलते अब वे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबियों में शामिल हैं। पूर्ण चंद ठाकुर की पीठ पर वीरभद्र सिंह का हाथ बताया जा रहा है। 

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ठाकुर कॉल सिंह के ब्यान के विरोध में पूर्ण चंद ठाकुर का प्रेस नोट


सत्ता की रार से सियासी दरार 


जिला परिषद मंडी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर बीते साल हुए हाई बोल्टेज  पॉलिटिकल ड्रामे में पहले परिवहन मंत्री जीएस बाली को रणनीतिकार के रूप में मंडी भेजा गया और जब फिर भी उम्मीदवारों को लेकर विवाद नहीं हल हुआ तो बाद में शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा को इसके लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राजनीतिक दूत के तौर मंडी तैनात किया। अध्यक्ष पद पर ठाकुर कौल सिंह की बेटी चंपा ठाकुर और उपाध्यक्ष पद पर पूर्ण चंद ठाकुर की ताजपोशी हुई। हालांकि इस बीच ठाकुर कौल सिंह और पूर्ण चंद ठाकुर के बीच दूरियों के बीज बोये जा चुके थे। 

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कभी साथ साथ थे


इस जुगलबंदी को भी समझना होगा


चंपा ठाकुर के खिलाफ ऐन मौके पर भाजपा ने पमिता शर्मा  पर राजनीतिक दांव खेल कर चुनाव में हार के बावजूद ठाकुर कौल सिंह को कमजोर करने की रणनीतिक चाल चल दी। बता दें कि कौल सिंह ठाकुर के गृह जिला परिषद वार्ड से जीती पमिता शर्मा पूर्व पंचायत समिति सदस्य दीपक ठाकुर की पत्नी है। दीपक ठाकुर को कभी ठाकुर कौल सिंह के बेहद नजदीकियों में गिना जाता, लेकिन अब भाजपा का दामन थाम चुके दीपक  की पूर्ण चंद ठाकुर से नजदीकियां द्रंग में नए सियासी सीमकरणों की ओर इशारा कर रही हैं। 

 
 

सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर शुरू हुआ साइबर वांर अब फील्ड तक पहुंचा, थप्पड़ मारने की खबर से शुरू हुआ था सारा विवाद 

कांगड़ा से विजयेन्दर शर्मा की रिपोर्ट :
 
 सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर में इन दिनों कांगड़ा में कांग्रेस के दो नेताओं की आपसी लड़ाई के चटखारे फेसबुक यूजर्स चटखारे लगाकर पढ़ रहे हैं। कांगड़ा के निर्दलीय विधायक पवन काजल को कथित तौर पर मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती के थप्पड़  मारने को लेकर शुरू हुई बहसबाजी अब परिवहन मंत्री जीएस बाली  व नीरज भारती के बीच राजनीतिक लड़ाई का रूप अख्तियार कर चुकी है। इस लड़ाई में जहां नीरज भारती खुद मोर्चा संभाले हुए हैं और उनके पक्ष के पूर्व मंत्री एवं ओबीसी वित्त निगम के अध्सक्ष चौधरी चंद्र कुमार उतर आए हैं। दूसरी तरफ इस सारे प्रकरण पर परिवहन मंत्री ने चुप्पी साध रखी है और उनकी ओर से उनके समर्थक मोर्चा संभाले हुए हैं।
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 ओबीसी के नाम पर तेज हुई राजनीतिक लड़ाई
भले ही अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि नीरज भारती ने पवन काजल को थप्पड़ मारा है कि नहीं, लेकिन इस लड़ाई में जातिवाद एक अहम मुद्दा बनकर उभरा है। दरअसल नीरज भारती ने बाली को निशाने पर लेते हुये खुद को कांगड़ा का बड़ा ओबीसी नेता होने का दम भरा है। इधर  घिर्थ बाहती चाहंग महासभा की बैठक में हुई पोस्टरबाजी से ओबीसी के मुद्दे को खूब हवा दी जा रही है।
कांगड़ा की सियासत की धुरी है ओबीसी समुदाय 
 प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में 15 विधानसभा क्षेत्र हैं, व प्रदेश की सत्ता का रास्ता कांगड़ा से होकर ही जाता है। जिससे ओबीसी बिरादरी का अहम रोल रहता है। यही वजह है कि अगले साले होने वाले चुनावों को लेकर अभी से बिसात बिछने लगी है।
तो क्या चुनाव के लिए हो रही जमीन तैयार? 
राजनीति के जानकारों का कहना है कि आज की तारीख में बाली हों या नीरज भारती दोनों ही नेता जानते हैं कि सरकार की कार्यशैली व कामकाज के आधार पर यह अगले चुनावों में जनता के बीच जाना आसान नहीं होगा। सरकार के प्रति लोगों के गुस्से को शांत  करना उनके लिए एक बड़ी चनौती होगी। ऐसे में अब ओबीसी के भावनात्मक मुददे को हवा दी जा रही है, ताकि अगले विधानसभा चुनाव में खुद को बचाया जा सके।
राजनीति में बिरादरी विशेष के वोटों का ध्रुवीकरण 
 दिलचस्प बात यह है कि कथित तौर पर थप्पड़ खाने वाले विधायक पवन काजल ओबीसी से आते हैं, नीरज भारती भी इसी बिरादरी से हैं। वहीं जीएस बाली का चुनाव क्षेत्र ओबीसी बहुल्य है। हालंाकि बाली ब्राहम्ण है, लेकिन ओबीसी बिरादरी में लोकप्रियता के चलते यहां एकछत्र राज करते आए हैं।
 राजनीति में बिरादरी विशेष के वोटों का ध्रुवीकरण 
 बाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं,लेकिन यह उनकी अपनी तिकड़म है कि भाजपा में भी उनके मुरीद हैं। नगरोटा बगवां ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी मान सिंह ने कहा की बाली की बढ़ती लोकप्रियता देखकर ओबीसी के नाम पर राजनीति करने वाले नेता घबरा गए हैं इसलिए अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि बाली ओबीसी के हितों में बिना भेदभाव के काम कर रहे हैं। उधर नीरज कहते हैं कि बाली के पक्ष में उनके चंद ही वफादार हैं। पवन काजल और नीरज भारती के एक मंच पर आने से कई संदेश गए हैं।
चुनाव मे कोई न कोई नया गुल खिलाएगी लड़ाई 
बाली बनाम नीरज भारती की यह लड़ाई क्या रूप लेती है, यह आने वाले दिनों में तय होगा, लेकिन इतना तो तय  हो चका है कि यह सियासी लड़ाई कांगड़ा की राजनिति में आने वाले चुनावों में अहम रोल अदा करेगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

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शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
 हिमाचल प्रदेश की राजनीति से हल्का सा भी सरोकार रखने इस राजनीतिक प्रसंग को अच्छी तरह जानते हैं कि चुनावी बेला में पार्टी संगठन को अपने हिसाब से लेकर चलने का हुनर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बखूबी जानते हैं। पिछला विधानसभा चुनाव जरा याद करो। ठाकुर कौल सिंह प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे और वीरभद्र सिंह भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते केंद्रीय मंत्रीपद से हटाए जा चुके थे। चुनावी सुर्खियां थीं कि वीरभद्र सिंह की जगह ठाकुर कौल को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया जा रहा है, लेकिन इसी बीच वीरभद्र सिंह ने दिल्ली दरबार में पार्टी के केंद्रीय संगठन पर दबाव बनाकर न केवल प्रदेशाध्यक्ष पद को ठाकुर कौल सिंह से ऐन चुनावी मौके पर छीन लिया, बल्कि मुख्यमंत्री के केंडीडेट के रूप में भी खुद के नाम पर आलाकमान से मुहर लगाकर ही वीरभद्र सिंह दिल्ली से शिमला वापिस लौटे थे। जिस तरह से पिछले विधानसभा चुनाव से पहले ठाकुर कौल सिंह को हटाने का अभियान चला था, ठीक उसी तर्ज पर अब वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखबिंदर सिंह सुक्खू को हटाने की कवायद शुरू हो गई है। नए प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने के लिए जिन नामों की अटकलें लगाई जा रही हैं, उनमें शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा,उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री, सहकारी बैंक के अध्यक्ष एवं कांग्रेस उपाध्यक्ष हर्ष महाजन के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं जो वीरभद्र सिंह के बेहद खास हैं।

 कब्जे का  यह है कारण 

प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के टिकट तय करने वाली प्रदेश चुनाव समिति और स्क्रीनिंग कमेटी में पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष की खास भूमिका होती है। अगले साल हिमाचल प्रदेश में विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में टिकट आबंटन में पार्टी प्रदेशाध्यक्ष की भूमिका अहम होगी। बीते कुछ दिनों से  सत्ता के गलियारों में अटकलें तेज हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने सुखविंद्र सुक्खू को अध्यक्ष पद से हटवाने के लिए आलाकमान को पत्र भेजा है। हालांकि, पत्र भेजने की पुष्टि न तो सीएम कार्यालय कर रहा है और न ही कांग्रेस नेताओं को इसकी जानकारी है। सुक्खू भी कह रहे हैं कि उनका मानना है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है। लेकिन पार्टी के ही खास सूत्रों का कहना है कि वीरभद्र सिंह चुनावी बेला में अपनी पंसद के पार्टी प्रदेशाध्यक्ष को लेकर आलाकमान पर दबाब बना रहे हैं।

सुर्खियां बने ये तीन नाम 

सुधीर शर्मा, मुकेश अग्रिहोत्री व हर्ष महाजन में से एक के सिर बंधेगा कांग्रेस के संगठन की सरदारी का सेहरा 

सुधीर शर्माsudhir

शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का नाम प्रदेशाध्यक्ष के पद के लिए प्रमुखता से लिया जा रहा है। इस बहाने मुख्यमंत्री राजनीतिक लिहाज से सबसे बड़े कांगड़ा जिला पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बनाकर अपने विरोधियों को चित कर करने की तैयारी में ।

mukesh-agnihotriमुकेश अग्रिहोत्री

उद्योग मंत्री मुकेश अग्रिहोत्री का नाम भी प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए मुख्यमंत्री का पसंदीदा नाम हैं। लोक संपर्क विभाग का जिम्मा होने के चलते प्रदेश के मीडिया से बेहतर रिश्तों के चलते चुनावी बेला पर मुकेश अग्निहोत्री बेंहतर इलेक्शन प्रबंधक साबित हो सकते हैं।

harshहर्ष महाजन 

सहकारी बैंक के अध्यक्ष एवं कांग्रेस उपाध्यक्ष हर्ष महाजन मुख्यमंत्री के खास लोगों में से एक हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी वे ही उनके सबसे बड़े रणनीतिकार साबित हुए थे। वह चुनावी राजनीति से दूर है, इस वजह से भी उनकी ताजपोशी की खबरों को बल मिल रहा है।

दुख में सुख

sukhbinder-sukhuकांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू का कहना है कि सीएम और पीसीसी प्रमुख को बनाना या हटाना एआईसीसी का अधिकार है। वे मानते हैं कि सीएम ने उनके खिलाफ ऐसा कोई पत्राचार नहीं किया है, जैसा प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने सरकार और संगठन में मौजूदा समय में बेहतरीन तालमेल बताया। प्रदेश कांग्रेस में उपाध्यक्ष, महासचिवों के पदों से लेकर निचले स्तर तक भविष्य में व्यापक फेरबदल के संकेत दिए। सुक्खू ने मीडिया से अनौपचारिक बातचीत की। बता दें कि पिछले साल कांग्र्रेस पार्टी संगठन के चुनाव अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए थे। तबसे सुक्खू भी पार्टी अध्यक्ष के पद पर बने हैं। सुक्खू  लीक से हट कर चलने वाले नेता हैं, जो पंडित सुखराम, आनंद शर्मा और विद्या स्टोक्स जैसे पार्टी नेताओं की पसंद हैं। चुनाव से पहले उनको बदलने की अटकलों को वे सिरे से खारिज कर बेहतर तालमेल की बात करते हैं।

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